राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग का खतरा, कांग्रेस ने बढ़ाई विधायकों की बाड़ेबंदी, हरियाणा, ओडिशा और बिहार की घटनाओं के बाद टेंशन

भोपाल
मध्य प्रदेश में जून 2026 को खाली होने वाली राज्यसभा सीटों पर अप्रैल मई में चुनाव होने की संभावना है। इससे पहले राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। वर्तमान में इन सीटों पर डॉ सुमेर सिंह सोलंकी (भाजपा), जॉर्ज कुरियन (भाजपा) और दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) सांसद हैं।
कांग्रेस को क्यों सता रहा डर?
कांग्रेस पार्टी को इस चुनाव से पहले अपने ही विधायकों की क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। हाल ही में हरियाणा, बिहार और ओडिशा में हुए राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग के उदाहरण सामने आए हैं, जिससे पार्टी सतर्क हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इसी आशंका के चलते कांग्रेस अपने विधायकों की “बाड़ेबंदी” (रिसॉर्ट पॉलिटिक्स) की तैयारी में है, ताकि किसी तरह की टूट-फूट से बचा जा सके।
किन विधायकों पर संशय?
कांग्रेस के पास फिलहाल 65 विधायक हैं, लेकिन निर्मला सप्रे को लेकर स्थिति साफ नहीं है। निर्मला सप्रे लगातार भाजपा के कार्यक्रमों में नजर आ रही हैं। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोटिंग नहीं कर सकते। इसके अलावा पार्टी को आशंका है कि 5–6 विधायक भाजपा के संपर्क में आ सकते हैं।
क्या कहता है चुनावी गणित?
230 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 65। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। इस हिसाब से भाजपा को 2 सीट और कांग्रेस को 1 सीट मिलना तय माना जा रहा है।
कहां फंस सकता है पेंच?
सियासी समीकरण तब बिगड़ सकते हैं, अगर कांग्रेस के कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर दें या अनुपस्थित रहें। खासकर अगर निर्मला सप्रे भाजपा के पक्ष में जाती हैं और अन्य 5–6 विधायक भी टूटते हैं, तो कांग्रेस अपनी तय मानी जा रही एक सीट भी गंवा सकती है।
पार्टी का दावा
कांग्रेस नेता पीसी शर्मा का कहना है कि सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हालांकि अंदरखाने चल रही हलचल ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी दावा किया है कि पार्टी में सबकुछ ठीक है और सभी विधायक एकजुट है।
संगठन को धार देने की तैयारी, जिला स्तर पर शुरू किया विस्तार
दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस ने संगठन विस्तार की प्रक्रिया तेज कर दी है। लंबे इंतजार के बाद अब जिला कार्यकारिणी की घोषणा शुरू हो गई है और नवरात्र के अंदर अधिकांश जिलों में नई टीम सामने आ जाएगी। दो दिन तक चली मंथन बैठक में संगठन को मजबूत करने की रणनीति तय हुई। इसके तुरंत बाद जिला कार्यकारिणी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि अब देरी बर्दाश्त नहीं होगी।
लंबे समय से लटका था मामला
जिला अध्यक्षों की नियुक्ति तो पहले ही हो चुकी थी, लेकिन कार्यकारिणी घोषित न होने से सवाल उठ रहे थे। कुछ जिलों में सूची जारी हुई भी, लेकिन पदों की संख्या ज्यादा होने पर उन्हें निरस्त करना पड़ा। अब नई गाइडलाइन के तहत संतुलित टीम बनाई जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नवरात्रि के भीतर अधिकांश जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। इसे आगामी चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। जबलपुर ग्रामीण, श्योपुर, कटनी शहर और बड़वानी जिलों की नई कार्यकारिणी घोषित की जा चुकी है। ये नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर की गई हैं।
AICC की गाइडलाइन के मुताबिक गठन
बड़े जिलों में अधिकतम 51 सदस्य
छोटे जिलों में 31 सदस्य की सीमा तय
इसी मानक के अनुसार नई कार्यकारिणियां तैयार की जा रही हैं।
जमीनी स्तर पर भी संगठन मजबूत
संगठन विस्तार के तहत 88 नगर अध्यक्ष और 21 मंडल अध्यक्षों की भी नियुक्ति की गई है। इसका मकसद बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करना है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। उनका फोकस बूथ स्तर पर नेटवर्क मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर है।



