आप बाहर से तंदरुस्त नजर आ रहे हैं पर 30 के बाद घिर सकते हैं जानलेवा बीमारियों से, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की जरूरत
कम उम्र में बढ़ता दिल की बीमारियों का खतरा: बाहरी तंदुरुस्ती के पीछे छिपी चेतावनी

लेखक – श्री अमरनाथ सक्सेना, चीफ टेक्निकल ऑफिसर – कमर्शियल, बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड (पूर्व नाम बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड)
भोपाल | आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में तनाव और जीवनशैली से जुड़ी आदतों की वजह से लोगों में कई तरह की बीमारियां देखने को मिल रही हैं। यहां तक कि अब तो 30 साल से कम उम्र के लोगों को भी दिल का दौरा पड़ रहा है। ये घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि हम अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो जाएं और समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच करवाएं। अचानक से होने वाली ये घटनाएं हमें बताती हैं कि भले हम बाहरी तौर पर देखने में एकदम तंदुरुस्त लगें, लेकिन हमारे शरीर के भीतर कुछ चीज़ें घटित होती रहती हैं और जिनका हमें पता भी नहीं लगता।
30 और 40 की उम्र है बेहद अहम पड़ाव: मेडिकल-साइंस की दुनिया हमें बताती है कि 40 के बाद की उम्र आपकी ज़िंदगी में खास टर्निंग पॉइंट लाती है यानी कि यह ज़िंदगी का एक बेहद अहम पड़ाव है। बढ़ती उम्र के साथ कई लोगों का मेटाबॉलिज़्म धीमा होने लगता है और शरीर में हार्मोनल बदलाव भी होने लगते हैं। इन्हीं प्रमाणों के मद्देनज़र दुनियाभर की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों ने मेडिकल जांच के लिए एक उपयुक्त उम्र और समय-सीमा तय की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, बीमारियों की समय रहते पहचान गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी और किफायती तरीका है। भारत में गंभीर और असाध्य बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सलाह दी जाती है कि 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्क डायबिटीज़, हाइपरटेंशन और कुछ सामान्य प्रकार के कैंसर की नियमित रूप से मेडिकल जांच ज़रूर करवाएं।
डायबिटीज़ और मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी बीमारियों में तेज़ी: सरकार द्वारा समर्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के शोध के अनुसार, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां युवाओं को तेज़ी से अपनी चपेट में ले रही है और इसमें शहरी क्षेत्रों की आबादी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। आईसीएमआर-इंडियाबी राष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार भारत में 11.4 प्रतिशत वयस्क डायबिटीज़ से प्रभावित हैं और 15.3% प्री-डायबिटिक हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी आबादी में डायबिटीज़ के अधिक मामले देखने को मिलते हैं। अध्ययन में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि शारीरिक गतिविधियां सुस्त होना, खान-पान की गलत आदतें अपनाना, मोटापा, तनाव और तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण की वजह से लोगों में मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस की क्या है भूमिका?
हेल्थ इंश्योरेंस के नज़रिए से देखें तो बदलते रुझान बताते हैं कि आपको ज़िंदगी में जल्द से जल्द हेल्थकेयर खर्चों के लिए एक मज़बूत प्लान तैयार करना चाहिए। आज जिस तरह से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां जैसे कि डायबिटीज़, हायपरटेंशन या दिल से जुड़ी बीमारियां बेहद कम उम्र में हो रही हैं, नतीजतन लोगों को लंबे समय के लिए इलाज, मेडिकल जांच, मेडिकल टेस्ट और कभी-कभार अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत पड़ सकती है। इन सब वजहों से आपको घरेलू मोर्चे पर आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसमें नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह, मेडिकल टेस्ट, दवाइयां और इलाज के बाद की देखभाल के खर्च के साथ-साथ कई साल भी लग सकते हैं। जहां दिनोंदिन मेडिकल खर्च बढ़ते जा रहे हैं, वहीं अगर आप पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं हैं, तो बार-बार होने वाले इन खर्चों का असर लंबे समय की आपकी आर्थिक योजनाओं पर पड़ सकता है।
आप जितनी कम उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस लेंगे आपको उतना ज़्यादा फायदा होगा। अगर आपको सेहत से जुड़ी कोई गंभीर समस्या होती है, तो आप पहले से ही सुरक्षित रहेंगे। जल्द से जल्द हेल्थ इंश्योरेंस लेने से न केवल आपको लगातार सुरक्षा मिलती है, बल्कि पॉलिसीधारक फटाफट वेटिंग पीरियड भी पूरी कर लेते हैं, जिससे कि भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी किसी भी ज़रूरत के लिए आप पूरी तरह से तैयार रहते हैं।
प्रिवेंटिव हेल्थकेयर एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी अहमियत दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। अस्पताल में भर्ती होने के खर्चों के साथ-साथ आधुनिक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी मौजूदा ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के ज़रिए वेलनेस प्रोग्राम, फोन पर डॉक्टर की सलाह, हेल्थ चेकअप और डिजिटल हेल्थ सेवाएं भी शामिल की जाती हैं। इन पहलों से व्यक्ति इस बात के लिए स्वयं प्रोत्साहित होते हैं कि वे नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की जांच-पड़ताल कराएं, न कि जब लक्षण नज़र आएं तो इलाज के लिए दौड़ लगाएं।
जैसे सेहत से जुड़ी ज़रूरतें बदलती जा रही हैं और मेडिकल खर्चों में लगातार बढ़ोत्तरी रही है, वैसे केवल इलाज पर ध्यान देने के बजाय बीमारी की रोकथाम, बीमारी से सुरक्षा और बीमारियों के ख़िलाफ़ बेहतर तैयारी जैसी बातों की अहमियत बढ़ गई है। ऐसे में बेहतर है कि आप पर्याप्त कवरेज वाला एक ऐसा हेल्थ इंश्योरेंस चुनें जिसमें खास सहूलियतें जैसे कि स्वास्थ्य की जांच-पड़ताल, ओपीडी, वेलनेस प्रोग्राम और जल्द से जल्द मेडिकल जांच शामिल हों।
आज के दौर में अपनी सेहत का ख्याल रखना सिर्फ एक ज़िम्मेदारी ही नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ और खुशहाल रहने की दिशा में एक ज़रूरी कदम भी है। जब आप एक उपयुक्त हेल्थ इंश्योरेंस के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं, तो आप न केवल खुद को, बल्कि अपने परिवार को भी आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाते हैं।



