Trending

The Insiders: कमीशनखोरी के अमृत से भागीरथ की गंगा विषैली, आईपीएस की खजुराहो यात्रा में दलाल की जुगलबंदी, रोटी की ज्वाला में आईएएस झुलसी

द इनसाइडर्स में इस बार पढ़ें इंदौर के भागीरथपुरा की घटना की इनसाइड स्टोरी पार्ट टू

कुलदीप सिंगोरिया | 9926510865
भोपाल | वैदिक ऋषियों ने अथर्ववेद के प्रथम कांड के छठे सूक्त में प्रार्थना की थी— “शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये”
(हे दिव्य जल, तुम हमारी तृप्ति के लिए सुखकारी और आरोग्यप्रद हो)। लेकिन आज के सुल्तानों और उनके वजीरों ने इसी आरोग्य को मृत्यु का पर्याय बना दिया है। भागीरथपुरा की गंगा को मैला कर देने के बाद अब पूरे प्रदेश में पानी के सैंपलों की जांच का एक ‘ढोंग’ रचा गया, ताकि सुर्खियाँ बटोरी जा सकें।

दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे ने कहा था— “जब आप लंबे समय तक रसातल को देखते हैं, तो रसातल भी आपको देखने लगता है।” आज सिस्टम उसी रसातल में खड़ा है। जानबूझकर सिर्फ सतही स्तर पर मौजूदा पदस्थ दो-चार छोटे अफसरों पर कार्रवाई की गई और, हमेशा की तरह, असली जिम्मेदारों की फाइल को अंटार्कटिका के बर्फीले पहाड़ों में दबा दिया गया। ‘द इनसाइडर्स’ की टीम इन्हीं पहाड़ों के बर्फीले तूफानों के बीच से फाइल की कुछ कतरनें आपके सामने रख रही है।

शहरीकरण के बढ़ते बोझ और दरकते इंफ्रास्ट्रक्चर को चमचमाने के नाम पर, वर्ष 2006 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने जेएनएनयूआरएम लॉन्च किया। बाद में मोदी सरकार ने इस स्कीम को बंद कर अमृत-1 और वर्ष 2022 में अमृत-2 लेकर आई। कागजों में अरबों रुपये बहाए गए, ताकि पानी और सीवेज का इंतजाम हो सके। भागीरथपुरा का प्रोजेक्ट भी इसी अमृत-2 की फाइलों में दर्ज था। लेकिन श्यामला हिल्स, वल्लभ भवन और पालिका भवन के दफ्तरों में डीपीआर और टेंडर की बहु-स्तरीय मंजूरी में ही दो साल से ज्यादा का वक्त सिर्फ इसलिए जाया कर दिया गया, क्योंकि कमीशन का हिस्सा अधिकतम बटोरना था। मंत्री हों या प्रमुख सचिव, कमिश्नर हों या संचालनालय के निचले स्तर के इंजीनियर—लालच के आगे सब किंकर्तव्यविमूढ़ दिखाई पड़े। सबकी नजर इसी पर टिकी थी कि कमीशन के रेट कैसे और ऊँचे रखे जाएँ। नतीजा यह हुआ कि फाइलें अटकाई गईं, भटकाई गईं। सुल्तान न बन पाने के गम में बैठे माननीय ने साफ फरमान सुना दिया—
“ठेका तो हमारे भियाओं की पसंद का ही मिलेगा।”
उधर अफसर, सुल्तान का वरदहस्त लेकर, अपनी ही मनमानी चलाते रहे। यहां तक कि बड़े साहब भी सीधी भर्ती के आईएएस से प्रेम वाले भाव में ट्रांसफर-पोस्टिंग में व्यस्त रहे। यह जिम्मेदारी क्यों नहीं तय होनी चाहिए कि जल्दी-जल्दी इंदौर नगर निगम में तबादले क्यों हुए? क्यों नौसिखिए आईएएस अफसरों को यहां तैनात किया गया? जब मौत का तांडव हुआ और जनता की चीखें वल्लभ भवन की दीवारों से टकराने लगीं, तब सत्ता ने आजमाया हुआ नुस्खा फिर से लागू कर दिया। गुस्से का ‘प्रेशर वॉल्व’ थोड़ा-सा खोलकर दो-तीन बलि के बकरे खोजे गए और सस्पेंड कर दिए गए, ताकि रसूखदारों की गर्दन सलामत रहे। कुल जमा बात यह कि पूरे कुएँ में ही भांग घुली हुई है। शायद इस सच को पढ़कर आपकी ‘भक्ति-भाव’ की चिरनिद्रा टूटे। नहीं तो सत्ताधीशों में भागीरथ की गंगा को दूषित करने का यह दुस्साहस यूँ ही कायम रहेगा। हम मध्यप्रदेश के वासी हैं, इसलिए माँ नर्मदा की प्रार्थना करते हुए भागीरथपुरा के उन दिवंगतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं—

