द इनसाइडर्स: बड़ी मैडम के रिटायरमेंट से पहले पूर्व आईपीएस पति को जमीन के मामले में क्लीन चिट, पूर्व आईएएस ने 225 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी

द इनसाइडर्स में इस बार पढ़िए रसूखदारों की काली कमाई को ठिकाने लगाने वाली जमीनों से जुड़े चटपटे किस्से और खबरें...

कुलदीप सिंगोरिया | जर, जोरू और जमीन के किस्से आपने बहुत सुने होंगे। इसलिए, यह तीनों शब्द कहावत के रूप में इस्तेमाल होने लगे। फिलहाल अभी बात रसूखदारों यानी हमारे ब्यूरोक्रेट और नेताओं की करते हैं। इनकी पूरी जिंदगी ही जर, जोरू के साथ जमीन के इर्द गिर्द घूमती है। आज के द इनसाइडर्स के अंक में जमीन से जुड़े इनके किस्से आपको चटखारे वाले अंदाज में बताएंगे। सबसे पहले सीनियर मोस्ट से शुरूआत करते हैं…

रिटायरमेंट से पहले जांच तेज होने का राज क्या है?

बड़ी मैडम का रिटायरमेंट का वक्त नजदीक आ गया है। लिहाजा, अंतिम ओवर की बल्लेबाजी शुरू हो चुकी है। ताजी खबर यह है कि बड़ी मैडम के पति जो कि पूर्व आईपीएस अफसर हैं। वे भी उनका साथ देने या बहती गंगा में हाथ धोने दूसरे छोर से बल्लेबाजी करने आ गए हैं। साल 2022 में उनके दिन अच्छे नहीं चल रहे थे। तब जंगल महकमे ने सीहोर जिले की उनकी एक जमीन पर अपना दावा ठोकते हुए नोटिस दे दिया था। साहब के हो हल्ले के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब जंगल महकमे ने इस फाइल को ढूंढ़कर उसमें बाघ के पैर लगा दिए हैं। फाइल बाघ की तरह अफसरों के सामने दहाड़ रही है और काले कारनामों पर सफेदा पुतवा रही है। जंगल के अफसरों को ताकीद दी गई है कि अगले दो महीने के भीतर जांच को खत्म कर क्लीन चिट दी जाए। सही भी है, अभी पावर में है तो मामले को सुलटाने में ही अक्लमंदी है।

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पूर्व बड़े साहब पंजाब की कंपनी के नाम खरीद रहे जमीन

पूर्व बड़े साहब से आप भली-भांति परिचित होंगे। और नए अफसर तो और भी अच्छे से। जब तक सत्ता में थे, तब तक इनका ‘इकबाल’ ऐसा बुलंद था कि लोग दुबक कर चुहों के बिल में घुस जाया करते थे। इन साहब के जमीन प्रेम पर हम पहले भी बता चुके हैं। अब आते हैं हमारे इनसाइडर की बताई इनसे जुड़ी धांसू खबर पर। पता चला है कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी खटाखट-खटाखट कर रहे थे, तब साहब ने राजधानी के तीन इलाकों में धड़ाधड़- धड़ाधड़ जमीनें खरीद डाली। यह जमीनें पंजाब की कंपनियों के नाम पर खरीदी गई है। इन्हीं में से एक डील करीब 225 करोड़ रुपए की है। हमें लगता है कि कुछ महीनों पहले शायद इनके बंगले पर कथित तौर पर ईडी की टीम आने की एक वजह यह भी हो। हालांकि साहब के रसूख के चलते ईडी बैरंग लौट गई। लेकिन कड़ियां तो अब जुड़ने ही लगी हैं।

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कांग्रेस में भी यादव जी गुल खिलाएंगे?

देश में यादवों का जलवा तो आप विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में देख ही चुके हैं। क्या सत्ता पक्ष और क्या विपक्ष, सब यादवमय हो गया। और प्रदेश में पहली बार अफसरशाही में भी यादव शक्ति का सूत्रपात हुआ है। इन सब बातों को चलते कांग्रेस के एक बड़े नेता भी अपनी यादव शक्ति आलाकमान को दिखा रहे हैं। वे प्रदेश में नेतृत्व बदलने के लिए लगातार दिल्ली में सक्रिय हैं। उनका तर्क है कि जैसे बीजेपी ने यादव नेतृत्व उभारा है, वैसे ही कांग्रेस भी उनको मौका दे। द इनसाइडर्स प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को आगाह कर रहा है कि अपनी कुर्सी पर छा रहे संकट के बादलों को अपनी आंधी से उड़ा दें।

