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The Insiders: आईपीएस की जोड़ी दिल्ली चली, फंड की कमी तो वसूली के रेट दोगुने, बड़े साहब खुद ही बन गए ‘चारण’

द इनसाइडर्स में इस बार पढ़िए मध्यप्रदेश में यूपी-बिहार से आकर बसे अफसरों की डिकोडिंग

कुलदीप सिंगोरिया@9926510865
भोपाल | अब हम ‘प्रवासी पक्षी और खानाबदोश’ सीरीज के अंतिम पड़ाव पर आ पहुंचे हैं। LAST BUT NOT LEAST यानी उत्तर प्रदेश और बिहार। ये मध्य प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य हैं, क्योंकि यहाँ से न केवल सबसे ज्यादा IAS, IPS और IFS अधिकारी आते हैं, बल्कि MP PSC के जरिए भी छोटी-बड़ी पोस्टों पर बहुत बड़ी तादाद में ‘खानाबदोश’ (प्रवासी) आते हैं। मजेदार बात यह है कि गंगा, चंबल, यमुना और सोनभद्र पार करके आने का यह सिलसिला आजादी के बाद का नहीं है, बल्कि अविभाजित मध्य प्रदेश में कोल माइंस, भेल और रेलवे आदि के माध्यम से भी बहुत सारे प्रवासी आए और यहीं के होकर बस गए। इतना ही नहीं, यहाँ के प्रवासी पक्षी तो मुख्यमंत्री तक बने। यानी इनकी प्रतिभा और प्रभाव को जानना बेहद जरूरी है। इस अंक में फिलहाल ‘पैदाइशी’ परिचय। मोटे तौर पर 120 लोकसभा सीटों और कई बड़े देशों से भी अधिक आबादी वाले ये दो प्रदेश अपने भीतर नालंदा, काशी संस्कृत विश्वविद्यालय, BHU, AMU, गया, ताजमहल और पाटलिपुत्र जैसी ऐतिहासिकता समेटे हुए हैं। ये राज्य पूरे देश को अनेक विचारक, प्रधानमंत्री और ‘बाल्टी भर-भर के’ अधिकारी देते हैं।

नदी किनारे सभ्यता के विकास के उदाहरण हैं ये दोनों राज्य— उपजाऊ भूमि से भरपूर। झारखंड अलग होने के बाद ये जंगलों, खदानों और परती भूमि से विहीन जरूर हुए, लेकिन फसलों के अलावा यहाँ ‘इंसानों’ की भी अच्छी पैदावार रही है। जनसंख्या विस्फोट ही यहाँ की समस्याओं और पलायन का मुख्य कारण बना। यहाँ के लोगों के स्वभाव और संघर्ष (सर्वाइवल) की ताकत का जिक्र अगले अंक में करेंगे। बाकी यह बात गौर करने लायक है— “पहाड़ मेहनत सिखाते हैं, रेगिस्तान संघर्ष सिखाता है, जंगल प्रकृति से मिलाते हैं, समंदर अध्यात्म सिखाता है… और उपजाऊ भूमि ‘राजनीति’ पैदा करती है।” तो चलिए, शुरू करते हैं चुटीले और गुदगुदाने वाले अंदाज में आज का ‘द इनसाइडर्स’

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वीरगाथा काल: जब साहब खुद ही चारणबन गए

यूपीएससी में हिंदी साहित्य लेने वाले उम्मीदवारों को पता होगा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने आदिकाल को ‘वीरगाथा काल’ क्यों कहा था। तब दरबारी कवि (चारण) राजाओं की वीरता के झूठे-सच्चे किस्से लिखते थे। आज उस परंपरा ने चाटूकारिता का रूप ले लिया है। लेकिन हमारे बड़े साहब को दूसरों से अपनी तारीफ सुनना पसंद नहीं, वे स्वावलंबी हैं; इसलिए अपनी ‘दिल्ली वाली वीरगाथा’ खुद ही सुनाने लगते हैं। आलम यह है कि सचिवालय के वरिष्ठ सचिव अब बैठकों में आधा घंटा ‘वीरगाथा श्रवण’ के लिए अलग से रखने लगे हैं। फिर भी साहब का मन नहीं भरता, मीटिंग दो-दो घंटे खिंच जाती है। अंत में साहब ज्ञान देते हैं— तुम लोग मेहनत करते तो इतना वक्त न लगता, खामखा मेरा समय जाया कर दिया।” अब साहब को कौन समझाए कि वक्त फाइलों ने नहीं, उनकी यादों ने खाया है!

