सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन का बड़ा कायाकल्प, संकरी सड़क होगी 30 मीटर चौड़ी फोरलेन

उज्जैन
मध्य प्रदेश में सिंहस्थ-2028 से पहले कई विकासकार्य प्रगति पर है। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ के लिए जिले में युद्धस्तर पर सड़क और हाईवे निर्माण का कार्य चल रहा है। इसी कड़ी में पीपलीनाका से ओखलेश्वर तक की संकरी सड़क को निकट भविष्य में सुव्यवस्थित फोरलेन (Four-lane Road Construction) के रूप में तैयार करने की योजना पर काम चल रहा है। सिंहस्थ अंतर्गत उज्जैन विकास प्राधिकरण वर्तमान की 3.5 मीटर चौड़ी सडक को 30 मीटर चौड़े फोरलेन के रूप में विकसित कर रहा है। यहां आवाजाही के लिए चौड़े रास्तों के साथ ही सेंटर डिवाइडर, फुटपाथ, आकर्षक स्ट्रीट लाइट आदि सुविधाएं मिलेगी।
मार्च 2027 तक काम पूरा होने की संभावना
सिंहस्थ-28 की तैयारियों को लेकर उज्जैन विकास प्राधिकरण पीपलीनाका से ओखलेश्वर तक महत्वपूर्ण मार्ग का चौड़ीकरण व सीसी सडक निर्माण कर रहा है। पूर्व मै मार्ग सिर्फ 3.50 मीटर चौड़ा होने से इसकी यातायात क्षमता काफी कम थी। सिंहस्थ के दौरान संभावित अत्यधिक यातायात दबाव को देखते हुए अब इसे लगभग 30 मीटर चौड़े सुव्यवस्थित और आधुनिक मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है। अभी गढ़कालिका से भैरवगढ़ ब्रिज तक सडक़ की खुदाई के साथ मुरम, सीआरएम व नाली निर्माण कार्य प्रगतिरत है। निर्माण कार्य को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। संपूर्ण मार्ग का निर्माण मार्च 2027 तक पूर्ण किए जाने की संभावना है।
सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं को चलने को मिलेगा 4 मीटर चौड़ा फुटपाथ
सिंहस्थ के साथ ही आम दिनों श्रद्धालुओं व राहगिरों की सुविधा, सुगम यातायात और बेहतर भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग का विकास किया जा रहा है। मार्ग की लंबाई 1900 मीटर है। इसके दोनो और लगभग 10-10 मीटर चौड़ा कैरिज-वे (वाहनों की आवाजाही के लिए). 1-1 मीटर चौड़ी नाली व 4-4 मीटर चौड़ा फुटपाथ विकसित किया जाएगा। मार्ग के मध्य में 1.50 मीटर चौड़ा डिवाइडर बनाया जाएगा। इसमें आकर्षक स्ट्रीट लाइटिंग की व्यवस्था रहेगी।
भीड़ प्रबंधन में मदद मिलेगी
यह मार्ग पीपलीनाका दक्षेत्र से भैरवगढ़ मंदिर क्षेत्र को सीधे जोड़ता है। सिंहस्थ के दौरान इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं व वाहनों का आवागमन होता है। मार्ग चौड़ीकरण से यातायात का बेहतर वितरण हो सकेगा व शहर के अन्य प्रमुख मार्गों पर पड़ने वाले अतिरिक्त यातायात दबाव को कम करने में सहायता मिलेगी। इससे मार्ग सिंहस्थ के दौरान एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक यातायात कॉरिडोर के रूप में उपयोगी होगा। श्रद्धालुओं को सुरक्षित सुगम एवं व्यवस्थित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराएगा।



