The Insiders Exclusive: भागीरथपुरा में दो साल पहले गंदे पानी से हुई थी मासूम की मौत, पर IAS मिश्रा ने नहीं बदलवाई पाइपलाइन; इनाम में मिला उज्जैन कमिश्नर का पद
'द इनसाइडर्स' की पड़ताल: दो साल पुरानी चिट्ठी से हुआ बड़ा खुलासा, असली दोषियों को बचाने के लिए नए अफसरों की दी गई बलि।
कुलदीप सिंगोरिया@9926510865
भोपाल/इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल की सप्लाई से अब तक 35 लोगों की जान जा चुकी है। इस त्रासदी के बाद सरकार ने आनन-फानन में इंदौर नगर निगम के इंजीनियरों सहित आईएएस रोहित सिसोनिया को निलंबित कर दिया और निगम कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया। लेकिन ‘द इनसाइडर्स’ के हाथ लगे नए सबूतों से खुलासा हुआ है कि इस मामले में असली दोषियों को बचाया जा रहा है।
आईएएस अभिलाष मिश्रा की लापरवाही पड़ी भारी
द इनसाइडर्स की पड़ताल में सामने आया कि ठीक दो साल पहले भी इसी क्षेत्र में गंदे पानी के कारण एक बच्ची की मौत हुई थी। उस वक्त तत्कालीन अपर आयुक्त (IAS) अभिलाष मिश्रा को इसकी लिखित सूचना दी गई थी, लेकिन उन्होंने उस फाइल पर कार्रवाई करने के बजाय उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। नतीजा यह हुआ कि भागीरथपुरा में हालात बदतर होते गए और आज 35 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इतनी गंभीर लापरवाही के बावजूद सरकार ने मिश्रा पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें उज्जैन नगर निगम का कमिश्नर बना दिया, जबकि महज तीन महीने पहले पद संभालने वाले रोहित सिसोनिया को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं, तब नगर निगम कमिश्नर हर्षिका सिंह थीं।
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महापौर के निर्देश को भी किया अनसुना
‘द इनसाइडर्स’ को मिले एक दस्तावेज में भाजपा पार्षद कमल बाघेला की एक चिट्ठी भी मिली है, जो उन्होंने 8 फरवरी 2024 को महापौर पुष्यमित्र भार्गव को लिखी थी। इस पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि क्षेत्र में गंदे पानी की निरंतर सप्लाई से लोग टाइफाइड, पीलिया और बुखार की चपेट में आ रहे हैं और एक बालिका की मृत्यु भी हो चुकी है। महापौर ने यह पत्र तत्काल कार्रवाई हेतु तत्कालीन अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा को मार्क किया था, जिसका जवाब उन्हें 7 दिनों के भीतर देना था। मिश्रा इसके बाद लगभग डेढ़ साल तक निगम में पदस्थ रहे, लेकिन पाइपलाइन नहीं बदली गई।
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पार्षद की चुप्पी पर भी सवाल
इस मामले में पार्षद कमल बाघेला की भूमिका भी संदेहास्पद है। जनता के दबाव में उन्होंने पत्र तो लिखा, लेकिन उसके बाद कभी इसका फॉलोअप नहीं लिया। जानकारों का मानना है कि यदि वे सक्रियता दिखाते, तो पाइपलाइन पहले ही बदली जा सकती थी। गौरतलब है कि बाघेला वही पार्षद हैं, जो हाल ही में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जुड़े ‘घंटा विवाद’ के दौरान पत्रकारों से उलझने के कारण चर्चा में आए थे।
