The Insiders: 3 पत्नियों वाले ओएसडी विवादों में घिरे, नए एसपी पर शहादत का फिर लगा कलंक; किसके दबाव में हैं ‘बड़े साहब’? सरकार ने कहा-एडीजी से भार कम करो
द इनसाइडर्स में इस बार पढ़ें कैसानोवा अवतार वाले नौकरशाहों और मंत्रियों की कहानियां
कुलदीप सिंगोरिया@9926510865
भोपाल | आप सभी सुधि पाठकों को ‘द इनसाइडर्स’ परिवार की ओर से दीपावली की राम-राम! मां लक्ष्मी से प्रार्थना है कि आपके घर ‘सुख-संपत्ति ध्यावे’… लेकिन मां थोड़ा संयम और सद्बुद्धि भी दे। दरअसल, यह अक्सर देखा जाता है कि जब सत्ता के साथ अथाह धन आता है, तो मनुष्य के विवेक को हर लेता है—ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने रश्मिरथी में लिखा था: “जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।” विवेक मरते ही इंसान अनैतिकता और चरित्रहीनता की ढलान पर फिसलने लगता है।
इसी कड़ी में, हमने कुछ वक्त पहले एक आईएएस अधिकारी का जिक्र करते हुए यूरोप में मशहूर शब्द ‘कैसानोवा’ (Casanova) का इस्तेमाल किया था। ठीक इसी मिजाज और चरित्र के लिए स्पैनिश साहित्य में एक और मशहूर शब्द और लोककथा है—‘डॉन जुआन’ (Don Juan)। 17वीं सदी की स्पैनिश लोककथा के अनुसार, डॉन जुआन एक बेहद अमीर और प्रभावशाली नवयुवक था। धन और सत्ता के अहंकार में चूर वह खुद को नैतिक बंधनों से ऊपर समझता था। अपनी संपत्ति, आकर्षण और वाक्पटुता के बल पर स्त्रियों को छलना और अपने अहंकार की तृप्ति करना ही उसका काम था। उसने एक कुलीन युवती का छल से शीलभंग किया और जब उसके पिता बेटी के सम्मान के लिए सामने आए, तो डॉन जुआन ने उनकी हत्या कर दी। सत्ता के संरक्षण और धन के घमंड में उसे कोई पछतावा नहीं हुआ, पर अंततः इसी नैतिक पतन और असीमित वासना ने उसका विनाश कर दिया।
दुनिया की हर महान संस्कृति इसी सीख को दोहराती है। त्रेतायुग में भी रावण के पास सोने की लंका का अटूट धन और असीम सत्ता का अहंकार था, लेकिन चरित्र के पतन ने उसका अंत तय किया। प्रभु श्री राम ने उसी असत्य और अहंकार का वध किया, जिसके बाद अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाकर विजय और सद्बुद्धि का उत्सव मनाया—जिसे आज हम दीपावली के रूप में मनाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि हमारे अपने सियासत के गलियारों में भी ऐसे ‘डॉन जुआन’ और ‘कैसानोवा’ चरित्रों की कोई कमी नहीं है। कुछ ऐसे ही नाम इन दिनों मध्य प्रदेश की पॉलिटिक्स से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। आइए, पर्दा उठाते हैं इस हफ्ते के ‘द इनसाइडर्स’ में…
पिछला अंक पढ़ें – The Insiders: बड़े साहब जेन-जी के आगे नतमस्तक, सीनियर आईपीएस ने बड़े कप्तान को बनाया मोहरा; धाकड़ एसपी की आमद से दहशत, साउथ लॉबी को सीएम का कड़ा संदेश
तीन पत्नियों वाले ओएसडी साहब
