फायर NOC नहीं तो कार्रवाई तय! जबलपुर में सैकड़ों भवनों को भेजा गया नोटिस

जबलपुर
दिल्ली के होटल में लगी आग की वजह से पूरे देश में चिंता है. मध्य प्रदेश सरकार ने भी सभी बड़े नगर निगमों से फायर सेफ्टी से जुड़ी जानकारियां एकत्रित की है. जबलपुर नगर निगम के महापौर का दावा है कि हमने लगभग 350 ऊंची इमारत को फायर सेफ्टी का नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही एक 3 सदस्य टीम रोज जबलपुर की अलग-अलग इमारत का जायजा ले रही है।
अग्नि दुर्घटनाओं से बचने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
दिल्ली के एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद पूरे देश में अग्नि दुर्घटनाओं को लेकर चिंता जताई जा रही है. जबलपुर नगर निगम के फायर सेफ्टी ऑफिसर कुशाग्र सिंह ने बताया कि "राज्य सरकार की ओर से इस विषय में एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रखी गई है. जिसमें अग्नि दुर्घटनाओं से बचने को लेकर सभी से चर्चा की जा रही है।
फायर सेफ्टी की जांच कर रही है टीम
जबलपुर नगर निगम के महापौर जगत बहादुर सिंह का कहना है कि "जबलपुर में भी कई इमारतें ऐसी हैं, जो अग्नि दुर्घटनाओं को लेकर संवेदनशील हैं. हमने ऐसी लगभग 350 इमारतों के लिए नोटिस जारी किए हैं और जानकारी मांगी है कि आखिर उन्होंने अपनी इमारत में फायर सेफ्टी के इंतजाम क्यों नहीं किए हैं।
जगत बहादुर ने बताया कि "जबलपुर नगर निगम के फायर डिपार्टमेंट की 3 सदस्यों की एक टीम रोज शहर के अलग-अलग हिस्सों में फायर सेफ्टी की जांच कर रही है और जहां भी हमें ऐसा लगता है कि कोई लापरवाही बरती जा रही है, वहां तुरंत नोटिस जारी करके सुविधा बढ़ाने के लिए कहा जाता है।
किन फायर सेफ्टी एनओसी जरूरी?
जबलपुर नगर निगम के फायर सेफ्टी ऑफिसर कुशाग्र सिंह का कहना है कि "नियम के अनुसार फायर सेफ्टी का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) या तो उस इमारत को लेना है, जिसका निर्माण 5000 वर्ग फीट से ज्यादा का है या फिर उस इमारत को जिसकी ऊंचाई 15 मीटर से ज्यादा है. बाकी निर्माण कार्य फायर सेफ्टी एनओसी के दायरे में नहीं आते।
अवैध पार्किंग रास्ते हो जाते हैं जाम
सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि दिल्ली में जो घटना हुई, वह एक घनी बस्ती के भीतर बनी इमारत में लगी आग की वजह से बचाव कार्य नहीं किए जा सका. जबलपुर के फायर सेफ्टी अधिकारी कुशाग्र सिंह का कहना है कि "यह स्थिति जबलपुर में भी है. जबलपुर के कई इलाको में घनी बशाहट है. सड़के तो चौड़ी हैं, लेकिन सड़कों पर अवैध पार्किंग की वजह से जाने आने के रास्ते जाम हो जाते हैं. ऐसी हालत में दिन में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव कठिन हो जाता है।
'घना बस्तियों में आग पर कंट्रोल करना मुश्किल'
जबलपुर में 2 माह पहले सतना बिल्डिंग के पीछे इसी तरह की एक इमारत में आग लग गई थी. गनीमत थी कि उस इमारत में कोई रह नहीं रहा था. इस बिल्डिंग में कपड़े का कारखाना था. बिल्डिंग तक पहुंचाने के लिए मात्र 10 फीट की रोड थी और बिल्डिंग में केवल एक ही तरफ से एंट्रेंस था. ऐसे हालात जबलपुर में हर साल बनते हैं और घनी बस्तियों में लगी आग को नियंत्रित कर पाना कठिन हो जाता है।
जबलपुर में कुछ साल पहले एक अस्पताल में भी आग लगी थी और इसमें कुछ बच्चों की जान चली गई थी. इस घटना के बाद से ही शहर में संवेदनशीलता बढ़ गई है और लोगों ने फायर एग्जिट को लेकर अच्छा काम किया है. इसलिए ज्यादातर नई इमारत में अग्नि दुर्घटनाओं को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य किया जा रहे हैं।