सबिंदु सिन्धु सुस्खल तरंग भंग रंजितम
द्विषत्सु पाप जात जात कारि वारि संयुतम
कृतान्त दूत काल भुत भीति हारि वर्मदे
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे

और अब शुरू करते हैं ‘द इनसाइडर्स’ के आज के अंक में अफसरों की कमीशनखोरी के वे अनसुने किस्से, जो सत्ता के बंद कमरों में लिखे गए…

पिछला अंक पढ़ें – The Insiders: भागीरथ पुरा की गंगा को गटर में बदलने वाले IAS अफसर का दंभ, SSP को मिला अनोखा बर्थडे विश

हम नहीं सुधरेंगे…

भागीरथपुरा के हादसे और जल की महत्ता पर हम ऊपर चर्चा कर ही चुके हैं। लेकिन साहब, हमारे सिस्टम के ‘साहबों’ के लिए जल जीवन नहीं, बल्कि साक्षात ‘लक्ष्मी’ है। आलम यह है कि प्रदेश के 36 प्रतिशत गांवों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है, फिर भी अफसरों और इंजीनियरों की लार मेंटेनेंस के नाम पर मिलने वाले ‘कमीशन’ को देखकर टपक रही है। हाल ही में एक ‘बड़े साहब’ की अध्यक्षता में हाई-लेवल मीटिंग हुई। चर्चा के दौरान हमारे ‘धुंधकारी भैया’ की जुबान से फूल बरसे। पहले मेंटेनेंस के नाम कलेस्टर के लिए 100-100 गांवों को रखने का प्रजेंटेशन दिया। बड़े साहब का पारा उनके इस हवा-हवाई प्रजेंटेशन से सातवें आसमान पर पहुंच गया। फिर भी धुंधकारी भैया नहीं रुके और सच बोल दिया कि गांवों में सरपंच व सचिव स्कीम ट्रांसफर के नाम पर एक-एक लाख रुपए मांग रहे हैं। इस पर धन प्रबंधन देखने वाले प्रमुख सचिव ने ऐसी फटकार लगाई कि सन्नाटा खिंच गया। उन्होंने दो टूक पूछा— “क्या इंजीनियर बिना कमीशन के काम करते हैं?” मामला बिगड़ता देख ‘हरि’ को अपनी योग-निद्रा से बाहर आना पड़ा और बीच-बचाव कर बड़े साहब का गुस्सा शांत किया। पर साहब, सच तो यह है कि कमीशन का तीर कमान से निकल चुका था और उसकी गूंज अब तक वल्लभ भवन में सुनाई दे रही है।

यह अंक पढ़ें – The Insiders: निधि पर मेहरबान हुए सीनियर आईएएस, सांसद जी की टंगड़ी समझ नहीं पाए एमडी, बड़े साहब को करना पड़ा निकम्मे आईएएस का काम

