PNB MSME कार्यक्रम में उद्योगों की तरक्की पर मंथन, ऑल इंडिया गोल्ड मेडलिस्ट आयुष गर्ग ने बताए विकास के उपाय

पीएनबी के एमएसएमई आउटरीच कार्यक्रम में ऑल इंडिया गोल्ड मेडलिस्ट सीए, सीएस, सीएमए आयुष गर्ग ने दिए उद्योगों के विकास के सुझाव

राइस मिलर्स के लिए 7.65% और अन्य एमएसएमई इकाइयों के लिए 8.10% ब्याज दर पर वित्तपोषण की संभावनाओं पर किया प्रकाश; बैंकिंग योजनाओं की जानकारी को बताया उद्योगों की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण

रायपुर,

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) द्वारा 26 अक्टूबर को उरला इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, उरला इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स, बिरगांव मेन रोड, रायपुर में आयोजित एमएसएमई आउटरीच कार्यक्रम में ऑल इंडिया गोल्ड मेडलिस्ट सीए, सीएस, सीएमए आयुष गर्ग ने भाग लेकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के वित्तपोषण, बैंकिंग सुविधाओं और उद्योगों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष एमएसएमई योजनाओं एवं बैंकिंग सहायता के माध्यम से छोटे व्यवसायों को सशक्त बनाना और उद्यमियों को उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में उद्योगों की वित्तीय आवश्यकताओं, बैंक ऋण सुविधाओं, कार्यशील पूंजी, व्यवसाय विस्तार और विभिन्न बैंकिंग योजनाओं के महत्व पर चर्चा हुई। इस अवसर पर वित्तीय विशेषज्ञ आयुष गर्ग ने अपने पेशेवर अनुभव के आधार पर बताया कि समय पर और उचित लागत पर वित्तपोषण उपलब्ध होना उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राइस मिलर्स एवं एमएसएमई इकाइयों के लिए आकर्षक ब्याज दरों पर चर्चा

आयुष गर्ग ने राइस मिलिंग उद्योग तथा अन्य एमएसएमई इकाइयों के लिए उपलब्ध वित्तपोषण विकल्पों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने राइस मिलर्स के लिए 7.65% तथा अन्य एमएसएमई इकाइयों के लिए 8.10% की ब्याज दरों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पात्र उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध होने से वित्तीय लागत को नियंत्रित करने, नकदी प्रवाह बेहतर बनाने और व्यवसाय के विस्तार में सहायता मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि राइस मिलिंग जैसे उद्योगों में कच्चे माल की खरीद, स्टॉक का रखरखाव, उत्पादन, परिवहन और भुगतान चक्र के कारण पर्याप्त कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है। ऐसे में उपयुक्त बैंकिंग सुविधाओं और प्रभावी वित्तीय नियोजन से उद्यमी अपने कारोबार को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित कर सकते हैं।

उन्होंने अन्य एमएसएमई इकाइयों के लिए भी बैंक की लागू योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध ऋण सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करने और अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तपोषण विकल्पों का मूल्यांकन करने पर जोर दिया। उल्लिखित ब्याज दरें संबंधित योजना, ऋण की प्रकृति, बैंक की शर्तों, पात्रता और उधारकर्ता की क्रेडिट प्रोफाइल के अधीन होंगी।

टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल एवं व्यवसाय विस्तार के लिए वित्तीय नियोजन जरूरी

कार्यक्रम के दौरान आयुष गर्ग ने कहा कि किसी भी उद्योग के विकास के लिए केवल ऋण प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऋण का उचित उपयोग, समयबद्ध पुनर्भुगतान और वित्तीय अनुशासन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने उद्यमियों को निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी:

