स्कूलों में अब मिलेगा हुनर प्रशिक्षण, यूपी बोर्ड ने किया बड़ा बदलाव

लखनऊ
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव करने की घोषणा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, यूपी बोर्ड अब कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल एजुकेशन) को अनिवार्य बनाने जा रहा है। यह नया नियम शैक्षणिक सत्र 2026 से प्रभावी होगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें प्रैक्टिकल स्किल्स में निपुण बनाना है ताकि वे भविष्य में रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
क्या है नया शैक्षणिक ढांचा?
यूपी बोर्ड के नए प्रस्ताव के अनुसार, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के सिलेबस में वोकेशनल सब्जेक्ट को शामिल किया जाएगा।
कक्षा 9वीं: छात्रों को अपनी नियमित पढ़ाई के साथ एक वोकेशनल सब्जेक्ट का चुनाव करना होगा। यह विषय उनके कौशल विकास की नींव रखेगा।
कक्षा 11वीं: इंटरमीडिएट स्तर पर छात्र अपनी रुचि के अनुसार विशेष ट्रेड या कौशल का चयन कर सकेंगे, जिससे उन्हें विशेषज्ञता हासिल करने में मदद मिलेगी।
छात्रों को मिलेंगे कई विकल्प
बोर्ड ने वोकेशनल एजुकेशन के तहत विषयों की एक लिस्ट तैयार करने की योजना बनाई है। इसमें आधुनिक समय की जरूरतों को देखते हुए इन क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है:
आईटी और डिजिटल साक्षरता
स्वास्थ्य सेवा
कृषि और जैविक खेती
इलेक्ट्रॉनिक्स और मरम्मत
टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी
इन विषयों के जुड़ने से छात्रों को यह फायदा होगा कि यदि वे किसी कारणवश उच्च शिक्षा जारी नहीं रख पाते हैं, तो भी उनके पास अपने पैरों पर खड़े होने के लिए आवश्यक हुनर होगा।
मूल्यांकन और क्रेडिट सिस्टम
यूपी बोर्ड इस बदलाव के साथ-साथ ग्रेडिंग और क्रेडिट सिस्टम में भी सुधार करेगा। वोकेशनल सब्जेक्ट के अंक अब मार्कशीट का हिस्सा होंगे। स्कूलों में इसके लिए विशेष लैब और वर्कशॉप स्थापित किए जाएंगे ताकि छात्र केवल थ्योरी न पढ़ें, बल्कि हाथ से काम करके सीखें।
अध्यापकों का प्रशिक्षण और कार्यान्वयन
इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिए यूपी बोर्ड शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित करेगा। इसके अलावा, बोर्ड विभिन्न उद्योगों और विशेषज्ञों के साथ गठबंधन करने पर विचार कर रहा है, ताकि छात्रों को वास्तविक कार्य वातावरण का अनुभव मिल सके।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों की प्रतिभा को सही दिशा मिलेगी और राज्य में 'कौशल विकास' के अभियान को नई गति प्राप्त होगी।


