राजस्थान BJP में राजनीतिक नियुक्तियों की हलचल तेज, 100 से ज्यादा बोर्ड-आयोगों में पद खाली

जयपुर
लंबे समय से राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए अब उम्मीद बढ़ गई है। बोर्ड, आयोग, निगम, प्राधिकरण और अकादमियों में नियुक्तियों को लेकर दिल्ली स्तर पर हलचल शुरू हो गई है। संभावित दावेदारों के पास फोन पहुंचने और उनसे बायोडेटा व राजनीतिक-संगठनात्मक पृष्ठभूमि की जानकारी, दायित्व पूछने और सहमति मांगे जाने को नियुक्तियों की कवायद के आगे बढ़ने का बड़ा संकेत माना जा रहा है। पंचायत चुनाव के बाद नियुक्तियां होने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार संभावित नामों का पैनल पहले ही तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जा चुका है। अब सूची में शामिल नामों को लेकर दिल्ली से नब्ज टटोलने की कवायद चल रही है। राजस्थान सरकार अब तक करीब 11 महत्वपूर्ण नियुक्तियां कर चुकी है, लेकिन अभी भी 100 से अधिक बोर्ड, आयोग, निगम, प्राधिकरण और यूआईटी में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य के पद रिक्त है।

सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन के साथ साधे जाएंगे सियासी समीकरण
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नियुक्तियों में क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। संगठन की राय को भी महत्व दिया गया है। इनमें लंबे समय से पार्टी और संगठन में सक्रिय नेताओं के साथ अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा चुके कार्यकर्ताओं को मौका मिलने की चर्चा है। वहीं पिछले कुछ समय में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेताओं के नाम भी संभावित सूची में हो सकते हैं। विधानसभा चुनाव हारने वाले कुछ नेता भी कतार में है।

इन बोर्ड और आयोगों में रिक्त हैं पद
राज्य महिला आयोग, पर्यटन विकास निगम, स्टेट कृषि विपणन बोर्ड, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, बुनकर संघ, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, पशुधन विकास बोर्ड, राज्य खेल परिषद, कर बोर्ड, युवा बोर्ड, आवासन मंडल, जन अभाव अभियोग निराकरण समिति, बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति, अल्पसंख्यक आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, समाज कल्याण बोर्ड, वक्फ बोर्ड, बीज निगम, हज कमेटी, डांग विकास बोर्ड, मुस्लिम वक्फ बोर्ड, मगरा विकास बोर्ड सहित कई अकादमियों और यूआइटी में नियुक्तियां होनी हैं

कांग्रेस शासन में 70 से ज्यादा नेताओं को पद, 35 को मंत्री दर्जा
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भी अपने कार्यकाल में 70 से अधिक नेताओं को विभिन्न बोर्ड, आयोग, निगम, अकादमियों और अन्य संस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियां दी थीं। इनमें 35 से अधिक नेताओं को कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री का दर्जा मिला था। राजनीतिक नियुक्तियों का यह सिलसिला पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर तक भी चर्चा में रहा था।

 

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