खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन का शिकंजा, अधिकारियों ने दुकानों की जांच की

मुंगेली.
जिले में यूरिया की निर्धारित कीमत से अधिक दर पर बिक्री की शिकायतों को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की है. कलेक्टर कुंदन कुमार और जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पांडेय के निर्देश पर एसडीएम अजय शतरंज, उप संचालक कृषि और नायब तहसीलदार की संयुक्त टीम ने जिला मुख्यालय के विभिन्न निजी कृषि केंद्रों पर औचक निरीक्षण किया. जांच के दौरान सुपर एजेंसी, पंजाब एजेंसी, कैलाश ट्रेडर्स और शक्ति माई कृषि केंद्र सहित कई दुकानों में पहुंचकर अधिकारियों ने मौके पर मौजूद किसानों से सीधे बातचीत की.
यूरिया की वास्तविक बिक्री दर, उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर विस्तार से जानकारी ली गई, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने लाई जा सके. सरकार के मुताबिक खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित किया गया है। वर्तमान में राज्य के गोदामों और समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जिससे शुरुआती जरूरतों को पूरा करने की तैयारी है। हाल ही में हुई वर्चुअल बैठक में विभिन्न राज्यों में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई। इस दौरान छत्तीसगढ़ की स्थिति भी साझा की गई, जिसमें बताया गया कि राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार राज्य को आवंटित कुल उर्वरकों में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी शामिल हैं। वहीं 30 मार्च 2026 की स्थिति में उपलब्ध स्टॉक में भी इन सभी उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, जिससे किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया गया है। संभावित कमी की स्थिति से निपटने के लिए सरकार किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रेरित कर रही है। इसके तहत जैविक खाद, हरी खाद और नैनो उर्वरकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही सहकारी समितियों और निजी विक्रय केंद्रों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य में जल्द ही ई-उर्वरक वितरण प्रणाली लागू करने की तैयारी है। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए किसानों को उनके पंजीकृत रकबे के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे अनियमितता पर रोक लगेगी। इसके अलावा कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों को सक्रिय किया जा रहा है। किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।



