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The Insiders: देश के नंबर एक उद्योगपति से रिश्वत की डिमांड, एमडी से पीड़ित अफसर करवा रहे ट्रांसफर, कर्नाटक के आईएएस की जोड़ी ने रची पोषण आहार घोटाले की पटकथा

द इनसाइडर्स में इस बार पढ़ें आईएएस की नई तबादला सूची पर दलालों का साया मंडराया

कुलदीप सिंगोरिया@9926510865

भोपाल | वल्लभ भवन यानी मंत्रालय में आईएएस की तबादला सूची की सरसराहट है। लेकिन इस सरसराहट में सांप रूपी दलालों की भी आवाजें आ रही हैं। वे अफसरों को उनकी पोस्टिंग करवाने के लिए अपने पास आने का न्यौता दे रहे हैं। हालांकि, जो हटने वाले हैं, वे बोरिया-बिस्तर बांधकर जनता को भगवान भरोसे छोड़ आराम फरमा रहे हैं; और जो कलेक्ट्री के मुंगेरीलाल हैं, वे आंखें फाड़े दलालों की चौखट पर बैठे हैं। रेट कार्ड खुला है—मालवा चाहिए तो वजन बढ़ाओ, चंबल चाहिए तो सूटकेस भारी करो। यही नहीं कुछ सीनियर अफसर भी जूनियरों को पदों के रेट बताकर सौदेबाजी को अंतिम रूप दिलवा रहे हैं। हालांकि कई पदों के लिए अभी तक डील नहीं हुई तो हो सकता है सूची कुछ और दिन टल जाए। जो भी हो पर सरकार में अहम पोस्टिंग की बिक्रियों का दौर शायद फिर शुरू हो गया। इसलिए आश्चर्य न कीजिए कि कोई अनफिट को महत्वपूर्ण पोस्ट मिल जाए तो समझ लीजिए कि लक्ष्मी कृपा हुई है। यही नहीं, आईएएस का अवमूल्यन देखना हो तो सूबे के महाराज के दौरे में देखिए। सरेआम कलेक्टर को दुत्कारते हुए नेताजी ने औकात याद दिला दी—”तुम मेरी ड्यूटी में हो!” जनता के सेवक को पल भर में अपनी निजी जागीर का हरकारा बना दिया। साहब गर्दन झुकाए बेइज्जती का घूंट पीते रहे। और इस नग्न अपमान पर तथाकथित आईएएस एसोसिएशन ने चुप्पी की चादर ओढ़ ली। कोई निंदा नहीं, कोई विरोध नहीं। क्यों? क्योंकि जलील होने वाले साहब सीधे यूपीएससी से नहीं, प्रमोटी यानी हम्माल सेवा जो ठहरे! कुल मिलाकर लाल बत्ती की मृगतृष्णा में आईएएस अफसरों ने अपना स्वाभिमान और आत्मा दोनों गिरवी रख दिए हैं। इसलिए हम भी इन्हें अपने हाल पर छोड़कर शुरू करते हैं, अपने चुटीले व गुदगुदाने वाले अंदाज में इस हफ्ते का द इनसाइडर्स…

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कर्नाटक की जोड़ी मचाएगी धमाल

नौनिहालों के पोषण आहार से बच्चों की सेहत सुधरे न सुधरे, अफसरों की जेबें जरूर पोषण से मोटी होती हैं। अब इस विभाग में 1200 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर नया खेल शुरू हुआ है। किस्सा यूं है कि टेंडर की शर्तों को लेकर तत्कालीन आईएएस मैडम की विभाग के एक छोटे अफसर से ठन गई। बात बढ़ी तो मैडम को कर्मचारियों के विरोध का सामना करना पड़ा और अंततः उनकी विदाई हो गई। हालांकि, जाते-जाते उन्होंने उस छोटे अफसर का तबादला कर दिया। असली दांवपेंच इसके बाद शुरू हुआ। विभाग की शीर्ष आईएएस अफसर उस वक्त छुट्टी पर थीं और प्रभार दूसरी मैडम के पास था। मौका देख उन्होंने तत्काल तबादला आदेश निरस्त कर छोटे अफसर को उसी कुर्सी पर फिर बैठा दिया। इधर, रुखसत हुईं मैडम की जगह जिस नए आईएएस अफसर की तैनाती हुई, उनका संबंध कर्नाटक से है। विभाग की शीर्ष मैडम भी कर्नाटक कैडर/मूल की हैं। छोटे अफसर की वापसी के बाद अब इस ‘कर्नाटक जोड़ी’ ने धमाल मचाने का पूरा ताना-बाना बुन लिया है। पुख्ता इनसाइड खबर है कि पूरी पटकथा लिखी जा चुकी है। जिस कंपनी को 1200 करोड़ का यह भारी-भरकम ठेका मिलने जा रहा है, वह भी कर्नाटक की है। अब टेंडर के पर्दे के पीछे मचे घमासान की असल वजह साफ समझी जा सकती है।

