क्या है ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस और PM मोदी को इसके लिए कितना भुगतान करना होगा?

नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पत्र में इस पहल को मध्य पूर्व में शांति को पुख्ता करने और वैश्विक संघर्ष को सुलझाने का एक ऐतिहासिक और साहसिक प्रयास बताया है। भारत के लिए इस न्योते के मायने क्या हैं। जानते हैं अगर भारत इस बोर्ड का हिस्सा बनता है तो क्या होगा।
पहले समझें क्या है बोर्ड ऑफ पीस
ट्रंप ने गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत इस बोर्ड की शुरुआत की है। वॉशिंगटन, ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को गाजा और उसके आसपास शांति एवं स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह निकाय अन्य वैश्विक संघर्षों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। मूल रूप से, इस नए निकाय को गाजा के पुनर्निर्माण के लिए शासन की देखरेख और वित्तपोषण समन्वय का कार्य सौंपा जाना है।
भारत के लिए क्या हैं मायने
इस बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप के पास होगी। अगर भारत न्योता स्वीकार करता है, तो वह तीन सालों के लिए बोर्ड का हिस्सा बन जाएगा। हालांकि, अगर किसी देश को सदस्य बने रहना है, तो आर्थिक रूप से योगदान भी देना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हर देश को 1 बिलियन डॉलर देने होंगे। इसके साथ ही वह स्थाई सदस्य बन जाएगा और इस धन का इस्तेमाल बोर्ड की गतिविधियों में होगा।
बहरहाल, शुरुआत के तीन सालों की सदस्यता के लिए किसी देश को आर्थिक योगदान नहीं देना होगा। शामिल देश गाजा में होने वाले अगले चरण के सीजफायर के बाद गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इनमें नए फिलिस्तीनी समिति, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास से हथियार लेने की प्रक्रिया और गाजा का दोबारा निर्माण शामिल है।
पीएम मोदी को भेजा पत्र
ट्रंप ने मोदी को एक पत्र लिखा, जिसे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर साझा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को मध्य पूर्व में 'शांति बहाल करने के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व शानदार प्रयास' में शामिल होने और साथ ही 'वैश्विक संघर्ष के समाधान के लिए एक साहसिक नए दृष्टिकोण' पर काम करने के लिए आमंत्रित करना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है।
गोर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें ट्रंप का निमंत्रण मोदी तक पहुंचाने का सम्मान मिला है, जिसमें उन्हें ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है और यह निकाय 'गाजा में स्थायी शांति लाएगा'। राजदूत ने कहा कि बोर्ड स्थिरता और समृद्धि हासिल करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा।
ट्रंप ने मोदी को लिखे पत्र में 29 सितंबर को गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना की घोषणा के साथ-साथ मध्य पूर्व में शांति लाने के लिए अपनी 20-सूत्री रूपरेखा का भी उल्लेख किया।
किन देशों को न्योता
भारत के अलावा इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर, पाकिस्तान, कनाडा और अर्जेंटीना सहित लगभग 50 देशों को आमंत्रित किया गया है। सदस्यों की आधिकारिक सूची की घोषणा आने वाले दिनों में दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान होने की संभावना है।
व्हाइट हाउस ने बोर्ड के विजन को लागू करने के लिए एक कार्यकारी समिति की भी घोषणा की है। इस समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जारेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।