आईपीएस की दलाल के साथ जुगलबंदी

किस्सा एक ‘बड़े’ आईपीएस साहब का है, जिन्हें खजुराहो में एक माननीय जज साहब के पारिवारिक विवाह कार्यक्रम में हाजिरी लगानी थी। दिलचस्प बात यह कि जज साहब ने उन्हें सीधे न्योता नहीं दिया था; बल्कि उनके एक परिचित ने नंबर बढ़ाने के चक्कर में साहब को आमंत्रण भेज दिया। आईपीएस साहब ने सोचा— ‘कभी न कभी जज साहब से काम पड़ ही सकता है’, और बना लिया खजुराहो का टूर। अब मुसीबत यह कि फील्ड पोस्टिंग तो है नहीं, तो शाही सवारी और यात्रा का जुगाड़ कौन करे? लिहाजा, एक ‘मंझे हुए दलाल’ की सेवाएं ली गईं। यह दलाल कोई मामूली खिलाड़ी नहीं है, इसके पूज्य पिताजी व्यापमं कांड के नामी आरोपी रह चुके हैं। खैर, आईपीएस साहब उस दलाल की लग्जरी गाड़ी में सवार होकर खजुराहो रवाना हुए। रास्ते में खान-पान और विलासिता के जो इंतजाम दलाल महोदय ने किए, उनकी चर्चा अब तक महकमे में है। चर्चा इस बात की भी है कि साहब इस ‘अहसान’ की किश्त कैसे चुकाएंगे? वैसे बता दें, साहब आजकल उन संस्थाओं में पदस्थ हैं जो पूर्व और वर्तमान पुलिस अफसरों के घरों में ‘रसोइयों और नौकरों’ का इंतजाम करती हैं।

IAS पर आधारित योग: कर्मसु कौशलम विशेष श्रृंखला पढ़ें – द इनसाइडर्स : ऑफिस चैंबर से रिश्वत के 9 लाख गायब, 15 लाख रुपए में हो रहा ट्रांसफर का सौदा, शाहनामा के जरिए बने बड़े कप्तान साहब

मौत के बाद भी ‘हम्माल सेवा’ का सम्मान नहीं

कहते हैं मौत सब बराबर कर देती है, लेकिन आईएएस बिरादरी में ऐसा नहीं है। हाल ही में एक रिटायर आईएएस का निधन हुआ। ये साहब मूलतः राज्य हम्माल सेवा (प्रशासनिक) से आए थे। शिष्टाचार और सेवा भाव ऐसा कि अपनी पूरी नौकरी काल के दौरान उन्होंने ‘सीधी भर्ती’ वाले (RR) साहबों की जी-जान से ‘हम्माल सेवा’ की। उनके निधन पर आईएएस अफसरों के व्हाट्सएप ग्रुप में श्रद्धांजलि का दौर चला। आरआर वाले सीनियर साहबों ने दो शब्द लिखे तो सही, लेकिन इतनी मर्यादा भी नहीं रखी कि दिवंगत के नाम के आगे ‘श्री’ या ‘जी’ लगा दें। इस रूखेपन ने कई प्रमोटी आईएएस अफसरों का दर्द हरा कर दिया। उनका दबी जुबान में कहना है कि साहब, कम से कम मौत के बाद तो यह ‘प्रमोटी बनाम आरआर’ का भेद मिटा दिया होता!

यह  किस्सा पढ़ें – The Insiders: आईएएस ने सजा में मिली कलेक्टरी को आनंद में बदला, सीनियर आईएएस 900 चूहे खाकर दिल्ली जाएंगे, राजधानी में चौपाया मीट का अनूठा आयोजन

सुल्तान VS बड़े साहब

नए साल के आगाज पर इस बार ‘सुल्तान’ ने कोई खास उत्साह नहीं दिखाया। न बधाई के संदेश, न बुके का लेन-देन। इसके ठीक उलट, ‘बड़े साहब’ ने पहले ही दिन मीटिंग का मोर्चा खोल दिया। कहने को तो यह मीटिंग थी, पर असल में यह ‘मेल-मुलाकात’ का एक सोची-समझी बहाना था। साहब ने सबको जम कर बधाइयां दीं, फूलों का आदान-प्रदान हुआ और माहौल को हास्य-बोध से हल्का रखा। इसी बीच बड़े साहब ने एक मार्के की बात कह दी— “अगर निगेटिव खबर गलत हो, तो उचित कार्रवाई जरूर करें।” इस पर वहां मौजूद कुछ ‘लोकतंत्र के प्रहरियों’ ने धीरे से बुदबुदाया— “साहब, पॉजिटिव खबर अगर गलत (फेक) हो, तो भी वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए।” अब देखना यह है कि साहब का यह स्टैंड कहीं वाकई कायम रहता है या फिर सिर्फ दिखाने के लिए था।

