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द इनसाइडर्स: झूठ पर फंसी ‘स्टील फ्रेम’, आईएएस एसोसिएशन ने भी खींचे हाथ, मंत्री ने दिखाया सिंह रूपी अवतार

जबलपुर में सीनियर मंत्री और जूनियर आईएएस की भिड़त की पूरी इनसाइड स्टोरी

कुलदीप सिंगोरिया

भोपाल | पिछले अंक में हमने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के उस ‘स्टील फ्रेम’ वाले जुमले का जिक्र क्या किया, एक नए-नवेले आईएएस साहब की रीढ़ की हड्डी कुछ ज्यादा ही तन गई। महोदय का जमीर कुछ ऐसे जागा कि उन्होंने सिंह से भी अधिक शक्तिशाली मंत्री की शिकायत अपने ‘बड़े साहब’ से कर दी। कहानी सार्वजनिक हो चुकी है, इसलिए हम सीधे इसकी ‘इनसाइड स्टोरी’ पर आते हैं।

हमने अपनी ‘योग: कर्मसु कौशलम्’ सीरीज में पहले ही यह अंदेशा जताया था कि जब से यूपीएससी ने 2012 में परीक्षा प्रणाली बदलकर ‘सी-सेट’ (C-SAT) लागू किया है, तब से आने वाली अफसरों की नई पौध जमीन से कटी हुई है। इनमें से कुछ, और सी-सेट के बाद आए ज्यादातर आईएएस तो अब खुद को ‘सुपर हीरो’ मान बैठे हैं। जैसे फिल्मों का सुपर हीरो विज्ञान या गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों के विरुद्ध भी उड़ सकता है, वैसे ही ये अफसर खुद को संविधान और कानून से ऊपर समझने लगे हैं। इनके सार्वजनिक जीवन में शुचिता और सादगी का भारी अभाव है। दफ्तरों से ज्यादा इनके नशे और लेट-नाइट पार्टियों के शौक, और ‘एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर’ के चर्चे अब गलियारों में आम हो गए हैं। (इनके लक्षण पढ़ने के लिए कॉलम के अंत में दी गई लिंक पर क्लिक करें।) इसी पीढ़ी के आईएएस धरातल की हकीकत समझने के बजाय स्वयं को ‘शाह’  समझने की भूल कर बैठते हैं।

हालिया वाकया इसी दंभ का जीता-जागता प्रमाण है। एक बेहद जूनियर आईएएस ने पहले तो अपनी अधीनस्थ महिला कर्मचारी से दुर्व्यवहार किया और फिर माननीय मंत्री के बारे में उल-जुलूल और अमर्यादित टिप्पणियां कर डालीं। जब मंत्री जी और प्रभावशाली समाज से आने वाली उस महिला कर्मचारी के प्रबुद्ध समाजजनों तक यह बात पहुँची, तो स्थितियाँ बिगड़ गईं।

मंत्री जी ने अपनी गरिमा के अनुरूप डैमेज कंट्रोल के लिए आईएएस अफसर को कलेक्टर और कमिश्नर के साथ अपने बंगले पर बुलाया। लेकिन वहां जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। जब उस अफसर ने अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए सफेद झूठ बोलना शुरू किया, तो अमूमन सौम्य, शांत और विनम्र रहने वाले मंत्री जी के धैर्य का बांध टूट गया। अफसर की इस धृष्टता और झूठ पर मंत्री जी ने उन्हें जमकर फटकार लगाई। उस वक्त तो अफसर को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने माफी मांगकर मामला रफा-दफा (पटाक्षेप) कर दिया।

