The Insiders: तीसरी शादी वाले IAS ने छोड़ा सरकारी बंगला; 5 रुपये के लिए ‘फूडी’ साहब ने डिलीवरी बॉय को लताड़ा; ‘स्त्री’ के साथ ‘सरकटा’ की वसूली और कलेक्टर मैडम भूलीं नेताओं की औकात!
द इनसाइडर्स में पढ़ें नौकरशाहों और रसूखदारों के रोचक किस्से
कुलदीप सिंगोरिया@9926510865
भोपाल | न कोई प्रस्तावना, न कोई भूमिका और न ही कोई नई सीरीज। वजह? बस कुछ वक्त का विराम! लेकिन ‘द इनसाइडर्स’ के चटपटे किस्से हाजिर हैं, अपने उसी पुराने और गुदगुदाने वाले अंदाज में… तो पढ़िए और लीजिए भरपूर चटखारे!
कैसिनोवा ने छोड़ा सरकारी बंगला
“इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते।” हमारे एक ‘कैसिनोवा’ मिजाज वाले आईएएस साहब इन दिनों अपनी तीसरी शादी को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। साहब ने अब सरकारी बंगला छोड़ दिया है और एक प्राइवेट कॉलोनी में ‘शरण’ ले ली है। तर्क दिया जा रहा है कि वहां ‘प्राइवेसी’ ज्यादा है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी तीनों पत्नियां आईएएस हैं—ऐसा ‘हैट्रिक’ वाला कारनामा करने वाले वे देश के इकलौते आईएएस होंगे। शायद साहब को डर है कि सरकारी बंगले की दीवारें कहीं उनके नए वैवाहिक जीवन के राज न उगल दें, इसीलिए अब वे “दुनिया से दूर, प्राइवेसी में चूर” होकर रह रहे हैं।
पिछला अंक पढ़ें : द इनसाइडर्स: रात 9 बजे वसूली पर निकलती है ‘स्त्री’, 2 किलो दाल-चावल की सुरक्षा में डटे रहे विधायकगण, आईएएस मैडम का इंतकाम
स्त्री के साथ ‘सिरकटा‘ भी वसूली में शामिल!
पिछले अंक में हमने बताया था कि एक जिले की सीएमएचओ (CHHO) मैडम ‘स्त्री’ फिल्म की भूतनी की तरह रात 9 बजे के बाद वसूली पर निकलती हैं। अब खबर आई है कि ‘स्त्री 2’ की तरह इस खेल में ‘सिरकटा’ की भी एंट्री हो गई है। जिले के सिविल सर्जन महोदय अब ‘सिरकटा’ बनकर आधी रात को मैडम के साथ वसूली अभियान में शामिल हो रहे हैं। इस ‘भूतिया जोड़ी’ ने पूरे स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल फील्ड में ऐसी दहशत फैलाई है कि डॉक्टर अब “ओ मैडम, ओ साहब… कल आना” का जाप कर रहे हैं। विभाग की साख का तो भट्ठा बैठ ही गया है, साथ ही बेगुनाह कर्मचारी भी इस वसूली तंत्र में पिस रहे हैं।
5 रुपये के लिए भड़के साहब: खाने के शौकीन आईएएस की ‘छोटी‘ सोच
नर्मदा किनारे वाले एक जिले में पदस्थ एक आईएएस साहब का खाना-पीना ही उनका ‘धर्म-कर्म’ बन गया है। साहब दिन भर ऑनलाइन ऑर्डर करते रहते हैं, लेकिन हाल ही में जो हुआ उसे सुनकर “अंधेर नगरी चौपट राजा” की याद आ गई। साहब ने कुछ मंगवाया, गार्ड ने ऑर्डर लिया, लेकिन उसमें 5 रुपये कम निकले। साहब इस ‘विशाल’ घाटे पर ऐसे भड़के कि बेचारे गार्ड की शामत आ गई। गार्ड ने भागकर डिलीवरी बॉय को वापस बुलाया और साहब के लिए वो 5 रुपये वसूले। चर्चा है कि साहब का ध्यान फाइलों के बजाय नए-नए व्यंजनों पर ज्यादा रहता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर एक मातहत ने साहब को ‘स्वाद’ चखाकर उनसे ऊलजलूल आदेश निकलवा लिए हैं और जिला पंचायत के कर्मचारियों से ‘सस्पेंड और ट्रांसफर’ का डर दिखाकर जमकर वसूली कर रहा है।
एसीएस साहब का ‘घुमक्कड़‘ शौक: जूनियर परेशान, साहब की चकरी गतिमान
एक एसीएस (ACS) साहब जब से सुरक्षा विभाग में आए हैं, उनके पैरों में जैसे चकरी लग गई है। साहब को घूमने-फिरने का इतना शौक है कि वे अक्सर छुट्टी लेकर निकल जाते हैं, लेकिन पीछे जूनियर अधिकारियों की सांसें अटकी रहती हैं। पहले भी जब साहब इस विभाग के प्रभार में थे, तब वे यहाँ काम करने के अनिच्छुक थे, पर सरकार ने उन्हें स्थायी कर दिया। जब वे ‘घूमा-फिरी’ वाले विभाग में थे, तब तो सरकारी दौरों में शौक पूरा हो जाता था, लेकिन अब सुरक्षा की जिम्मेदारी के बीच साहब का यह शौक अधीनस्थों के लिए “गले की हड्डी” बन गया है।
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रेरा में ‘दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पी रहा‘
