Trending

The Insiders: एसीएस की डिजिटल कुंडली में सैकड़ों करोड़ का पोर्टफोलियो, राजधानी में महफिल रंगीन करने आ जाते हैं सीनियर आईपीएस, बड़े साहब को फिर लगेगा झटका

द इनसाइडर्स में इस बार पढ़ें ज्ञानेश कुमार की प्रतिबद्ध ब्यूरोक्रेसी से उपजे सवाल

कुलदीप सिंगोरिया@9926510865
भोपाल |
सीसेट (CSAT) लागू होने के बाद चयनित हुए एक आईएएस अफसर से कुछ दिन पूर्व टेलीफोनिक चर्चा हुई। बातचीत के दौरान उन्होंने सीधे मुझ पर आरोप जड़ा—“आप सीसेट के बड़े आलोचक रहे हैं और इस व्यवस्था से आए अफसरों की काबिलियत पर सवाल उठाते रहे हैं। पर अब ज्ञानेश कुमार जी के बारे में क्या कहेंगे?”

मैं पल भर को अचकचाया! फिर संयत होकर कहा—“काबिलियत से इतर मेरी असली चिंता ‘आईएएस’ नामक इस प्रतिष्ठित संस्था के अवमूल्यन को लेकर है, और सीसेट के बाद यह प्रवृत्ति ज़्यादा मुखर दिखती है। इसका मतलब यह कतई नहीं कि मैं इससे पहले के चयनित अफसरों को पूरी तरह क्लीनचिट दे रहा हूं।”

खैर, महोदय मेरी बात से संतुष्ट नजर नहीं आए। इसी बीच पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का एक लेख पढ़ने को मिला। उनकी बातें आईएएस के उसी ‘स्टील फ्रेम’ वाली छवि और उसकी मज़बूती की ओर इशारा कर रही थीं। उन्होंने जो चिंताएं जताईं, वे साफ बताती हैं कि आज की नौकरशाही में प्रतिबद्धता ज़मीर के प्रति कम, और ज़र, जोरू व ज़मीन के प्रति ज़्यादा दिखती है। बहरहाल, यह बहस लंबी है। हम तो बस इतना ही कहेंगे—ज़मीर की राह पर चलना भले ही आसान न हो, लेकिन लोक सेवा की असली परिभाषा वही है जो जनहित के लिए सही के साथ अडिग खड़ी रहे… चाहे उसकी क़ीमत कुछ भी चुकानी पड़े! और अब शुरू करते हैं इस हफ्ते के चुटीले किस्सों वाला द इनसाइडर्स…

पिछला अंक पढ़ें – The Insiders: देश के नंबर एक उद्योगपति से रिश्वत की डिमांड, एमडी से पीड़ित अफसर करवा रहे ट्रांसफर, कर्नाटक के आईएएस की जोड़ी ने रची पोषण आहार घोटाले की पटकथा

दोस्तों की महफिलों को गुलजार रखते हैं सीनियर आईपीएस

सागर के चर्चित शराब कांड के बाद हर किसी को लगा था कि नए आईपीएस साहब का दिल यहां लगेगा। लेकिन सब जानते हैं कि साहब ग्वालियर-चंबल जाने की बजाय यहां अटक गए। अब अटक गए तो भटक भी गए। साहब हर सप्ताहांत भटकते हुए राजधानी के गलियारों में प्रकट हो जाते हैं। यहां कभी अस्पताल के उद्घाटन में मिलते हैं तो कभी अपने दोस्तों की महफिल में है। साहब महफिल में आपकी मौजूदगी रंग भर देती है पर कभी अपने पोस्टिंग वाले क्षेत्र में भी इरशाद कर दिया करें। अब अस्पताल के बारे में भी चर्चा गरम है कि यह जिस जमीन पर बना है, वह एक पूर्व एसीएस की है जो कि आजकल लाइजनिंग में छाए हुए हैं।