यह अंक भी पढ़ें – The Insiders: कार पलटी के बाद कमिश्नर की चुप्पी, आईपीएस की जांच में फिर क्वेरी का कांटा, एसीएस मैडम ने आईएएस की खोली पोल, बेनामी निवेश में मंत्री की सांस अटकी, धुंधकारी का पद रिसेप्शन से पहले गायब

राज्य हम्माल सेवा सीरिज का पहला अंक भी पढ़ें – द इनसाइडर्स: मंत्री के बंगले पर ताला लगाने का अनोखा राज, आईपीएस ने हुस्न की सजा भुगती और मैडम सिखा रही पुलिस को योग

पूर्व गृहमंत्री की कातरता और ‘घंटा मंत्री’ की मुस्कान

सियासी गलियारों में दो मुलाकातों के फोटो और वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। पहली मुलाकात ‘घंटा’ वाले मंत्री जी की उस कद्दावर मंत्री से हुई जो नर्मदा परिक्रमा के बाद सीनियरिटी का झंडा बुलंद किए हुए हैं। दोनों ही सुल्तान से ‘खफा’ बताए जाते हैं, लेकिन वीडियो में दोनों की मुस्कान ऐसी नैसर्गिक थी कि राजनीतिक पंडितों के कान खड़े हो गए। यह मुस्कान किसी अलिखित समझौते की ओर इशारा कर रही है। दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री (जो अब दिल्ली में मंत्री हैं) और पूर्व गृहमंत्री की मुलाकात हुई। चुनाव हारने के बाद से नेपथ्य में गए पूर्व गृहमंत्री के चेहरे पर जो ‘कातर भाव’ दिखा, उसने बहुत कुछ कह दिया। कभी पूर्व मुख्यमंत्री के बराबर का रसूख रखने वाले मंत्री जी आज इतने ‘बेचारे’ क्यों दिख रहे हैं? शायद कुर्सी जाने का गम और भविष्य की अनिश्चितता चेहरे पर उभर आई है।

प्रवासी पक्षी सीरिज का पहला अंक पढ़ें – दलित महिला आईएएस ने पूछा- हमें कलेक्टर क्यों नहीं बनाया? चैटजीपीटी से नकल करने पर पड़ी डांट, मंत्री जी फिर चकमा खा गए

भावान्तर से उपजा नकली वैराग्य

डॉक्टर साहब की ‘भावान्तर योजना’ भले ही कागजों पर सफल रही हो, लेकिन उसने कृषि संबंधी संस्था का खजाना ऐसा साफ किया कि अब संस्था के ‘भाव’ ही बदल गए हैं। इस संस्था के वित्त से जुड़े एक साहब का किस्सा बड़ा रंगीन है। ‘WWW’ (वेल्थ, वाइन और वूमन) के शौकीन ये साहब आजकल अचानक ‘वैराग्य’ का स्वांग रच रहे हैं। आजकल उनका मन ‘संघ’ की राजनीति में ज्यादा लग रहा है। सुना है कि संघ के आईएएस अध्यक्ष की कुर्सी डोल रही है और साहब की नजर उसी पर टिकी है। खुद के खर्चों के लिए तो उन्होंने पत्नी के नाम पर पेट्रोल पंप का इंतजाम पहले ही कर लिया है, लेकिन अंदरूनी खबर यह है कि वैराग्य की आड़ में वे किसी ‘मलाईदार’ विभाग की फिराक में हैं। हालांकि, वर्तमान जगह पर भी उन्होंने मलाई खाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