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सीनियर आईएएस की जुबान ने फिर आग उगली, इस बार अपने ही बन गए शिकार

विपश्यना वाले सीनियर आईएएस अफसर आपको याद ही होंगे। न हो तो इनकी छुरी की तरह चलती जुबान के किस्से गूगल कर लीजिए। ‘सामान्य’ से विभाग को असामान्य करने वाले इस सीनियर अफसर का हाल ही का किस्सा एक इनसाइडर ने हमसे साझा किया। हुआ यूं कि साहब एक मीटिंग ले रहे थे। रिमझिम बारिश से मौसम रूमानी था। ऐसे माहौल में भी साहब ने आव देखा न ताव – अपने ही खास आईएएस अफसर को कहा- तुम मोटे हो और बीमार रहते हो! क्या खाक काम करोगे? अपनी लानत-मलानत होते देख अफसर रुआंसा हो गया। फिर भी, साहब को दया न आई। एक वक्त था जब यह आईएएस अफसर कलेक्टर थे तो यही साहब उन्हें शाबासी देते थे। लेकिन अब जब साथ में काम कर रहे हैं तो उनकी इज्जत तार-तार कर दी।

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मंत्री ने जी अपने सिपहसलार को राजधानी भेजा, पर स्थानीय विधायकों ने खोल दी पोल

ट्रक-डंपर आदि से अवैध वसूली बंद होने पर अपनी कमाई जारी रखने के लिए एक मंत्री जी ने अपने खास सिपहसलार को राजधानी का जिम्मा दे दिया। यह सिपहसलार पहले मंत्री जी के इलाके में पदस्थ थे। मंत्री जी को बताया गया कि राजधानी में मोटा माल मिलेगा। इस लालच में उन्होंने स्थानीय संगठन को नजरअंदाज कर इस सिपहसलार की पोस्टिंग कर दी। सिपहसलार ने भी आते ही चौके-छक्के लगाने शुरू कर दिए। धुआंधार बैटिंग के चक्कर में वे भूल गए कि जिन्हें उनके लिए हटाया गया है, वे बदला जरूर लेंगे। सालों से जमे पुराने अफसर ने पहले तो एक वीडियो वायरल कराया और फिर पुराने संबंधों की दुहाई देकर स्थानीय विधायकों को अपने साथ कर लिया। विधायकों ने सिपहसलार पर भ्रष्टाचारी होने का आरोप लगा कर मंत्री को आफत में डाल दिया है। अब मंत्री जी से न निगलते बन रही और न उगलते। बता दें कि यह मंत्री जी पहले कांग्रेस से सांसद थे, फिर बीजेपी से सांसद बने थे। जिस कद्दावर नेता ने मंत्रीजी को पहली बार कांग्रेस से सांसद का टिकट दिलवाया था, वह भी बीजेपी में आ चुके हैं।

कलेक्टर ने कहा तुम्हारी औकात नहीं, फिर इंजीनियर ने दिखा दी औकात

धार्मिक नगरी वाले एक जिले के कलेक्टर की औकात से वहां के धार्मिक लोग भली-भांति परिचित हो रहे हैं। इसी औकात का एक किस्सा सुनिए। कलेक्टर साहब कलेक्टरी करने जब इस जिले में पहुंचे तो पानी से संबंधित विभाग के गेस्ट हाउस में रहने लगे। इस गेस्ट हाउस का जिम्मा जिस इंजीनियर पर था, उसने साहब की दिन-रात सेवा की। आखिर में जब कलेक्टर साहब अपने बंगले में शिफ्ट हुए तो उन्होंने पलटी मार ली। कलेक्टर साहब का लगा कि इस विभाग में ज्यादा कमाई है, इसलिए इंजीनियर पर दबाव बढ़ा दिया गया। इंजीनियर सीधा-साधा और रीढ़ की हड्‌डी वाला था। उसकी हड्‌डी ने झुकने से इनकार दिया तो साहब ने इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया। हो होल्ला मचा तो ऊपर से दबाव आया। दूसरी सेवा से आईएएस में प्रमोट हुए और मीठी वाणी वाले संभागायुक्त साहब ने इंजीनियर से चिकनी-चुपड़ी बातें की। कहा कि मैं तुम्हें बहाल कर देता हूं। इंजीनियर ने कहा कि आप लोगों की औकात जान गया हूं। कृपया मेरी चिंता छोड़ दीजिए और कलेक्टर साहब से कहिए कि उनकी औकात की चिंता करें।

 

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