लेकिन वहां से लौटते ही ‘आईएएस होने का अहंकार’ फिर सिर चढ़कर बोलने लगा। दंभ में डूबे अफसर ने मंत्री को ही सबक सिखाने की ठान ली और ‘बड़े साहब’ को शिकायती पत्र लिख दिया। लेकिन बड़े साहब तो उनसे भी बड़े खिलाड़ी निकले। उन्होंने न तो खुद कोई स्टैंड लिया और न ही सरकार को वस्तुस्थिति से अवगत कराया; बल्कि गेंद ‘आईएएस एसोसिएशन’ के पाले में डाल दी। एसोसिएशन ने सोचा कि पत्र मीडिया में लीक कर मंत्री पर दबाव बनाया जाए और वाहवाही लूटी जाए।

मीडिया में मंत्री की छवि खराब करने की कोशिश तो हुई, लेकिन चूंकि पूरा शहर मंत्री जी के सद्व्यवहार से वाकिफ था, इसलिए किसी को भी शिकायत में लिखी बातों पर यकीन नहीं हुआ। रही-सही कसर तब पूरी हो गई जब पीड़ित महिला कर्मचारी ने शपथ-पत्र (Affidavit) दे दिया। अब एसोसिएशन बैकफुट पर है और युवा आईएएस साहब एसोसिएशन पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।

सवाल यह है कि इस पूरी घटना में अफसर की मंशा क्या थी? उन्होंने महिला कर्मचारी पर निगरानी रखने के लिए उसे अपने ‘पर्सनल स्टाफ’ में क्यों रखा? दरअसल, कुछ अफसरों पर वह कहावत सटीक बैठती है कि “चूहे को मिली चिंदी, वह बजाज बन बैठा।”

दहेज एक्ट, एससी-एसटी एक्ट और नारी प्रताड़ना के कानूनों के दुरुपयोग की तरह ही, ये नए अफसर अपने ‘आईएएस’ पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। अधीनस्थों के साथ अभद्र व्यवहार अब इनका शगल बन चुका है। आलम यह है कि डीओपीटी (DoPT) को होने वाली शिकायतों को भी ये रद्दी की टोकरी के हवाले कर देते हैं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने का नया ट्रेंड सेट कर रहे हैं।

प्रसिद्ध दार्शनिक प्लेटो ने कहा था— “किसी व्यक्ति के चरित्र की असली परीक्षा तब होती है जब उसे शक्ति (Power) दी जाती है।” और यहाँ शक्ति मिलते ही विवेक लुप्त होता दिख रहा है।

इस पूरी बौद्धिक कंगाली का चरम देखिए कि साहब अपनी व्यथा का एक शिकायती पत्र भी खुद नहीं लिख सके और सहारा लेना पड़ा ‘एआई’ (AI) का। जिस संस्था को देश की मेधा का प्रतीक माना जाता था, उसका इतना अवमूल्यन? समझ गए न आप!

अब शुरू करते हैं आज का ‘द इनसाइडर्स’ का अंक……

धृष्टता के लिए क्षमा प्रार्थी हैं, क्योंकि इस बार हम आपको सत्ता के गलियारों के उन चुटीले और चटखारेदार किस्सों का रसास्वादन नहीं करवा पा रहे हैं। कारण—’पापी पेट’ की खातिर कुछ अन्य अनिवार्य व्यस्तताओं ने घेर रखा है। लेकिन हम अपने सुधि पाठकों से यह वादा करते हैं कि अगले शनिवार, ‘पावर कॉरिडोर’ की वही गुदगुदाने वाली और गहरी ख़बरें लेकर हम पुनः आपके समक्ष हाज़िर होंगे। तब तक के लिए प्रतीक्षा कीजिए… क्योंकि असल खबर तो वही है जो छिपायी जा रही है!

सीसेट पर आधारित कॉलम पढ़ें 1 : द इनसाइडर्स: रातें रंगीन करने वाला बना मंत्री का सहायक, विभाग का लेनदेन करने वाला हुआ गुमशुदा, टेरर टैक्स वसूल रहा मंत्री पुत्र

2. द इनसाइडर्स: डील के बाद दक्षिण की यात्रा करते हैं कमिश्नर साहब, सीडी की साजिश में बड़का इंजीनियर शामिल, अतिउत्साही कलेक्टर

 

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