चलिए, आज फिर एक ‘कैसानोवा’ की बात करते हैं। यह जनाब कमाई के लिए पहचाने जाने वाले विभाग के मंत्री जी के ओएसडी रहे हैं। इन पर एक-दो नहीं, बल्कि तीन-तीन शादियां करने का आरोप है। फिल्मी तर्ज पर तीनों ही पत्नियां अलग-अलग शहरों में रह रही हैं। मतलब निज सचिव साहब का ब्रेकफास्ट भोपाल वाली पत्नी के साथ होता है, तो ग्वालियर वाली के साथ लंच और फिर एक तीसरे शहर में तीसरी पत्नी के साथ डिनर… फिर यहीं से रात रंगीन होती है। चूंकि इनके मंत्री के पास यात्रा से जुड़ा कार्य है, तो साहब को आवाजाही की कोई दिक्कत भी नहीं होती और बल्कि कलेक्शन की आड़ में तीनों घर भी बड़े मजे से चल जाते हैं। शिकायतों के बाद इन्हें 2 महीने पहले रिलीव कर दिया गया है, फिर भी यह जनाब मंत्री जी के बंगले पर खुलेआम देखे जा सकते हैं। हालांकि, इन ओएसडी साहब के साथ एक मनहूसियत भी साथ चलकर आती है। उनके नाम यह अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है कि वह जिस भी मंत्री के यहां रहे, वह अगला चुनाव हार जाता है! अब देखना यह है कि इस बार यह रिकॉर्ड टूटता है या इतिहास खुद को दोहराता है।
त्रिया चरित्र में फंसे मंत्रीजी
अब जब ‘कैसानोवा’ की बात चल ही रही है, तो फिर एक और मंत्री महोदय की चर्चा भी कर लेते हैं। इन मंत्री जी की एक ‘कथित दूसरी पत्नी’ हैं, जो हाल ही में अपनी एक जिद को लेकर अड़ गईं। मंत्री जी वैसे तो त्रिया चरित्र की बारीकियों को भली-भांति समझते थे, लेकिन इस बार बीच में उनकी पहली पत्नी आड़े आ गईं। नतीजा यह हुआ कि दोनों पक्षों में बात बिगड़ गई और ठन गई। बात इतनी बढ़ी कि दूसरी पत्नी—जिन्हें फिलहाल कोई कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं है—गुस्से में सीधे सोशल मीडिया पर उतर आईं और मंत्री जी के कच्चे-चिट्ठे खोलने शुरू कर दिए। सियासी गलियारों में हड़कंप मचा तो आनन-फानन में ‘डैमेज कंट्रोल’ की पटकथा लिखी गई। सफाई दी गई कि मैडम की उस वक्त दिमागी हालत ठीक नहीं थी। लेकिन, जैसा कि अक्सर होता है—एक फोन ऑडियो लीक हुआ और सच सबके सामने आ गया। मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब एक बार फिर से सोशल मीडिया पर उनके संबंधों की चर्चा वाला वीडियो री-अपलोड कर दिया गया है। यानी मंत्री जी का यह ‘कैसानोवा अवतार’ अब उनके लिए गले की फांस बनता नजर आ रहा है।
खाईवाली का अनोखा रिकॉर्ड
कैसानोवा वाली इस लिस्ट में अब एक और दिलचस्प किरदार पर चलते हैं। एक मंत्री महोदया के यहां पदस्थ रहे एक निजी सचिव साहब हाल ही में रिटायर हो चुके हैं। मंत्री जी के हिस्से का माल तक खा जाने के लिए कुख्यात रहे इन साहब की वापसी की उम्मीद दूर-दूर तक किसी को नहीं थी। पर न जाने मंत्री महोदया को उनमें ऐसी कौन सी ‘विशेष खूबी’ दिख गई कि रिटायरमेंट के बाद भी बैक डोर (चोर दरवाजे) से उन्हें उगाही का एक बार फिर मौका दे दिया गया। साहब तो खैर फितरती ‘कैसानोवा’ हैं ही, सो उनकी वापसी होते ही उनकी अघोषित पत्नी एक बार फिर उनके फार्म हाउस पर नजर आने लगी है। दिलचस्प बात यह है कि यह मैडम भी खुद एक दूसरे मंत्री जी के स्टाफ में तैनात हैं। हालांकि, इन साहब के बारे में भी एक बेहद अनोखा रिकॉर्ड मशहूर है। यह जिस भी मंत्री के यहां पदस्थ होते हैं, सीधे उनके ही पैसे से ‘खाईवाली’ (सट्टेबाजी/हेराफेरी) का खेल शुरू कर देते हैं। यानी मंत्री जी को बिना भनक लगे उनके करोड़ों रुपये इधर से उधर (आर-पार) कर दिए जाते हैं। और तो और, अगर चुनाव में मंत्री जी हार जाएं, तो चुनाव के नाम पर उगाहा गया सारा पैसा भी साहब अकेले ही डकार जाते हैं!
