जूस की दुकान से 200 करोड़ की शादी तक, सौरभ चंद्राकर की अकूत संपत्ति का ED ने खोला राज

- फर्जी पासपोर्ट से इंडोनेशिया में छिपा था सौरभ चंद्राकर, अजंता मेंडिस के नाम पर बनवाए दस्तावेज
- जूस की दुकान से 200 करोड़ की शादी तक, सौरभ चंद्राकर की अकूत संपत्ति का ED ने खोला राज
- महादेव सट्टा ऐप के सौरभ चंद्राकर का फर्जी पासपोर्ट कनेक्शन, विदेश में छिपने के लिए अपनाई नई पहचान
रायपुर / नई दिल्ली
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले के आरोपी सौरभ चंद्राकर के पास से इंडोनेशिया में जारी फर्जी पासपोर्ट मिला है. यह पासपोर्ट अजंता मेंडिस (Ajanta Mendis) के नाम पर जारी किया गया था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ ने इस फर्जी पहचान के जरिए अपनी असली पहचान छिपाकर विदेश में रहने की कोशिश की थी. इसी पासपोर्ट के आधार पर जुलाई में ओमान में उसे हिरासत में लिया गया था।
सौरभ चंद्राकर को भारत प्रत्यर्पित कर लिया गया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष टीम उसे रविवार शाम ओमान से भारत लेकर आई. सोमवार को सीबीआई ने उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में जज के कमरे में पेश किया।
6000 करोड़ रुपये के सट्टेबाजी घोटाले का आरोपी
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी सिंडिकेट का प्रमोटर है. उस पर करीब 6000 करोड़ रुपये के अवैध सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले में शामिल होने का आरोप है. वह सीबीआई के दो मामलों में फरार था, जिनमें चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज है।
सीबीआई के मुताबिक, छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर महादेव ऑनलाइन बुक मामले की जांच एजेंसी ने अपने हाथ में ली थी. जांच में सामने आया कि यह देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक था, जिसे भारत के बाहर से चलाया जा रहा था।
रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान में पकड़ा गया
जांच एजेंसियां 2023 से ही सौरभ चंद्राकर की तलाश कर रही थीं. हाल ही में ईडी को उसके ओमान में होने की जानकारी मिली. इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने ओमान के अधिकारियों के साथ संपर्क किया. इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था।
इसके बाद सीबीआई और ईडी ने ओमान को उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजे. इन प्रस्तावों के साथ सौरभ के खिलाफ जुटाए गए सबूत भी साझा किए गए. भारतीय एजेंसियों ने ओमान सरकार और वहां की पुलिस के सहयोग से उसे भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की।
हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी सट्टे की रकम
सीबीआई की जांच में पता चला कि सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था. कई लेनदेन के बाद यह पैसा हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजा जाता था. एजेंसी के मुताबिक, इस रकम का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी देने के लिए भी इस्तेमाल किया गया, ताकि सट्टेबाजी का नेटवर्क बिना रुकावट चलता रहे।
इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है. मार्च में ईडी ने सौरभ चंद्राकर से जुड़े मामले में करीब 1700 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की थी. इसमें दुबई के महंगे इलाकों में मौजूद लग्जरी विला और अपार्टमेंट भी शामिल थे।
साल 2023 में दुबई में हुई सौरभ चंद्राकर की करीब 200 करोड़ रुपये की आलीशान शादी भी चर्चा में रही थी. इस शादी में परिवार के सदस्य प्राइवेट जेट से पहुंचे थे और बॉलीवुड की कई हस्तियां भी मेहमानों में शामिल थीं।
कैसे बनाई इतनी संपत्ति? ED की जांच में खुलासा
महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर पर सट्टे से मिले पैसों को विदेश भेजने, हवाला के जरिए लेन-देन करने और दुबई में बड़ी संपत्तियां बनाने के आरोप हैं। ED के मुताबिक, इस नेटवर्क में हजारों सट्टा पैनल, फर्जी बैंक खाते, हवाला कारोबारी और शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले लोग शामिल थे। जांच में करीब 200 करोड़ रुपये की शादी, दुबई में संपत्तियों और राजनीतिक लोगों तक पैसे पहुंचाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। आपको बता दें कि सौरभ चंद्राकर को ओमान सल्तनत से सफलतापूर्वक प्रत्यर्पण कर भारत ले आया गया है।
