ट्विशा शर्मा का फिर होगा पोस्टमॉर्टम, पति समर्थ सिंह करेगा सरेंडर

भोपाल /जबलपुर

जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा का दोबारा पोस्टमॉर्टम करने की मंजूरी दे दी है. ट्विशा के परिजनों ने शव का दोबारा पीएम कराने के लिए अर्जी दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस को यह आदेश दिया है। 

शादी के पांच महीने बाद हुई ट्विशा की मौत
गौरतलब है कि मॉडल ट्विशा शर्मा की मुलाकात अपने पति समर्थ सिंह से एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी. समर्थ पेशे से क्रिमिनल लॉयर है. दिसंबर 2025 में दोनों की धूमधाम से शादी हुई थी, लेकिन शादी के महज 5 महीने बाद ही 12 मई 2026 को ट्विशा की संदिग्ध मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि ट्विशा की सास और पति ने मिलकर उसकी हत्या की है. वह दोबारा शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग कर रहे हैं. इस वजह से वह एम्स से शव भी नहीं ले रहे हैं। 

 आरोपी समर्थ सिंह के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने का फैसला लिया. इस दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है. इसके साथ ही कोर्ट का पूरा ध्यान अब दूसरे पोस्टमार्टम की याचिका पर केंद्रित हो गया है, क्योंकि न्यायाधीश ने समय की गंभीरता को देखते हुए कहा कि दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर सबसे पहले सुनवाई की जानी चाहिए। 

कोर्ट में दूसरे पोस्टमार्टम की मांग को लेकर तीखी बहस देखने को मिली. याचिकाकर्ता की तरफ से जहां दूसरे पोस्टमार्टम की जरूरत पर जोर दिया गया, तो  वहीं दूसरी तरफ दूसरे पक्ष के वकील ने इसका कड़ा विरोध किया। 

उन्होंने तर्क दिया कि AIIMS द्वारा किया गया पहला पोस्टमार्टम पर्याप्त है और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग करना चिकित्सा बिरादरी का अपमान है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह मांग जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और डॉक्टरों की क्षमता पर अविश्वास जताने जैसा है. हालांकि, बहस के बाद कोर्ट ने सेकंड पोस्टमार्टम पर सहमति जता दी है। 

कोर्ट में क्या दलील दी गई?
ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की तरफ से पेश होते हुए उनके वकील ने दूसरी बार पोस्टमॉर्टम कराने की मांग का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि AIIMS के डॉक्टरों द्वारा पोस्टमॉर्टम पहले ही किया जा चुका है और इसलिए एक और जांच की क्या ज़रूरत है, इस पर सवाल उठाया। 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उन डॉक्टरों की ईमानदारी का बचाव किया जिन्होंने पोस्टमॉर्टम किया था, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि किसी बात को नज़रअंदाज़ किया गया है, तो दूसरी राय ली जा सकती है. उन्होंने कहा, "डॉक्टरों की निष्पक्षता बेमिसाल है, लेकिन अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि कुछ छूट गया है, तो दूसरी राय ली जा सकती है। 

अंतिम संस्कार में किसी भी तरह की देरी का विरोध करते हुए, गिरिबाला सिंह के वकील ने यह भी दलील दी कि शव को सड़ने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए. वकील ने कहा, "वह हमारे परिवार की बहू थी. उसका अंतिम संस्कार करना हमारा फ़र्ज़ है। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button