जनता नहीं रिटायर्ड अफसरों के दबाव में बड़े साहब?
अब चलते हैं सरकार के सबसे बड़े बाबू यानी ‘बड़े साहब’ की ओर। बड़े साहब पर इन दिनों रिटायर्ड आईएएस अफसरों का जबरदस्त दबाव देखने को मिल रहा है। आलम यह है कि जैसे ही कोई नया मुद्दा सामने आता है, आईएएस अफसरों के व्हाट्सएप ग्रुप पर रिटायर्ड अफसर एक्टिव हो जाते हैं और वे अपनी सुरक्षा, सुविधाओं आदि को लेकर तुरंत दबाव बनाने लगते हैं। कुछ वक्त पहले जब एक पूर्व अफसर की बहु का प्रकरण सामने आया, तो व्हाट्सएप पर मैसेज की बाढ़ आ गई। इसके बाद जब एक रिटायर्ड आईएएस की हत्या हुई, तब भी ऐसी ही हाय-तौबा मची और स्थिति यह बनी कि बड़े साहब को खुद आगे आकर खूब स्पष्टीकरण देना पड़ा।
अभी हाल ही का मामला देखिए—एक पूर्व नौकरशाह शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। आरोप है कि इलाज में अस्पताल ने घोर लापरवाही बरती, जिसकी वजह से उनकी स्थिति गंभीर हो गई। इस पर पूर्व नौकरशाहों का गुस्सा फिर भड़क उठा। कई अफसरों ने व्हाट्सएप पर पूर्व आईएएस अधिकारियों के लिए अलग से विशेष व्यवस्थाएं किए जाने की मांग उठा दी। आखिरकार बड़े साहब को एक बार फिर सक्रिय होना पड़ा और व्हाट्सएप ग्रुप पर अपनी सफाई पेश करनी पड़ी। खैर, अच्छी बात है साहब कि आप लोग अपने बिरादरी वालों के लिए इतनी मुस्तैदी से आवाज उठा रहे हैं! लेकिन काश, कभी थोड़ी चिंता इस आम जनता की भी कर लें। कभी आम जनमानस की समस्याओं के लिए भी अपने इस पावरफुल व्हाट्सएप ग्रुप में आवाज उठा लिया करें, और ‘बड़े साहब’ भी उस पर जनता को वैसा ही स्पष्टीकरण दे दिया करें!
भेड़चाल में बधाई देते रहे पूर्व ‘बड़े’ ब्यूरोक्रेट्स
रिटायर्ड अफसर—जिनमें पूर्व मुख्य सचिव, दिल्ली में सचिव रहे अफसर और कई पूर्व ACS शामिल हैं—कितने ‘प्रखर बुद्धि’ वाले हैं या उनकी प्रशासनिक समझ का क्या स्तर है, इसकी एक बानगी आपको आईएएस वाले व्हाट्सएप ग्रुप में आसानी से देखने को मिल जाएगी। हाल ही में पूर्व दिल्ली में कुछ अफसरों के पदों के अस्थायी उन्नयन (अपग्रेडेशन) को विस्तार दिया गया था। यह एक बेहद सामान्य और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया थी, जिसमें मध्य प्रदेश कैडर के भी एक आईएएस अफसर का नाम शामिल था। जैसे ही यह ऑर्डर आया, ग्रुप के एक महानुभाव ने ऑर्डर की कॉपी पोस्ट करते हुए बधाई दे दी। बस फिर क्या था! इसके बाद तो ‘भेड़चाल’ शुरू हो गई और बधाइयों का ऐसा तांता लगा जिसमें कई अति-वरिष्ठ पूर्व नौकरशाह भी बढ़-चढ़कर शामिल हो गए। इसे देख संबंधित आईएएस अफसर को खुद आगे आए और वस्तुस्थिति से अवगत कराया। उन्होंने लिखा कि कोई बड़ा पद या नई पोस्टिंग नहीं मिली है, यह महज एक सामान्य प्रक्रिया भर है। लेकिन रिटायर्ड साहबान कहां मानने वाले थे! इस सफाई के बाद भी अफसरों की ओर से लगातार ‘मुबारकबाद’ के मैसेज आते ही रहे… और बेचारे आईएएस अफसर ग्रुप का यह आलम देखकर सिर्फ अपने सिर पर हाथ रखकर बैठ गए!