भिलाई से शुरू हुआ महादेव सट्टा ऐप का कारोबार
छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले सौरभ चंद्राकर का नाम महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) सट्टा ऐप मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल इस पूरे नेटवर्क के मुख्य संचालक थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने दुबई में बैठकर सट्टे का कारोबार चलाया और इससे मिलने वाले पैसों को भारत और विदेशों में अलग-अलग तरीकों से निवेश किया। ED ने इस मामले में 6 अक्टूबर 2022 को मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। यह मामला छत्तीसगढ़ पुलिस की एक FIR के आधार पर दर्ज किया गया था। जांच में महादेव ऑनलाइन बुक के साथ रेड्डी अन्ना, फेयरप्ले, स्काईएक्सचेंज और लोटस365 जैसे दूसरे सट्टा प्लेटफॉर्म के जुड़ाव की बात भी सामने आई। ED के मुताबिक, महादेव ऐप का नेटवर्क भारत और UAE में करीब 3,200 पैनल के जरिए चलाया जा रहा था। इन पैनल के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, ताश और दूसरे खेलों पर सट्टा लगाया जाता था।
ऐसे चलता था सट्टे का पूरा नेटवर्क
जांच के मुताबिक, दुबई में बैठे मुख्य संचालक पैनल चलाने वाले लोगों को लॉगिन आईडी देते थे। पैनल चलाने के लिए करीब 15 से 20 लाख रुपये तक की शुरुआती रकम देनी पड़ती थी। इसके बाद पैनल संचालक बैंक खाते, मोबाइल फोन, इंटरनेट और कर्मचारियों का इंतजाम करते थे। सट्टा खेलने वाले लोगों से WhatsApp और Telegram के जरिए संपर्क किया जाता था। उन्हें वेबसाइट और ऐप पर पैसे लगाने के लिए कहा जाता था। शुरुआत में बोनस और प्रचार के जरिए लोगों को आकर्षित किया जाता था। ED का आरोप है कि पैनल से होने वाले मुनाफे का 70 से 80 फीसदी हिस्सा दुबई में बैठे मुख्य संचालकों तक पहुंचाया जाता था। हर हफ्ते हिसाब होता था और पैनल चलाने वालों को कमाई का ब्योरा दिया जाता था। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि ऐप को इस तरह चलाया जाता था कि अगर कोई खिलाड़ी बड़ी रकम जीत जाता, तो उसकी यूजर आईडी बंद कर दी जाती थी। इससे उसकी जीती हुई रकम निकालना मुश्किल हो जाता था।
फर्जी खातों और हवाला से विदेश जाता था पैसा
ED की जांच में सामने आया कि सट्टे से मिले पैसों को सीधे मुख्य संचालकों तक पहुंचाने के बजाय कई बैंक खातों से होकर भेजा जाता था। इनमें दूसरे लोगों के नाम पर खोले गए खाते, कमीशन पर लिए गए खाते और धोखे से हासिल किए गए KYC दस्तावेजों के आधार पर खोले गए खाते शामिल होने का आरोप है। जांच के मुताबिक, इन खातों के जरिए पैसों को कई हिस्सों में बांटा जाता था। कुछ रकम नकद निकाली जाती थी और हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी। कुछ पैसे दुबई की कंपनियों और संपत्तियों में लगाए गए, जबकि कुछ रकम भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश के रास्ते पहुंचाई गई।
ED ने महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म से कुल करीब 88 हजार करोड़ से 94 हजार करोड़ रुपये तक की अपराध से जुड़ी कमाई होने का अनुमान लगाया है। इसमें महादेव ऑनलाइन बुक से 75 हजार से 80 हजार करोड़ रुपये, स्काईएक्सचेंज से 11 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये और लोटस365 से करीब 2,400 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान शामिल है।
जूस की दुकान से दुबई की महंगी जिंदगी तक
सौरभ चंद्राकर के परिवार का पहले भिलाई में जूस की दुकान का कारोबार था। यह दुकान 'जूस फैक्ट्री' के नाम से चलती थी। जांच से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, सौरभ भी इस दुकान पर काम करता था और उसे हर महीने करीब 15 हजार रुपये मिलते थे। ED की जांच में आरोप है कि महादेव सट्टा ऐप का कारोबार बढ़ने के बाद सौरभ और उसके साथियों की जिंदगी तेजी से बदल गई। दुबई में महंगे विला, निजी विमान, विदेश यात्राएं और बड़े आयोजनों पर भारी खर्च किया जाने लगा। सौरभ 16 फरवरी 2022 को भारत से बाहर गया था। जांच के मुताबिक, इसके बाद वह दुबई से नेटवर्क चलाने लगा। दुबई की एक निवेश कंपनी के दस्तावेजों में एक विला को उसके रहने की जगह बताया गया था। ED ने यह भी आरोप लगाया है कि सौरभ और उसके साथियों की विदेश यात्राओं, होटलों और अन्य खर्चों का भुगतान सट्टे से मिले पैसों से किया गया।