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आईपीएस पति-पत्नी भी करेंगे दिल्ली की सैर

पुलिस महकमे में अजीब सी अदला-बदली चल रही है। सीनियर अफसर भोपाल लौट रहे हैं, तो जूनियर आईपीएस दिल्ली की प्रदूषित हवा में अपना ‘करियर’ ढूंढ रहे हैं। इस होड़ में एक पावर कपल (पति-पत्नी दोनों आईपीएस) भी दिल्ली कूच कर रहा है। नर्मदा किनारे वाले जिलों में एसपी रह चुका यह जोड़ा जल्द ही रिलीव होगा। वहीं, दतिया में आईजी से उलझकर हटाए गए एक अन्य साहब भी दिल्ली जा रहे हैं, जहाँ उनकी पत्नी पहले से तैनात हैं। साहब को दिल्ली ऐसी भाई कि अब वे रिटायरमेंट के बाद ही लौटेंगे। लोग कह रहे हैं कि साहब की प्रतिभा को ‘भोपाली बाबू’ नहीं पहचान पाए, लेकिन ‘दिल्ली वाले जौहरी’ ने असली हीरा परख ही लिया।

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अंगूर की बेटी से दोस्ती में अस्पताल संचालक ने पाया आयुष्मान

पिछले हफ्ते हमने स्वास्थ्य विभाग की ‘महक’ बताई थी, जिस पर अब एक मीडिया हाउस का स्टिंग ऑपरेशन भी आ गया। स्टिंग में जो ‘रेट’ खुले, उसने हमारे इनसाइडर्स को भी फेल कर दिया; वसूली उम्मीद से दोगुनी निकली! इसमें एक अस्पताल संचालक पुराना खिलाड़ी है और बीजेपी में गोडसे को महाने बताने वाली पूर्व सांसद का करीबी रहा है। संचालक ने संगठन के एक ‘पूर्व प्रभारी’ को भी अंगूर की बेटी यानी सुरा व सुंदरी के जरिए वश में कर रखा था। इसलिए गोरखधंधे पर कभी आंच नहीं आई। अब जब कैमरे में कैद भी हो गए हैं तो लेकिन कार्रवाई के नाम पर क्या हुआ? पीए और संविदा कर्मियों पर गाज गिराकर नेताओं ने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। सवाल यह है कि क्या कोई पीए अपने ‘साहब’ की मर्जी के बिना इतना बड़ा गोरखधंधा कर सकता है? पर क्या करें, ब्रांड आईएएस नाम की छांव इतनी घनी है कि साहब का बाल भी बांका नहीं हुआ।

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एक अनार, सौ बीमार: दिल्ली भी और प्रदेश भी!

आईएएस अफसरों के लिए केंद्र में सचिव बनने हेतु दिल्ली की ‘देहरी’ लांघना जरूरी है। लेकिन कुछ शातिर अफसर ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे’ वाली जुगत में हैं। प्रदेश में जनगणना निदेशक जैसी 3-4 ऐसी पोस्ट हैं, जहाँ पदस्थापना केंद्र की होती है पर रहना भोपाल में ही पड़ता है। जनगणना का नोटिफिकेशन होते ही इस ‘लूप लाइन’ मानी जाने वाली पोस्ट के लिए होड़ मच गई है। हर कोई चाहता है कि दिल्ली की नौकरी भी हो जाए और शहर भी न छूटे। फिलहाल ‘एक अनार, सौ बीमार’ वाले हालात हैं, इसलिए फैसला अटका हुआ है।