नए एसपी साहब पर शहादत का साया
हाल ही में जहरीली शराब से हुई दुखद मौतों के बड़े मामले के बाद प्रशासनिक गाज गिरी, और दो जिलों के कलेक्टर व एसपी नाप दिए गए। लेकिन, इस फेरबदल के बाद जो नए एसपी साहब तैनात किए गए हैं, उनके साथ एक बेहद अजीब और दुखद ‘कलंक’ (या यूं कहें कि दुर्योग) जुड़ गया है। साहब की पिछली पोस्टिंग याद कीजिए—वहां पदस्थ रहते हुए भी एक टीआई (थाना प्रभारी) शहीद हो गए थे। और अब जैसे ही वे नए जिले की कमान संभालने पहुंचे, तो यहां आते ही एक और टीआई शहीद हो गए! महकमे में अब दबी ज़बान से इस ‘संयोग’ की चर्चा ज़ोरों पर है। वैसे, इन एसपी साहब का पिछला रिकॉर्ड खंगालें तो पता चलता है कि पिछली पोस्टिंग में साहब ज़मीनी काम-काज से ज्यादा सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के लिए जाने जाते थे। पूरे वक्त खुद के प्रचार-प्रसार और रील्स-फोटोशूट में जुटे रहना ही उनका मुख्य ‘कर्तव्य’ बना हुआ था।
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एडीजी के पास चार-चार प्रभार, सीएम ने कहा—कम करो भार!
कानून-व्यवस्था के मामले में सरकार अब किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में बिल्कुल नहीं दिख रही है। यही वजह है कि बैठकों में सरकार की सख्ती लगातार बढ़ती नजर आ रही है।
हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सरकार ने पुलिस महकमे के कामकाज का बड़े बारीक नजरिए से हिसाब-किताब लिया। इस समीक्षा में जब यह बात सामने आई कि एक ही एडीजी (ADG) साहब के कंधों पर चार-चार अहम प्रभारों का बोझ लादा गया है, तो शीर्ष स्तर से तुरंत और दोटुक हिदायत आ गई—’इनका भार तुरंत कम करो!’ सरकार की मंशा साफ है कि जिम्मेदारियां किसी एक अफसर की जेब में बंद रहने के बजाय सभी योग्य अफसरों के बीच बराबरी से बंटनी चाहिए। अंदरखाने की खबर है कि जल्द ही आने वाली नई तबादला और मैदानी पदस्थापना सूची में आपको यह ‘भार-मुक्ति’ का बदलाव साफ-साफ नजर आ जाएगा।
बड़े साहब के पीए साहब का फेस्ट और चंदे का डोसा कनेक्शन
अब बात करते हैं बड़े साहब के एक पीए (PA) साहब की, जो इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में खूब चर्चा बटोर रहे हैं। ये पीए साहब इन दिनों अपने गृह राज्य की संस्कृति और खान-पान से जुड़ा एक विशेष ‘फेस्ट’ (उत्सव) आयोजित करने में व्यस्त हैं। वैसे तो यह आयोजन हर साल होता है, लेकिन इस बार पीए साहब ने इसमें एक नया रंग भर दिया है। उन्होंने अपनी खास इटली-डोसा पार्टी’ वाले आईएएस अफसरों के समूह को बाकायदा इस फेस्ट में स्टॉल लगाने का फरमान सुना दिया है। सिर्फ स्टॉल लगाने की हिदायत ही नहीं, बल्कि आयोजन में ‘सहयोग’ के नाम पर अफसरों और संबंधित पक्षों से अच्छी-खासी मोटी रकम भी वसूली जा रही है।