दुबई में शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप
सौरभ चंद्राकर की शादी फरवरी 2023 में UAE के रास अल खैमाह स्थित वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल में हुई थी। शादी के कार्यक्रम 10 से 14 फरवरी तक चले थे। दुल्हन का नाम हर्षिता बताया गया है। ED की जांच के मुताबिक, शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए। इस आयोजन में मेहमानों को लाने के लिए नागपुर से तीन चार्टर्ड विमान भेजे गए थे। कुछ फिल्मी कलाकारों के लिए भी निजी विमानों का इंतजाम किया गया था। जांच एजेंसी ने शादी के खर्च का हिसाब जुटाने के लिए इवेंट कंपनियों, होटल, ट्रैवल एजेंट और विमान सेवा देने वाली कंपनियों के रिकॉर्ड की जांच की। मुंबई की R-1 Events और YPD Weddings से जुड़े रिकॉर्ड में शादी के आयोजन और भुगतान का ब्योरा सामने आया।
ED के मुताबिक, इवेंट कंपनी के रिकॉर्ड में करीब 112 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज था। होटल पर करीब 42 करोड़ रुपये और मेहमानों के टिकट, होटल तथा वीजा पर करीब 37 करोड़ रुपये खर्च होने का ब्योरा भी जांच में सामने आया। विमान किराये पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी भी दी गई। ये अलग-अलग रिकॉर्ड से निकाले गए आंकड़े हैं। ED ने इन दस्तावेजों और लोगों के बयानों के आधार पर शादी का कुल खर्च करीब 200 करोड़ रुपये आंका है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन भुगतानों का बड़ा हिस्सा नकद और हवाला के जरिए किया गया। शादी के आयोजन से जुड़े कुछ लोगों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई है।
शादी में फिल्मी सितारों की मौजूदगी की भी जांच
शादी में फिल्मी सितारों को बुलाने और उनके कार्यक्रम करने की बात भी ED की जांच में सामने आई। मीडिया रिपोर्ट में विशाल ददलानी, टाइगर श्रॉफ, सनी लियोनी, नेहा कक्कड़ और नुसरत भरूचा सहित कई कलाकारों के नाम आए थे। अक्टूबर 2023 में ED ने महादेव ऐप मामले में कुछ फिल्म और टीवी कलाकारों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था।ED ने रणबीर कपूर, कपिल शर्मा, हुमा कुरैशी, हिना खान और श्रद्धा कपूर को समन भी भेजे थे।
सौरभ के परिवार और करीबियों की भूमिका की जांच
ED की जांच में सौरभ के बड़े भाई गितेश चंद्राकर का नाम भी सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, गितेश दुबई में रहता है और महादेव के साथ रेड्डी अन्ना, लेजर बुक, फेयरप्ले और अंबानी बुक जैसे प्लेटफॉर्म के कामकाज से जुड़ा था। उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। उसके लिए रखी गई करीब 59.5 लाख रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई।
सौरभ के नेटवर्क में रवि उप्पल, विकास छपरिया, शुभम सोनी और अतुल अग्रवाल जैसे लोगों के नाम भी हैं। ED के मुताबिक, रवि उप्पल सौरभ का कारोबारी साथी था। विकास छपरिया पैसों के लेन-देन और शादी के भुगतान से जुड़ा था, जबकि शुभम सोनी पर नेटवर्क के वित्तीय कामकाज और नकदी पहुंचाने वालों से जुड़े होने का आरोप है। जांच एजेंसी का आरोप है कि नेटवर्क के कुछ लोगों ने विदेशी कंपनियों के जरिए पैसा लगाया और कुछ ने भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया। इन आरोपों के आधार पर कई लोगों की संपत्तियां जब्त या अटैच करने की कार्रवाई की गई है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी जांच के घेरे में
महादेव सट्टा ऐप मामले में छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। ED की जांच में आरोप लगाया गया है कि सट्टा नेटवर्क को बिना रुकावट चलाने के लिए कुछ पुलिस अधिकारियों, सरकारी लोगों और राजनीतिक संपर्कों तक पैसा पहुंचाया जाता था। जांच एजेंसी ने इस रकम को 'लायजनिंग मनी' बताया है। ED के अनुसार, पुलिस अधिकारी चंद्रभूषण वर्मा, पैनल संचालक सतीश चंद्राकर और हवाला कारोबार से जुड़े अनिल तथा सुनील दम्मानी के बयानों में पैसों के लेन-देन का जिक्र है। जांच एजेंसी ने इन बयानों और दूसरे दस्तावेजों के आधार पर राजनीतिक लोगों तक पैसे पहुंचने के आरोपों की जांच की है।