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तेल को लेकर मप्र में शीत युद्ध

तेल की जंग केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है; मध्य प्रदेश की सियासत में भी बीजेपी के दो शीर्ष नेताओं के बीच इस पर घमासान छिड़ा है। मामला इथेनॉल (बायोफ्यूल) के कारोबार का है। एक नेता इस धंधे के पुराने मंझे हुए खिलाड़ी हैं, जबकि दूसरे नेता अब इसमें कदम रखने की तैयारी में हैं। नए खिलाड़ी ने प्रदेश में भरपूर पानी वाले तीन ठिकानों पर जमीनें भी तलाश ली हैं। कारोबार में सीधी प्रतिस्पर्धा तय देख पुराने दिग्गज को यह दखल नागवार गुजरा। तल्खी की दूसरी वजह दतिया चुनाव के बाद बागियों पर कार्रवाई को लेकर उपजा मतभेद भी है। इनसाइडर बताते हैं कि खींचतान से आजिज आकर पुराने खिलाड़ी ने इस्तीफे तक की पेशकश कर दी थी। फिलहाल डैमेज कंट्रोल तो कर लिया गया है, लेकिन यह सीजफायर कब तक टिकेगा, कहना मुश्किल है।

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नवरात्रि में कुछ बड़ा होने वाला है…

भाजपा के आंतरिक घमासान से पर्दा हटाते हुए सीधे मुद्दे पर आते हैं। सियासी गलियारों की पुख्ता खबर है कि इस नवरात्रि पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक में बड़ी सर्जरी देखने को मिल सकती है। बदलाव का दायरा कितना व्यापक होगा, यह कयासों के दायरे में है; लेकिन तय मानिए कि कुछ विकेट गिरेंगे और कइयों की लॉटरी लगेगी।

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साहब रहे तो बोर्ड हो जाएगा अफसर-विहीन

आईएएस अफसरों की कुंडली में लगता है राहु बैठ गया है; मातहतों से टकराव की खबरें थम नहीं रहीं। ताजा मामला ‘इडली-डोसा गैंग’ के एक सीनियर आईएएस का है, जो विभाग के प्रमुख होने के साथ संबद्ध बोर्ड के एमडी भी हैं। साहब की बदजुबानी और मगरूरियत का आलम यह है कि प्रशासनिक सेवा और विभाग अफसर उनसे किनारा करने लगे हैं। उनके असहनीय बर्ताव से तंग आकर चार-पांच सीनियर अफसर पहले ही अपना तबादला करवा चुके हैं, और जो बचे हैं वे भी रवानगी की जुगत में हैं। साहब, मुमकिन है कि आपको हिंदी ठीक से न आती हो, पर अपने मातहतों को दिल से तो प्रताड़ित मत कीजिए। यही हाल रहा तो बोर्ड जल्द ही अफसर-विहीन हो जाएगा।

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यह होती है रीढ़ की हड्डी!