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अफसर नीरो की तरह बांसुरी बजा रहे

कुछ अफसरों की हालत उस कंजूस जैसी है, जो निचोड़े हुए नींबू से भी ‘बेशर्मी’ की अंतिम बूंद निकालने की कोशिश में है। ये वो लोग हैं जो सूखी हड्डियों से रस निकाल लेते हैं। एक बोर्ड में जब फंड आना बंद हुआ, तो एक जूनियर अफसर ने गरीबों की जेब पर डाका डाल दिया। जिस मंडी-बाजार से गरीब ठेले वाले सब्जी-अनाज लेते हैं, वहां के रेट सीधे डबल कर दिए गए। हालांकि पुराने रेट वाली पर्ची महीने में सिर्फ एक दिन ही कटती है, पर वसूली नए रेट पर रोजाना होती है। यह ‘लूट मॉडल’ पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है और यहां के सर्वेसर्वा वाले साहब रोम जलता देख नीरो की तरह बांसुरी बजा रहे हैं।

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बदनामी के डर से दे दी माफी

किस्सा पुराना पर मौजू है। बड़े साहब चीते देखने ‘कूनो’ पहुँचे थे। वापसी में सोचा कि ग्रामीण विकास का जायजा लिया जाए। लैपटॉप पर ऐसी लोकेशन चुनी गई जहाँ ‘ऑल इज वेल’ था। पर जैसे ही गांव पहुँचे, पैरों तले जमीन खिसक गई— न ट्यूबवेल था, न पाइपलाइन। साहब का जायका ऐसा बिगड़ा कि सीधे भोपाल प्रस्थान कर गए। गुस्सा तो बहुत आया, पर सबको यह सोचकर माफ कर दिया कि कार्रवाई की तो नया बखेड़ा खड़ा होगा। और बात सिस्टम पर आएगी तो जवाब तो उन्हें ही देना होगा। गौरतलब है कि बड़े साहब ‘सभी कलेक्टर्स को भ्रष्ट’ कहने के बाद गॉसिपों के बाजार में सबके चहेते बन गए हैं।

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आईएएस को बनना है जॉन अब्राहम

जिम कल्चर का असर अब ब्यूरोक्रेसी पर भी है। बुंदेलखंड के एक जिला पंचायत सीईओ साहब को फिल्म स्टार जॉन अब्राहम बनने का शौक चढ़ा है। वे जिम में इतना पसीना बहाते हैं कि उसकी भरपाई के लिए पंचायतों को निचोड़ देते हैं। जिम के शौक में साहब इतने खोए कि ऑफिस में नया सभागार तो बनवा दिया (जिसमें अध्यक्ष के साथ मिलकर वारे-न्यारे अलग किए), पर पार्किंग बनाना ही भूल गए। अब वह आलीशान हॉल धूल खा रहा है। साहब की बॉडी वाला जलाल देखकर लड़कियां भले ही फिदा हों, पर पंचायतों का दम निकल रहा है। बता दें कि आइपीएस में भी एक ऐसे ही अफसर सोशल मीडिया पर बहुत प्रसिद्ध हैं। शायद साहब की प्रेरणा वहीं अफसर हो। पर साहब को याद दिला दें कि बाडी-शाडी के चक्कर में परिवार बसाना न भूलें।

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प्रोफेसरों के भरोसे प्रशासनिक दक्षता

प्रशासकों की भर्ती करने वाले संस्थान  में अलग ही ‘टशन’ है। प्रशासनिक अफसरों के पद खाली क्या हुए, वहां बॉटनी, इकोनॉमिक्स और गणित के प्रोफेसरों ने कमान संभाल ली है। अब ये प्रोफेसर तय कर रहे हैं कि भविष्य के कलेक्टर कौन होंगे। गलियारों में जुमला है कि— “अफसर अब प्रशासन नहीं सिखाएंगे, बल्कि जनता को जीव-जंतुओं की तरह ‘सर्वाइवल’ सिखाएंगे।” यानी विकास जाए तेल लेने, बस जिंदा रहना सीख लो!

