सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत: मध्यप्रदेश में 9,000 फार्मेसी सीटों के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तक बढ़ी

ATPI-MP की याचिका पर शीर्ष अदालत का अहम आदेश, PCI और राज्य सरकार ने रिक्त सीटों की पुष्टि की

नई दिल्ली/भोपाल | मध्यप्रदेश के फार्मेसी छात्रों और संस्थानों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेशभर के 150 से अधिक फार्मेसी कॉलेजों में रिक्त पड़ी 9,000 से ज्यादा सीटों को भरने के लिए प्रवेश एवं काउंसलिंग की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की युगल पीठ—न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल चांदुरकर—ने एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल एंड प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस, मध्यप्रदेश (ATPI-MP) की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और राज्य शासन को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या रिक्त सीटों को भरने के लिए काउंसलिंग कैलेंडर में शिथिलता दी जानी चाहिए। विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने ATPI की दलीलों को स्वीकार करते हुए अंतिम आदेश पारित किया। ATPI की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता सिद्धार्थ आर. गुप्ता ने पक्ष रखा, जबकि PCI की ओर से अजय कुमार सिंह ने पैरवी की।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि वर्ष 2014 में पार्श्वनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटल और फार्मेसी जैसे सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि 30 अगस्त तय की थी। हालांकि, इस वर्ष मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उस समय-सीमा को शिथिल करते हुए 30 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था।

इसके बावजूद तीन चरण की काउंसलिंग के बाद भी मध्यप्रदेश में बी.फार्मेसी, डी.फार्मेसी, एम.फार्मेसी एवं अन्य फार्मेसी पाठ्यक्रमों की 9,000 से अधिक सीटें निजी और शासकीय संस्थानों में रिक्त रह गई थीं। इन रिक्त सीटों को लेकर ATPI द्वारा राज्य शासन को पूर्व में पत्र भी लिखे गए थे, जिसके बाद राज्य शासन ने भी PCI को काउंसलिंग तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया था। हालांकि PCI ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया।

फलस्वरूप ATPI ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन से आधिकारिक आंकड़े मांगे, जिस पर राज्य सरकार और PCI दोनों ने यह स्वीकार किया कि प्रदेशभर में भारी संख्या में सीटें रिक्त हैं और उन्हें काउंसलिंग के माध्यम से भरना आवश्यक है।

ATPI की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष PCI द्वारा मान्यता देने की अंतिम तिथि 15 नवंबर तक बढ़ा दी थी, लेकिन प्रवेश और काउंसलिंग की समय-सीमा 30 अक्टूबर तक ही सीमित रखी गई। इसके कारण 30 अक्टूबर के बाद मान्यता प्राप्त करने वाले 15 से 20 फार्मेसी संस्थानों को एक भी दिन प्रवेश का अवसर नहीं मिल पाया। इन संस्थानों की सूची न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई।

PCI के अधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि प्रवेश की अंतिम तिथि तय करना मुख्यतः राज्य शासन का विषय है और यदि राज्य सरकार की रुचि हो तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे बढ़ाया जा सकता है। सभी पक्षों की दलीलों और विस्तृत सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चालू शैक्षणिक सत्र के लिए फार्मेसी पाठ्यक्रमों में प्रवेश एवं काउंसलिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 कर दी। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल इसी सत्र के लिए लागू होगा और भविष्य के सत्रों के लिए इसे मिसाल के रूप में नहीं लिया जाएगा।

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