रेरा (RERA) अध्यक्ष एपी श्रीवास्तव का कार्यकाल फरवरी में खत्म हो गया, तब से यह पद खाली है। एक वक्त था जब सरकार उन्हें हटाने के लिए इतनी उतावली थी कि असंवैधानिक आदेश तक जारी कर दिए थे। ईओडब्ल्यू (EOW) की जांच भी बिठाई गई, पर कुछ हासिल नहीं हुआ। अब जब वे विदा हो गए हैं, तो सरकार में नए अध्यक्ष के लिए कोई ‘अधीरता’ नहीं दिख रही। शायद पुराने विवादों ने सरकार को डरा दिया है, इसीलिए “दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है” वाली कहावत यहाँ सटीक बैठ रही है। दावेदार तो कई हैं, लेकिन सरकार फूँक-फूँक कर कदम रख रही है। संभावित नामों का खुलासा हम अगले अंक में करेंगे।
कलेक्टर मैडम की प्रशासनिक नासमझी: ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया‘
एक कलेक्टर मैडम इन दिनों चर्चा में हैं क्योंकि उन्हें नेताओं की ‘औकात’ का अंदाजा ही नहीं लगा। पहले महिला जिला पंचायत अध्यक्ष से विवाद हुआ, जिन्होंने कलेक्ट्रेट पर धरना दे दिया। इसके बाद एक तथाकथित समाज के नेता के किसानों वाले धरने को मैडम ने इतना ‘वेजेट’ दे दिया कि पूरे शहर में भारी बैरिकेडिंग करवा दी। कई दौर की मीटिंग्स हुईं, मीडिया कवरेज मिला, लेकिन जब प्रदर्शन हुआ तो कुल जमा 50-100 लोग ही पहुंचे। मैडम की इस अति-संवेदनशीलता और प्रशासनिक नासमझी पर लोग अब “खोदा पहाड़, निकली चुहिया” कहकर चटखारे ले रहे हैं।
ईमानदारी की आड़ में इंदौर प्रेम: ठेकेदारों को ‘सब-लेट‘ का फरमान
आर्थिक राजधानी से सटे एक जिले के नगर निगम कमिश्नर का खेल अब राजधानी तक गूंज रहा है। बड़े आयोजन के नाम पर साहब ठेकेदारों को खूब चमका रहे हैं। पहले तो खुद को ‘महा-ईमानदार’ बताया, लेकिन जल्द ही पोल खुल गई कि साहब ‘रूटीन’ का हिस्सा तो लेते ही हैं, साथ ही अब ठेकेदारों पर दबाव बना रहे हैं कि अपना काम इंदौर के खास ठेकेदारों को ‘सब-लेट’ (Sub-let) कर दें। जो नहीं मानता, वह साहब के कोप का भाजन बनता है। साहब, यह इंदौर प्रेम भारी न पड़ जाए, क्योंकि दूषित पानी की मौतों के रिकॉर्ड में आपका नाम भी दर्ज है।
विधायक जी का फरमान: “हमें धन्यवाद दो!”
नर्मदापुरम की एक नगर पालिका में बजट बैठक ठहाकों में तब बदल गई जब विधायक जी ने माइक संभालते ही ‘स्वयं-प्रशंसा’ का पाठ शुरू कर दिया। अध्यक्ष विकास कार्यों की जानकारी दे रहे थे, तभी विधायक जी बोल पड़े— “विकास कार्यों के लिए हमें धन्यवाद दो।” अपनी ही पीठ थपथपाने का यह अंदाज देखकर पार्षद और अधिकारी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। अब सोशल मीडिया पर लोग विधायक जी का ‘विकास’ गिनाकर उन पर जमकर कटाक्ष कर रहे हैं। इसे कहते हैं— “अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना।”
मंत्री जी की जिद और छुट्टी का अदल-बदल
महावीर जयंती की छुट्टी 31 मार्च को तय थी, लेकिन इसे 30 मार्च को करने के लिए जोर-आजमाइश हुई। ‘बड़े साहब’ भी जैन हैं, तो 30 मार्च को छुट्टी शिफ्ट करने में कोई अड़चन नहीं थी। लेकिन ट्विस्ट तब आया जब एक जैन मंत्री जी ने अपने जिले में 31 मार्च को ही छुट्टी चाही। नतीजा यह हुआ कि छुट्टी राज्य स्तर की बजाय जिला स्तर की हो गई। भोपाल में 30 मार्च को छुट्टी मिलने से अफसरों की ‘चांदी’ हो गई, उन्हें एक साथ 4 दिन का लंबा वीकेंड मिल गया।
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दुल्हन है कि मिलती नहीं: तबादला सूची का लंबा इंतजार
आईएएस, आईपीएस और अन्य सेवाओं के अफसरों के लिए तबादला सूची का इंतजार किसी ‘नई दुल्हन’ के इंतजार जैसा हो गया है। तमाम कोशिशों और कयासों के बाद भी “दुल्हन है कि मिलती नहीं।” अप्रैल के पहले हफ्ते की उम्मीद थी, लेकिन अब लग रहा है कि सरकार की इस ‘दुल्हन’ को विदा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। तो साहबों, गुजारिश है कि टकटकी लगाना छोड़िए और मौजूदा काम पर ध्यान दीजिए, क्योंकि यह सूची फिलहाल ‘पेंडिंग’ मोड में है।
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