पोलैंड में तख्तापलट जैसी स्थिति? न्यायपालिका में बड़े फैसले के बाद देशभर में मची हलचल

वारसॉ
पोलैंड की राजधानी वारसॉ में 30 अक्टूबर 2026 की शाम को उस समय बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया, जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर एक अचानक आए नोटिस ने न्यायपालिका के शीर्ष नेतृत्व को निलंबित कर दिया। इस अप्रत्याशित कदम के बाद अदालत परिसर को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर सील कर दिया, सड़कों पर समर्थक और प्रदर्शनकारी उतर आए और सेनेगल जा रहे देश के राष्ट्रपति को बीच हवा से अपना विमान वापस वारसॉ मोड़ना पड़ा। ट्रिब्यूनल के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस पूरे घटनाक्रम को "तख्तापलट" करार दिया गया है।
वेबसाइट पर सूचना और 'सबसे वरिष्ठ जज' का दावा
30 अक्टूबर को स्थानीय समयानुसार शाम लगभग 6:00 बजे पोलैंड के संवैधानिक न्यायाधिकरण की वेबसाइट पर एक संक्षिप्त नोटिस दिखाई दिया। इसमें कहा गया कि ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष बोगदान स्वेचकोव्स्की और उपाध्यक्ष बार्तोलोमी सोहांस्की को उनके आधिकारिक कर्तव्यों से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस सूचना के कुछ ही देर बाद वेबसाइट डाउन हो गई।
ट्रिब्यूनल की जज अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का ने मीडिया के सामने आकर कहा कि कानून का शासन बहाल करने के लिए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि सबसे वरिष्ठ जज होने के नाते अब वे न्यायाधिकरण का प्रशासन संभाल रही हैं।
ट्रिब्यूनल के मौजूदा नेतृत्व और विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी 'लॉ एंड जस्टिस' (PiS) ने इस निलंबन को पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताया है।
राष्ट्रपति नौरोकी ने बीच रास्ते मोड़ा विमान; चीन में राजदूत का इस्तीफा
इस संवैधानिक संकट की खबर मिलते ही सेनेगल की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नौरोकी ने अपना विमान बीच हवा से वापस वारसॉ मोड़ने का आदेश दे दिया।
राष्ट्रपति नौरोकी ने सोशल मीडिया (X) पर लिखा, “ऐसे समय में राष्ट्रपति का पोलैंड में होना जरूरी है। मैं सेनेगल की अपनी उड़ान को छोटा कर तुरंत वापस लौट रहा हूं।”
शनिवार तड़के राष्ट्रपति कार्यालय के मुख्य सचिव पावेल शेफरनेकर ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति नौरोकी, सुप्रीम कोर्ट के प्रथम अध्यक्ष जबिग्निव कपिंस्की के साथ संवैधानिक ट्रिब्यूनल की इमारत के अंदर दाखिल हो चुके हैं।
घटनाक्रम के विरोध में चीन में पोलैंड के राजदूत याकुब कुमोच ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, अमेरिका में जी-20 शिखर सम्मेलन में मौजूद पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने एक्स पर तीखा जवाब देते हुए लिखा, "आपके मिशन का यह गैर-पेशेवर अंत स्वीकार्य है। अब आप गणराज्य का प्रतिनिधित्व नहीं करते।"
टस्क सरकार बनाम PiS: सालों पुराना न्यायपालिका का विवाद
पोलैंड की न्यायपालिका और संवैधानिक अदालत पर नियंत्रण को लेकर वर्तमान प्रो-यूरोपीय सरकार और पूर्व सत्तारूढ़ पार्टी 'लॉ एंड जस्टिस' (PiS) के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है।
2023 में सत्ता में आई प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार का आरोप है कि PiS ने अपने 2015-2023 के शासनकाल के दौरान अदालत पर राजनीतिक कब्जा कर लिया था और अवैध रूप से जजों की नियुक्ति की थी। टस्क ने एक्स पर लिखा, "कानून के शासन को बहाल करना हमारा दायित्व है। सालों की गैर-कानूनी व्यवस्था के बाद यह एक कठिन प्रक्रिया है, लेकिन इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है।"
PiS के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री जबिग्निव जिओब्रो ने इस कार्रवाई को आपराधिक हमला करार देते हुए समर्थकों से सड़कों पर उतरकर "डटकर मुकाबला करने" की अपील की है।
राजधानी वारसॉ में ट्रिब्यूनल के बाहर भारी संख्या में दंगा रोधी पुलिस बल तैनात है और प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री टस्क के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। यह विवाद पोलैंड में एक नए बड़े संवैधानिक संकट का रूप ले चुका है।