यह अंक पढ़ें : The Insiders: सागर शराब कांड में यादव जी का डिस्लरी कनेक्शन, सिर्फ एक दिन से डीजीपी की दौड़ में शामिल हैं आईपीएस, दक्षिण से बिहार शिफ्ट हो रहा पावर सेंटर, 250 करोड़ का जादूगर आईएएस

साहब का सीक्रेट खजाना!‘

शासन के गलियारों में अपनी तुनक मिजाजी और ऊटपटांग फैसलों की वजह से एक सीनियर एसीएस ने अलग छाप छोड़ी है। हालांकि वे ईमानदारी की मिसाल भी बने रहे हैं। पर एक दिन उनकी पूरी सच्चाई हाल ही में सामने आ गई। साहब गलती से दफ़्तर में अपना लैपटॉप खुला छोड़कर क्या गए, कर्मचारियों ने ‘उत्सुकतावश’ उनके डिजिटल बही-खाते की खाक छान डाली। जब साहब के पर्सनल पोर्टफोलियो पर नज़र पड़ी, तो कर्मचारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं—साहब का शेयर बाजार में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का ‘साम्राज्य’ खड़ा था!  वैसे कहते हैं—‘पैसा बोलता है!’ लेकिन साहब के करीबी दबी ज़बान से सफाई दे रहे हैं कि यह कोई रातों-रात हुआ करिश्मा नहीं है, बल्कि नौकरी के पहले दिन से किया गया अनुशासनबद्ध निवेश और पुश्तैनी जायदाद का कमाल है। खैर, वजह चाहे जो हो, पर अब तक सादगी की मिसाल देने वाले साहब का यह छुपा हुआ रूप देखकर अधीनस्थों के होश उड़े हुए हैं!

यह अंक पढ़ें :The Insiders: IPS की खुशामदीद आई काम, मिली धांसू पोस्टिंग, आईएएस की पत्नी का सीएसआर का फंडा, पीपुल्स ऑफिसर के अवतार में आईएएस, रील्स की बाढ़ में बहे नेताजी, पूर्व आईएएस के भाई ने रची मैडम को हटाने की साजिश

हम आह भी करते हैं तो…!

राजधानी में इन दिनों ‘चयनात्मक अंतरात्मा’ (Selective Conscience) का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। हाल ही में इंदौर में विपक्षी दल ने पुलिस या प्रशासन पर सवाल खड़े किए, तो आईपीएस एसोसिएशन की तंद्रा फौरन भंग हो गई और आनन-फानन में कड़ा निंदा प्रस्ताव पास हो गया। लेकिन जैसे ही सत्ताधारी दल का कोई माननीय या रसूखदार नेता पुलिस अमले को भरे मंच से ललकारता या गरियाता है, एसोसिएशन तुरंत कुंभकर्णी नींद में सो जाता है। ठीक यही ‘सुविधानुसार गुस्सा’ आईएएस एसोसिएशन का भी है। कहते हैं—‘देखा-देखी कीजै जोग, छीजे काया बढ़े रोग!’ अफसरों के इस दोहरे रवैये को देखकर अब गलियारों में दबी ज़बान से यही पूछा जा रहा है—साहब, आपकी निंदा का पैमाना सिद्धांत तय करते हैं या सत्ताधारी पार्टी का ‘पावर’?

 यह किस्सा पढ़ें : The Insiders: सीनियर आईपीएस पर सरकार की कृपा बरसी, दो आईएएस में हुई जोरदार भिडंत, आईएफएस की नजर में आप हैं दिमागी नक्सल

दोस्तों का विकास कर रहे हैं जूनियर आईएएस

राजधानी के विकास की कमान जब से माननीय सीनियर मंत्री जी के ‘आरआर वाले’ आईएएस दामाद साहब ने संभाली है, तब से शहर की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। साहब की मेहरबानी का आलम यह है कि शहर की जो योजनाएं पहले से चालू थीं, वे भी ठप्प पड़ चुकी हैं।