खाकी का जलवा और वकील की जासूसी

ग्वालियर में खाकी ने एक बार फिर वकील से मुंह की खाई है। एक सीनियर एसपी साहब को वकील साहब से पुरानी अदावत निकालने की सूझी। वकील की जासूसी के लिए जवानों को ‘बॉडी वार्म कैमरों’ के साथ पीछे लगा दिया। वकील साहब भी पुराने खिलाड़ी निकले; वे जवानों को लेकर हाईकोर्ट बेंच में घूमने लगे। जब बेंच की नजर इन ‘कैमराधारी’ जवानों पर पड़ी, तो न केवल कैमरे जब्त हुए बल्कि अब साक्ष्य भी पक्के हो गए हैं। अब साहब को कोर्ट की ऐसी फटकार लगेगी कि सारा ‘जासूसी’ का भूत उतर जाएगा।

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तीन आईएएस ने रायता फैला रोकी वापसी

पानी से जुड़े एक विभाग के एक पूर्व इंजीनियर साहब अब ‘शहरों वाले विभाग’ में वापसी की तैयारी में हैं। 65 की उम्र में भी नौकरी की ऐसी भूख कि तीन-तीन सीनियर आईएएस की चयन समिति भी बेबस है। चर्चा है कि इंजीनियर साहब का ‘माल’ पिछले एक साल से श्यामला हिल्स के एक मंदिर में चढ़ावे के रूप में पड़ा है। अब मंदिर का आशीर्वाद (और सेटिंग) ऐसी है कि आईएएस की तिकड़ी भी उनके सलेक्शन के लिए मजबूर है। लेकिन…लेकिन….लेकिन। आईएएस भी कहां कम पड़ते हैं। उन्होंने भी एक आदेश निकालते हुए रायता फैला दिया। लिख दिया कि चयन योग्य कोई नहीं है, इसलिए फिलहाल भर्ती को रद्दे किया जाता है। अब चढ़ावा कब प्रसाद बनता है, इसका इंतजार इंजीनियर साहिब के लिए लंबा हो गया है।

प्रवासी पक्षी सीरिज के पिछले सातों अंक पढ़ें 
पहला अंक पढ़ें – दलित महिला आईएएस ने पूछा- हमें कलेक्टर क्यों नहीं बनाया? चैटजीपीटी से नकल करने पर पड़ी डांट, मंत्री जी फिर चकमा खा गए

दूसरा अंक पढ़ें : द इनसाइडर्स : जूनियर IAS दोषी, सीनियर ने मलाई काटी; कलेक्टर ने कहा- मैं काबिल नहीं हूं

तीसरा अंक पढ़ें : The Insiders: जैन साहब करवा देंगे आपका हर काम, अफसर को याद आई अपनी औकात, पीएस-कलेक्टर उलटे पांव क्यों लौटे

चौथा अंक पढ़ें – The Insiders: बिहार चुनाव छोड़ आईएएस ने की कोलकाता की घुमक्कड़ी, अफसर की बदजुबानी से थर्राए कर्मचारी, मैडम का फायर फाइटर अवतार

पांचवां अंक पढ़ें The Insiders: IPS के ससुर के लिए व्यापारी से भिड़ी कमिश्नर, महिला IAS मिला नजराना, गुप्त खाते का नया राजकुमार कौन?

छटवां अंक पढ़ें : The Insiders: कार पलटी के बाद कमिश्नर की चुप्पी, आईपीएस की जांच में फिर क्वेरी का कांटा, एसीएस मैडम ने आईएएस की खोली पोल, बेनामी निवेश में मंत्री की सांस अटकी, धुंधकारी का पद रिसेप्शन से पहले गायब

सातवां अंक पढ़ें  The Insiders: निधि पर मेहरबान हुए सीनियर आईएएस, सांसद जी की टंगड़ी समझ नहीं पाए एमडी, बड़े साहब को करना पड़ा निकम्मे आईएएस का काम

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