2 नवंबर 2023 को रायपुर में असिम दास से जुड़े ठिकानों और वाहन से 5.39 करोड़ रुपये नकद मिलने का दावा किया गया था। ED के मुताबिक, यह रकम कथित तौर पर राजनीतिक लोगों तक पहुंचाई जानी थी। असिम दास ने अपने बयान में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पैसे पहुंचाने की बात कही थी। शुभम सोनी के एक ईमेल में भी राजनीतिक लोगों को भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया था। इन आरोपों के आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने मार्च 2024 में मामला दर्ज किया। बाद में CBI ने दिसंबर 2024 में अपना केस दर्ज किया। भूपेश बघेल का नाम इन मामलों में आरोपी के तौर पर आया है और उनसे जुड़ी जांच जारी है।
ED ने इस मामले में अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच करीब 190 ठिकानों पर तलाशी लेने की जानकारी दी है। ये तलाशी छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार सहित कई जगहों पर हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में नकदी, सोना, गहने, बैंक खाते और शेयर बाजार में किए गए निवेश सहित करीब 2,014 करोड़ रुपये की रकम और संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गईं। अलग-अलग संपत्तियों पर जारी अटैचमेंट आदेशों को मौजूदा बाजार कीमत के आधार पर जोड़ने पर कुल अटैच संपत्ति करीब 3,500 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें लगभग 1,800 करोड़ रुपये की संपत्ति विदेश में और 1,700 करोड़ रुपये की संपत्ति भारत में बताई गई है। दुबई में 22 अचल संपत्तियों का पता चलने की बात भी जांच में सामने आई है। इनमें सौरभ चंद्राकर और उसके करीबियों से जुड़ी 12 संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,500 करोड़ रुपये आंकी गई है।
स्काईएक्सचेंज और अमेरिकी कंपनी खरीदने का मामला
जांच का एक अहम हिस्सा स्काईएक्सचेंज और भारतीय शेयर बाजार में लगाए गए पैसों से जुड़ा है। ED के मुताबिक, स्काईएक्सचेंज के संचालक हरि शंकर तिबरेवाल का सौरभ चंद्राकर के नेटवर्क से कारोबारी संबंध था। जांच एजेंसी का आरोप है कि तिबरेवाल से जुड़ी विदेशी कंपनियों और फंड के जरिए करीब 766 करोड़ रुपये विकास गर्ग की कंपनियों तक पहुंचे। इन पैसों का संबंध अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी Ebix Inc. को खरीदने के लिए किए गए निवेश से जोड़ा गया है। ED ने विकास गर्ग को 14 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। वह न्यायिक हिरासत में है। जांच एजेंसी ने इस मामले में करीब 941 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच करने का आदेश जारी किया। आरोप है कि सट्टे से मिले पैसों को अलग-अलग कंपनियों और निवेश के रास्तों से घुमाकर इस्तेमाल किया गया।
14 लोगों की गिरफ्तारी, कई आरोपी जमानत पर
ED के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक मामले में अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें पुलिस से जुड़े लोग, पैनल संचालक, हवाला कारोबारी, नेटवर्क के मैनेजर और शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले लोग शामिल हैं। गिरफ्तार लोगों में चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, अनिल और सुनील दम्मानी, असिम दास, नितिन तिबरेवाल, नितीश दीवान, गिरीश तलरेजा और विकास गर्ग जैसे नाम शामिल हैं। दस्तावेजों के अनुसार, इनमें से कई लोगों को अलग-अलग अदालतों से जमानत मिल चुकी है, जबकि विकास गर्ग न्यायिक हिरासत में है। ED ने आरोपपत्रों के जरिए कुल 116 आरोपियों को मामले में नामजद करने की जानकारी दी है। जांच एजेंसी का कहना है कि नेटवर्क के विदेश में मौजूद बाकी लोगों, संपत्तियों और पैसों के लेन-देन की जांच जारी है।
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी और आगे की कानूनी कार्रवाई
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ सितंबर 2023 में विशेष PMLA अदालत, रायपुर से गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। नवंबर 2023 में उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस भी जारी किया गया। ED ने पहले UAE से उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी। सौरभ चंद्राकर के खिलाफ ED ने 20 अक्टूबर 2023 को पहली अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। विशेष PMLA अदालत ने 19 जनवरी 2024 को मामले का संज्ञान लिया था। उसके भारत लौटने की स्थिति में उसे मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों का सामना करना होगा।