पर जनाब, विकास रुका कहाँ है? विकास तो हो रहा है, बस उसका रूट बदल गया है! शहर के मास्टर प्लान से ध्यान हटाकर साहब इन दिनों अपने दिल्ली वाले खास दोस्तों का पर्सनल डेवलपमेंट कराने में व्यस्त हैं। राजधानी के बायपास पर दोस्तों के नाम ज़मीनों और प्रॉपर्टीज के सौदे धड़ाधड़ फाइनल कराए जा रहे हैं। कहते हैं—‘अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को देय!’ पहली बार किसी आरआर अफसर को इस प्राधिकरण की जिम्मेदारी इसलिए नहीं मिली थी कि वे शहर को छोड़कर अपनों के वारे-न्यारे करें!

यह अंक भी पढ़ें – The Insiders: आरआरआर के शौकीन ‘जेन जी’ आईएएस, स्त्री 3 का ट्रेलर जारी, रसूख से रास्ता रोकते पूर्व आईएएस और दवा खरीदी के टेंडर की काली कमाई खपाते बेखौफ साहब 

बड़े साहब नहीं रोक पाएंगे एक्सटेंशन

सत्ता के गलियारों में चर्चा गरम है कि एक बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी साहब के एक्सटेंशन की पटकथा एक बार फिर तैयार है। बड़े साहब नियम-कायदे की भले ही लाल झंडी दिखाते रहे, लेकिन जब बैकग्राउंड में ‘नागपुर’ की धुन बज रही हो, तो बड़े-बड़े अफसरों की आपत्तियों का हवा होना तय है। बता दें कि पिछली बार भी विरोध की हर लहर संघ के इशारे पर शांत हो गई थी। इस विरोध में मौजूदा बड़े साहब एसीएस की भूमिका में थे। इस बार फिर बड़े साहब हाथ मलते रह जाएंगे और मेंबर सेक्रेट्री साहब पद पर अच्युत ही रहेंगे।

यह अंक पढ़ें : The Insiders: एक्टीविस्ट बन गए सीनियर आईपीएस, साले ने आईएएस जीजा के साथ जुगलबंदी से हासिल किए ठेके, छोटे से कारिंदे ने आईपीएस का रिटर्न टिकट कटवाया

पौवा बड़ा या जनप्रतिनिधि?’

एक विभाग में नए-नवेले ईएनसी साहब को लगा था कि जब गॉडफादर तगड़ा हो, तो प्रोटोकॉल को ताक पर रखना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। पर साहब भूल गए कि लोकतंत्र में जैक या पौवा कितना भी बड़ा हो, जनप्रतिनिधि का पावर उससे बड़ा होता है। मामला तब गरमाया जब एक विधायक जी अपने क्षेत्र के विकास के काम के लिए अपाइनमेंट लेकर साहब के दफ़्तर पहुंचे। साहब अपने वादे को भूलकर वल्लभ भवन की चापलूसी में ऐसे रमे कि विधायक जी को एक घंटे तक इंतज़ार कराने के बाद फ़ोन पर टका सा जवाब दे दिया— “कल आ जाना!” फिर क्या था! ‘सैंया भए कोतवाल…’ के सुर में डूबे साहब की अकड़ तब ढीली हुई, जब विधायक जी ने दफ़्तर के बाहर ही ज़िंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे गुंजवा दिए। दफ़्तर में गूंजती नारों की गूँज सुनते ही साहब के पसीने छूट गए और वे भागे-भागे बाहर आए। काफी मान-मनौव्वल के बाद मामला शांत तो हुआ, पर साहब को समझ आ गया कि लाल बत्ती का रोब हर जगह काम नहीं आता!

यह अंक पढ़ें : The Insiders: पूर्व साहब के लेटर बम पर सीएस को देनी पड़ी सफाई, एक हम्माल ने अटकाई आईएएस की डीपीसी, आखिरकार आईपीएस की चार्जशीट जारी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button