यह अंक पढ़ें – द इनसाइडर्स: मंत्री जी का डिजिटल लोकतंत्र, आईपीएस की सीआर न लिख पाने से एसीएस मैडम भनभनाई, एमडी साहब की आड़ में नया वसूली मंत्र

फॉरवर्ड मैसेज से आईएएस को बचाने की कवायद

बात संघ की निकली है, तो बता दें कि संरक्षक के पद पर बैठे एक सीनियर रिटायर आईएएस साहब अपने ही संवर्गीय अधिकारी को ‘पापों’ से बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने आईएएस ग्रुप में उस विवादित अधिकारी के पक्ष में एक ‘फॉरवर्डेड मैसेज’ क्या डाला, विरोधियों ने मोर्चा खोल दिया। विपक्षी संघ के अध्यक्ष ने तुरंत सवाल दाग दिया कि इस ग्रुप में ऐसे मैसेज डालने का क्या तुक है? हमारा तो यही कहना है कि साहबों, आपस में ‘वर्ग-वर्ग’ खेलना बंद करें और थोड़ा ध्यान उस जनता के काम पर भी दें जिसके टैक्स से आपकी तनख्वाह आती है।

चुगली श्रृंखला पर विशेष अंक पढ़ें – द इनसाइडर्स: मंत्री के विशेष सहायक के पांच ड्राइंग रूम का राज, आईएएस ने कांवड़ यात्रा में धोए पाप, मामा नहीं बने गजनी

ज्वलंत ज्वाला में काजल भी भस्म

पश्चिमी निमाड़ के एक जिले में दो महिला आईएएस अधिकारी आमने-सामने हैं। एक तरफ कलेक्टर मैडम हैं जो जिले की बिगड़ी व्यवस्था सुधारने के लिए दिन-रात एक कर रही हैं, तो दूसरी ओर एक ऐसी आईएएस अफसर हैं जो अपनी ‘ज्वाला’ से उन कोशिशों को भस्म करने पर आमादा हैं। मजे की बात यह है कि कलेक्टर मैडम अपनी ही अधीनस्थ की जांचों को दबा रही हैं ताकि ‘संतुलन’ बना रहे। जबकि सीईओ साहिबा के ऊपर 10 लाख का रिश्वत कांड, रोटी मेकर, वाशिंग मशीन और पलंग खरीदी में भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। लोकायुक्त में भी उनकी भूमिका संदिग्ध है, लेकिन ‘मैडम’ का वरदहस्त उन्हें बचाए हुए है।

IPS की सत्यमेव जयते सीरिज की विशेष श्रृंखला पढ़ें : द इनसाइडर्स: कलेक्टर बेटी के ब्याह के लिए सर्किट हाउस में पूजा कर रही मां, दुशासन का कुशासन राज, सुलेमानी ताकत से छिटकने लगे पैंसेठिए

खर्चा करेंगे तभी तो कमीशन मिलेगा!

आप सबको पता है कि 1 जनवरी से जनगणना के चलते प्रशासनिक सीमाएं ‘सील’ कर दी गई हैं। न नए जिले बनेंगे, न नई तहसील। अब सवाल यह है कि सीमाओं के पुनर्गठन के लिए जो ‘आयोग’ बना है, वह अब क्या करेगा? वहां दो रिटायर आईएएस हैं, भारी-भरकम स्टाफ है, चमचमाती गाड़ियां हैं और लाखों के रूटीन खर्चे। जब दो साल तक सीमाएं बदलनी ही नहीं हैं, तो इस आयोग को भंग क्यों नहीं किया जाता? कुतर्क दिया जा रहा है कि आयोग दो साल तक ‘तैयारी’ करेगा। साहब, पिछले डेढ़ साल से क्या हो रहा था? लेकिन जैसा कि हम कहते हैं— पूरे कुएं में ही भांग घुली है। जब तक खर्च नहीं होगा, तब तक ‘कमीशन’ का पहिया कैसे घूमेगा? इसलिए जनता की गाढ़ी कमाई फुंकती रहेगी और आयोग की गाड़ियां दौड़ती रहेंगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button