नौकरशाही में रीढ़ की हड्डी का जिक्र अब मुहावरा बन चुका है, क्योंकि इसका सीधा दिखना दुर्लभ है। पर अपने एक आईएएस साहब ने इसे कुछ ज्यादा ही सीधा कर लिया, नतीजतन कलेक्टरी ही छिन गई। मजे की बात यह है कि यह रीढ़ ईमानदारी या जनसेवा के लिए नहीं, बल्कि देश के नंबर एक उद्योगपति से वसूली के लिए सीधी हुई थी। साहब ने अपने रुआब में उद्योगपति की कंपनी से बड़ी मासिक बंदी की मांग का फरमान सुना दिया। अब जिनका सिक्का देश ही नहीं विदेशों में भी चलता हो, उनसे पंगा भारी पड़ना ही था; कारोबारी ने चुटकी बजाते ही साहब की रवानगी करवा दी। कलेक्टरी तो गई, पर देश के सबसे बड़े सेठ से हफ्ता मांगने के दुस्साहस के लिए दाद तो देनी ही पड़ेगी!

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निवेश के लिए जंगल की तलाश

लंबे समय से निवेश के खेल में जमे एक प्रमुख सचिव साहब ने अब जंगलों का रुख किया है। चर्चा गर्म है कि वन क्षेत्र में कदम रखते ही उन्होंने आलीशान रिसॉर्ट के लिए मुफीद जमीन तलाशना शुरू कर दिया है। साहब का विजन दूरगामी है; उन्हें लगता है कि कुदरत की गोद में किया गया यह निवेश फायदे का सौदा रहेगा और रिटायरमेंट के बाद रिसॉर्ट से बंपर कमाई का पक्का जरिया बन जाएगा।वैसे हमने पिछले अंकों में ‘यार’ नाम से जुड़े जिस नगर का जिक्र किया था, सुना है वहीं की जमीन अब साहब के लिए सोना उगलने की तैयारी में है।

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साला! यह वसूली कम क्यों नहीं होती?

एक विभाग में हाल ही में पदस्थ हुए नए ईएनसी (इंजीनियर-इन-चीफ) साहब के ताजा फरमान ने मैदानी इंजीनियरों की नींद उड़ा दी है। साहब का सीधा तर्क है कि वे ऊपर भारी-भरकम नजराना देकर इस कुर्सी पर बैठे हैं, लिहाजा अब उनका कट दोगुना होगा। इंजीनियरों ने जब हाथ-पांव जोड़े, तो साहब ने दो टूक नसीहत दे डाली—”जरा दूसरे विभागों का भी पता कर लो, वहां भी रेट बढ़ चुके हैं; व्यवस्था तो यहां भी यही चलेगी।” गुणवत्ता जांच और औचक निरीक्षण की मार झेल रहे इंजीनियरों के लिए यह दोहरी आफत बन गई है। उनका दर्द है कि एक तरफ प्रमुख सचिव की सख्ती के चलते पदोन्नतियां अटकी पड़ी हैं, और दूसरी ओर ईएनसी की यह बेलगाम चौथवसूली। चारों तरफ से घिरे इंजीनियर अब बगावत के मूड में हैं। दबी जुबान में चेतावनी है कि पानी सिर से ऊपर गुजरा तो बड़ा धमाका तय है। ईएनसी साहब, संभल जाइए!

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नहले पर दहला

एक रसूखदार मंत्री जी के पीए का सिक्का पूरे सूबे में चलता है। मंत्री के दरबार में जिसने भी ज्यादा पर फड़फड़ाने की कोशिश की, पीए साहब ने उसे तुरंत लंगड़ी मारकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसी बीच उनके तिलिस्म को चुनौती देने एक नए साहब की एंट्री हुई। रंगीनमिजाजी और अय्याशियों के लिए मशहूर ये साहब उसी विभाग के मुलाजिम हैं, जिसके मंत्री जी मुखिया हैं। उनकी इसी जुगाड़ू महारत को देखकर मंत्री जी ने उन्हें अपने पास अटैच कर लिया। दफ्तर में आते ही शातिर पीए से उनका सीधा टकराव हुआ। दांव-पेंच के इस खेल में शुरुआत में साहब मात खा गए और अपने ही गोलपोस्ट में गोल कर बैठे। लेकिन खिलाड़ी वे भी कच्चे नहीं थे; पीए को नहले पर दहला देते हुए उन्होंने मंत्री की चौखट छोड़ी और सीधे सरकार की मुख्य सेवा में ऊंची छलांग लगा दी। अब विभागीय अफसर भी चटखारे ले रहे हैं कि पीए साहब निपटाने में जुटे रहे, पर साहब के तगड़े संपर्कों ने बाजी पलट दी।

