ईरान की नई चाल: होर्मुज स्ट्रेट पर जहाजों से वसूली, EU और अरब देशों का विरोध

तेहरान 

मध्य पूर्व में जंग थमने के बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसने पूरी दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है. मामला है होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाने का, जिसे ईरान ने लागू करने का संकेत दिया है. आज पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान की बातचीत में इस मुद्दे को खासा तवज्जो दिया जा सकता है। 

दरअसल, अमेरिका और इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते को लगभग बंद कर दिया था. ईरान का कहना था कि स्ट्रेट को सिर्फ "दुश्मनों" के लिए बंद किया गया है. हालांकि, अब दो हफ्तों के सीजफायर के तहत इसे दोबारा खोला गया है, लेकिन ईरान इसे पूरी तरह मुफ्त में खोलने के पक्ष में नहीं है। 

ईरान का कहना है कि वह जहाजों से टोल वसूल कर युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करना चाहता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर जहाज से 20 लाख डॉलर तक वसूले जा सकते हैं, जबकि कुछ जगहों पर प्रति बैरल तेल पर एक डॉलर तक चार्ज करने की बात भी सामने आई है. खास बात यह है कि भुगतान क्रिप्टोकरेंसी या चीनी मुद्रा युआन में लेने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। 

यूरोपीय यूनियन ने ईरान के टोल प्रस्ताव का किया विरोध
इस फैसले का सबसे बड़ा विरोध यूरोपीय यूनियन ने किया है. ईयू का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के मुताबिक किसी प्राकृतिक समुद्री रास्ते पर टोल नहीं लगाया जा सकता. इसी तरह यूनाइटेड अरब अमीरात ने भी कड़ा विरोध जताते हुए कहा, "इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का किसी भी तरह हथियार के रूप में इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता. स्ट्रेट को पूरी तरह और बिना किसी शर्त खोला जाना चाहिए। 

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख थोड़ा अलग नजर आ रहा है. उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान मिलकर इस टोल सिस्टम को "जॉइंट वेंचर" के रूप में चला सकते हैं. हालांकि व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि अभी इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका चाहता है कि स्ट्रेट बिना किसी रुकावट के तुरंत खोला जाए। 

होर्मुज स्ट्रेट पर टोल टैक्स को लेकर ओमान की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले में ओमान की भी भूमिका बेहद अहम हो सकती है, क्योंकि यह देश भी होर्मुज स्ट्रेट के किनारे स्थित है. कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ईरान और ओमान मिलकर एक ऐसा सिस्टम बना सकते हैं, जिससे जहाजों को गुजरने की अनुमति मिले और ईरान को राजस्व भी हासिल हो। 

अगर ऐसा होता है, तो अनुमान है कि ईरान को हर साल 70 से 90 अरब डॉलर तक की कमाई हो सकती है. यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञ इसे ईरान के लिए "न्यूक्लियर प्रोग्राम से भी ज्यादा अहम" मान रहे हैं। 

अरब मुल्कों में भी ईरान के प्रस्ताव पर नाराजगी
हालांकि, खाड़ी देशों में इस मुद्दे पर गहरी नाराजगी है. सऊदी अरब, कतर, कुवैत और अन्य देशों का मानना है कि ईरान को इस तरह समुद्री रास्ते पर नियंत्रण नहीं देना चाहिए. उनका कहना है कि इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है। 

मसलन, होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का सबसे संवेदनशील केंद्र बन चुका है. आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या दुनिया इस टोल सिस्टम को स्वीकार करती है या फिर विवाद और गहरा होकर नया तनाव पैदा होता है। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button