सीवेज कनेक्शन के नाम पर 17 लाख वसूले, 24 साल तक नहीं बिछी लाइन; NGT ने लगाई फटकार

भोपाल
 बागमुगलिया की प्रियदर्शिनी कालोनी सहित आसपास की कालोनियों में सीवेज की समस्या को लेकर दायर मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

1999-2000 में बाहरी विकास और सीवेज कनेक्टिविटी के लिए नगर निगम में जमा कराई गई राशि के बावजूद वर्षों तक सीवेज लाइन नहीं बिछाने के मामले में एनजीटी ने अब जांच के निर्देश दिए हैं।

साथ ही नगर निगम को जमा राशि को 6 प्रतिशत ब्याज सहित अमृत योजना-2.0 के फंड में जमा कराने को कहा है।

विकास शुल्क जमा, समस्या जस की तस
वार्ड-53 से वर्तमान पार्षद प्रताप वारे ने एनजीटी में याचिका दर्ज कर आरोप लगाया था कि वार्ड-53, बागमुगलिया की बहुमंजिला इमारतों और कॉलोनियों से सीवेज का उचित निस्तारण नहीं हो रहा है। कई जगह बिना उपचारित सीवेज खाली प्लाटों में फैल रहा है, जिससे दुर्गंध, गंदगी, मच्छरों और बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

एनजीटी ने पाया कि परियोजना से जुड़े पक्ष ने नगर निगम को 98,600 रुपये बाहरी विकास शुल्क, 15.56 लाख रुपये बाहरी विकास अनुमति शुल्क और 1.04 लाख रुपये की राशि सुपरविजन शुल्क के रूप में जमा की थी। इसके बावजूद सीवेज कनेक्टिविटी का काम नहीं हुआ।

एनजीटी ने लगाया 6 प्रतिशत ब्याज लगाया
ट्रिब्यूनल ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के सचिव और कलेक्टर को जांच कर यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि वर्ष 1999-2000 में जमा राशि का उपयोग क्यों नहीं हुआ और उसके दुरुपयोग की स्थिति कैसे बनी। राशि को छह प्रतिशत ब्याज सहित वापस लेकर अमृत योजना-2.0 के फंड में जमा कराने के निर्देश देते हुए मामले का निपटारा कर दिया।

संयुक्त समिति को बंद मिले से एसटीपी
एनजीटी के निर्देश पर गठित संयुक्त समिति ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान द प्रास्पेरा में 200 फ्लैट वाले परिसर का एसटीपी बंद मिला और बिना उपचारित सीवेज बाहर खाली प्लाट में जमा हो रहा था। पामक्रेस्ट में एसटीपी बंद था और उसका ओवरफ्लो सड़क किनारे खाली जमीन पर जा रहा था।

प्रियदर्शिनी कालोनी में भी सीवेज नेटवर्क को सेप्टिक टैंक से कनेक्ट नहीं पाया गया और सीवेज खाली प्लाटों में जमा था। पिंक सिटी में भी सेप्टिक टैंक खराब हालत में मिला और सीवेज खाली प्लाटों में जमा पाया गया।

इस पर अधिकरण ने नगर निगम को संबंधित कालोनियों को मुख्य सीवेज लाइन से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। जहां सीवेज लाइन उपलब्ध नहीं है, वहां टैंकर या सक्शन सिस्टम से सेप्टिक टैंक खाली कर सीवेज का उचित उपचार कराने को कहा है।

तीन महीने में सीवेज कनेक्शन नहीं किया गया तो राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति नगर निगम को भरनी होगी।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button