जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 तक जारी जन्म प्रमाणपत्र जांच के घेरे में, सितंबर तक पूरी करनी होगी जांच

कोलकाता
तृणमूल कांग्रेस के शासन के अंतिम पांच वर्षों के दौरान जारी किए गए जन्म प्रमाणपत्र जांच के दायरे में आएंगे। बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने जनवरी, 2021 से दिसंबर, 2025 तक आफलाइन अथवा ऑनलाइन माध्यम से जारी किए गए जन्म प्रमाणपत्रों की वैधता की जांच करने का निर्देश जारी किया है।
राज्य सचिवालय की ओर से कहा गया कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के प्रमाण मिले हैं। विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फर्जी जन्म प्रमाणपत्र सामने आए हैं। इसी के मद्देनजर सरकार ने पिछले पांच वर्षों में जारी जन्म प्रमाणपत्रों की जांच कराने का निर्णय लिया है।
इन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म प्रमाणपत्रों की जांच की जिम्मेदारी बीडीओ की होगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में एसडीओ इसकी जांच करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर दोनों अधिकारी जांच टीम भी गठित कर सकते हैं। विलंब से किए गए जन्म पंजीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्रमाणपत्र जारी करने के दौरान किन दस्तावेजों की जांच की गई थी और निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी भी विस्तार से पड़ताल की जाएगी। किन-किन दस्तावेजों की जांच की गई और उसका परिणाम क्या रहा, इसकी जानकारी ‘जन्म-मृत्यु सूचना पोर्टल’ पर अपलोड करनी होगी। प्रत्येक जन्म प्रमाणपत्र के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। ॉ
यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित प्रमाणपत्र असली, फर्जी या त्रुटिपूर्ण है। इसकी भी जांच की जाएगी कि जन्म प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारी के पास ऐसा करने का अधिकार था या नहीं। यदि कोई प्रमाणपत्र फर्जी या गैरकानूनी पाया जाता है, तो उसके पीछे के कारण को भी रिपोर्ट में दर्ज करना होगा। सरकार ने सितंबर के भीतर जांच प्रक्रिया पूरा करने का निर्देश दिया है।
डिप्टी मजिस्ट्रेट या डिप्टी कलेक्टर के पद से नीचे के किसी अधिकारी को जांच टीम में शामिल नहीं किया जा सकेगा। इससे पहले राज्य सरकार ने कहा था कि अब नगरपालिकाओं के अध्यक्ष और पंचायत प्रधान अपने स्तर पर जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं कर सकेंगे। यह अधिकार केवल अधिकृत सरकारी अधिकारियों के पास रहेगा।