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शिवगामी देवी और धुंधकारी की लड़ाई सड़क पर

पिछले अंक में हमने जिस विभाग के ईएनसी यानी ‘धुंधकारी’ साहब और वित्त अधिकारी ‘शिवगामी देवी’ के बीच ‘मेरा वचन ही है शासन’ वाले टकराव का खुलासा किया था, वह नूराकुश्ती अब सरेआम हो चुकी है। दोनों की आपसी खींचतान से त्रस्त ठेकेदारों ने ईएनसी दफ्तर में ढोल-धमाकों के साथ जमकर प्रदर्शन किया और इस अंदरूनी जंग की पोल खोल दी। यह हाई-वोल्टेज ड्रामा सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। सार्वजनिक फजीहत के बाद अब धुंधकारी साहब ने प्रमुख सचिव को बाकायदा चिट्ठी भेज दी है। इसमें उन्होंने शिवगामी देवी के तमाम कारनामों का कच्चा-चिट्ठा खोलते हुए खुद को पूरी तरह बेकसूर करार दिया है। हालांकि शिवगामी देवी ने भी कह दिया है कि धुंधकारी भागवत कथा के सातवें दिन सुनते ही मोक्ष प्राप्त कर लेगा। शिवगामी के अनुसार सातवां दिन शुरू हो गया है। कथा पुरी होते ही बांस की सातवीं गांठ फटेगी और धुंधकारी को प्रेतयोनि से मुक्ति यानी पीएचई से हटवा देंगी। देखना दिलचस्प होगा कि वल्लभ भवन इस महाभारत पर क्या फैसला लेता है।

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रंगीला राजा’ की विधुर अभिलाषाएं

हकमे में कुर्सी की हनक और लतखोरी जब सिर चढ़कर बोलने लगे, तो साहब खुद को किसी रियासत का नवाब समझने की भूल कर बैठते हैं। हमारे नियमित पाठक जानते हैं कि पानी से जुड़े विभाग में जिस दागी मुख्य अभियंता की कारगुजारियों पर हमने पहले भी रोशनी डाली थी और जिसकी हरकतों के चलते उसका नामकरण रंगीला राजा किया था, उसकी बेशर्मी अब तमाम सरहदों को लांघ चुकी है। अंदरखाने की खबर यह है कि कोरोना काल में पत्नी के देहांत के बाद अकेले बंगले में दिन काट रहे इस साहब की ‘विधुर अभिलाषाएं’ अब मातहतों की दहलीज लांघने पर आमादा हैं। हद तो तब हो गई जब रंगीला राजा ने अपने ही महकमे के एक स्टोर क्लर्क की पत्नी की ड्यूटी जबरन अपने निजी बंगले पर लगवा दी। बंगले में किसी अन्य महिला की मौजूदगी न देख जब सहमी महिला ने अपने पति को मौके पर बुला लिया, तो साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हनक ऐसी कि गिरेबान झांकने के बजाय मुलाजिम को नौकरी से बेदखल करने और घर में चोरी के झूठे मुकदमे में जेल भिजवाने का फरमान सुना दिया गया। यह वही हुक्मरान हैं जो पहले भी अपने ही मातहत कर्मचारियों को सरेआम एससी-एसटी एक्ट में फंसाकर जिंदगी बर्बाद करने की धमकियां बांट चुके हैं और लोकायुक्त से लेकर उज्जैन तक इनके पुराने कारनामों की फाइलें धूल फांक रही हैं। लेकिन दाद देनी होगी उस छोटे कर्मचारी के हौसले की, जो साहब की गीदड़भभकियों और धौंस के आगे झुका नहीं, बल्कि सीधे आला अफसरों की टेबल पर लिखित शिकायत पटक दी। हालांकि, न्याय की उम्मीद भी किससे की जाए? ऊपर बैठे हुक्मरान खुद प्रशासनिक हलकों में धुंधकारी के रूप में कुख्यात हैं।

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