* वर्किंग कैपिटल फाइनेंस: कच्चे माल की खरीद, स्टॉक एवं दैनिक व्यावसायिक आवश्यकताओं के लिए उचित सीमा का निर्धारण।
* टर्म लोन: नई मशीनरी, संयंत्र, तकनीकी उन्नयन और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए उपयुक्त वित्तपोषण।
* व्यवसाय विस्तार: नई इकाइयों की स्थापना, मौजूदा इकाई के आधुनिकीकरण और कारोबार बढ़ाने के लिए दीर्घकालीन वित्तीय योजना।
* वित्तीय दस्तावेज: नियमित लेखांकन, अद्यतन वित्तीय विवरण, बैंक स्टेटमेंट और कर अनुपालन संबंधी रिकॉर्ड का सुव्यवस्थित रखरखाव।
* ऋण पुनर्भुगतान: नकदी प्रवाह के अनुरूप ऋण संरचना तैयार करना तथा वित्तीय दायित्वों का समय पर निर्वहन।

उन्होंने कहा कि जब उद्यमी अपने व्यवसाय की वास्तविक वित्तीय स्थिति, अनुमानित नकदी प्रवाह और ऋण चुकाने की क्षमता को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करते हैं, तो बैंक को उनके प्रस्ताव का मूल्यांकन करने में सुविधा होती है।

बैंकिंग योजनाओं की जानकारी से मजबूत होगा एमएसएमई क्षेत्र

आयुष गर्ग ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह क्षेत्र रोजगार सृजन, स्थानीय औद्योगिक विकास, उत्पादन और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करता है। ऐसे में बैंकिंग संस्थानों और वित्तीय विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय से उद्यमियों को उपयुक्त वित्तीय सुविधाओं की जानकारी मिल सकती है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उद्यमियों को ऋण आवेदन करने से पहले अपनी वित्तीय आवश्यकताओं का सही आकलन करना चाहिए। कार्यशील पूंजी और दीर्घकालीन निवेश की जरूरतों के बीच अंतर समझकर उपयुक्त ऋण सुविधा का चयन करना आवश्यक है। इससे अनावश्यक वित्तीय दबाव कम करने और कारोबार की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने उद्यमियों को बैंक की विभिन्न योजनाओं, पात्रता मानदंडों, आवश्यक दस्तावेजों, ब्याज दरों और अन्य लागू शर्तों की जानकारी संबंधित बैंक अधिकारियों से प्राप्त करने की सलाह दी।

पीएनबी प्रबंधन के प्रति जताया आभार

इस अवसर पर सीए, सीएस, सीएमए आयुष गर्ग ने पीएनबी के अंचल प्रमुख श्री महेश जी एवं सर्किल प्रमुख श्री शर्मा जी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े अपने अनुभव, व्यावहारिक सुझाव और वित्तीय दृष्टिकोण साझा करने का अवसर प्रदान करने के लिए बैंक प्रबंधन का धन्यवाद किया।

उन्होंने पीएनबी द्वारा आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रमों को बैंकिंग संस्थानों और उद्यमियों के बीच संवाद स्थापित करने का उपयोगी माध्यम बताया। ऐसे आयोजनों से उद्योगों की वास्तविक वित्तीय जरूरतों को समझने, उपलब्ध योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उद्यमियों को वित्तीय निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।

वित्तीय विशेषज्ञ के रूप में आयुष गर्ग की भूमिका

ऑल इंडिया गोल्ड मेडलिस्ट सीए, सीएस, सीएमए आयुष गर्ग ऑडिट, कराधान, परियोजना वित्त, बैंकिंग प्रस्ताव, वित्तीय परामर्श और एमएसएमई सलाहकार सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत हैं। अपनी बहुविषयक पेशेवर योग्यताओं और वित्तीय अनुभव के माध्यम से वे व्यवसायों को वित्तीय नियोजन, वैधानिक अनुपालन, बैंक ऋण प्रस्तावों तथा उपयुक्त संस्थागत वित्तपोषण के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम में उनकी भागीदारी ने एमएसएमई क्षेत्र की वित्तीय आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धी ऋण सुविधाओं और उद्योगों के सतत विकास में वित्तीय जागरूकता की भूमिका को रेखांकित किया।

 

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