OPS को लेकर बढ़ी सख्त,CAG ने राजस्थान सरकार से वित्तीय डेटा मांगा

जयपुर
राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) एक बार फिर चर्चा में है. इस बार मामला सरकारी फाइलों और आर्थिक गणित से जुड़ा है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने शनिवार को राजस्थान सरकार को एक अहम नोटिस जारी किया है, जिसमें राज्य के खजाने पर पड़ने वाले आर्थिक असर का ब्यौरा मांगा गया है. आइए, आसान शब्दों में समझते हैं कि इस नोटिस के पीछे की कहानी क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है.
क्या मांग रहा है CAG?
CAG ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया है कि वह OPS से जुड़ी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे. इस रिपोर्ट के जरिए सरकार को यह बताना होगा कि अगले 10 वर्षों में पेंशन स्कीम के कारण सरकारी खजाने पर कितना आर्थिक दबाव पड़ेगा.
रिपोर्ट में मुख्य रूप से ये जानकारी देनी होगी
CAG की इस विस्तृत रिपोर्ट में राजस्थान सरकार को तीन प्रमुख पहलुओं पर फोकस करना होगा. सबसे पहले, अगले 10 सालों में OPS के कारण सरकारी खजाने पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का अनुमान लगाना अनिवार्य है. इसके साथ ही, राज्य की मौजूदा बजट स्थिति और वित्तीय हालात का सटीक खाका पेश करना होगा, ताकि पेंशन भुगतान और राजस्व आय के बीच के संतुलन को स्पष्ट रूप से समझा जा सके.
क्यों जरूरी है यह रिपोर्ट?
यह कोई सामान्य सवाल-जवाब नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है. CAG ने यह जानकारी वित्तीय जिम्मेदारी एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) के तहत मांगी है.
क्या होता है FRBM Act?
यह एक्ट एक तरह का 'रूलबुक' है, जो राज्य सरकारों को अनुशासन में रखता है. इसके तहत किसी भी राज्य को यह स्पष्ट करना अनिवार्य है कि वह अपने खर्चों का प्रबंधन कैसे कर रहा है और भविष्य में उसके वित्तीय दायित्व (Financial Obligations) क्या होंगे. यह एक्ट सुनिश्चित करता है कि राज्य सरकार कर्ज के जाल में न फंसे और विकास के लिए पर्याप्त फंड बचा रहे.
रिपोर्ट जमा करने की डेडलाइन
राजस्थान सरकार को यह पूरी जानकारी 15 जून तक जमा करानी है. सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति का स्पष्ट आईना पेश करना होगा, जिससे यह पता चल सके कि भविष्य में पेंशन का बोझ राज्य के विकास कार्यों या अन्य योजनाओं को प्रभावित तो नहीं करेगा.
मामला क्या है?
याद दिला दें कि राजस्थान में साल 2022 में तत्कालीन सरकार ने नई पेंशन योजना (NPS) को हटाकर वापस ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) लागू की थी. तभी से यह मुद्दा देशभर में बहस का विषय बना हुआ है कि लंबे समय में यह स्कीम राज्य की अर्थव्यवस्था पर क्या असर डालेगी. अब CAG की इस रिपोर्ट से वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी.