सचिव ने मंत्री के पर कतरने के लिए लगाई स्मार्ट तरकीब
सत्ता यानी पावर का नशा ही कुछ ऐसा होता है कि अधिकारों की जंग में अक्सर रार ठनती रहती है और इसके लिए पर्दे के पीछे साजिशों का दौर चलता रहता है। और कोशिश यही होती है कि सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे। अब एक सचिव साहब की ‘स्मार्ट बुद्धि’ का कमाल देखिए! उन्होंने अपने ही मंत्री जी के पर कतरने के लिए सरकार को एक नया कॉर्पोरेशन गठित करने का नायाब विचार दे डाला है। अगर यह कॉर्पोरेशन बन जाता है, तो मंत्री जी के बहुत सारे अधिकार और पावर सीधे छिन जाएंगे। लिहाजा, सरकार को सचिव साहब का यह पावर-गेम वाला आइडिया बेहद पसंद आ गया है। प्रशासनिक गलियारों की खबर है कि जल्द ही आपको मध्य प्रदेश में एक और नया डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन आकार लेता हुआ दिखाई देगा।
पीए के कमरे‘ में बैठेंगे सीनियर आईएएस!
एक सीनियर आईएएस अफसर को लगता है अब जिल्लत सहने की आदत सी हो गई है। साहब की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है—जब वे एक जिले में कलेक्टर पदस्थ थे, तब वहां किसान आंदोलन के बाद हटा दिया गया था। इसके बाद लंबे समय तक वे गुमनामी के अंधेरे में रहे। इस बीच कभी-कभार छोटी-मोटी ‘मलाईदार’ पोस्ट मिल भी जाती, तो जल्द ही वहां से भी रुखसत कर दिए जाते। साहब ने किस्मत चमकाने के लिए नए दलाल भी बनाए, पर उससे भी कुछ खास फायदा हुआ नहीं। अब की कहानी सुनिए… साहब को हाल ही में एक ऐसे विभाग में ‘सचिव’ बनाया गया है, जहां सरकार खुद ही मंत्री का सारा काम संभालती है और विभाग के बड़े अधिकारी सरकार व विभाग दोनों को मिलकर चलाते हैं। यही वजह है कि उस विभाग का मुख्य विभागीय चैंबर खाली ही रहता है, और अन्य दूसरे चैंबर भी खाली पड़े हैं। लेकिन, प्रशासनिक गलियारों की अंदरूनी ‘षड्यंत्रकारी चालों’ की वजह से साहब को मुख्य विभागीय चैंबर देने के बजाय बड़े अफसर के ‘पीए (PA) वाला कमरा’ आवंटित कर दिया गया! हैरत की बात यह है कि साहब ने इस जिल्लत भरे प्रस्ताव को भी चुपचाप स्वीकार कर लिया—शायद इस उम्मीद और आशा में कि अगर उस वरिष्ठ अफसर का दिल कभी पसीज गया, तो वे सरकार से सिफारिश करके साहब को किसी बड़े विभाग का इंडिपेंडेंट (स्वतंत्र) चार्ज दिलवा देंगे!
(द इनसाइडर्स कॉलम के इस विशेष दीपावली अंक में बस इतना ही। सत्ता, राजनीति और ब्यूरोक्रेसी के अंदरखाने की ऐसी ही चटपटी और तीखी खबरों के लिए जुड़े रहिए ‘द इनसाइडर्स’ के साथ)



