नौ दिन का नवरात्र कभी आठ, कभी दस दिन कैसे? समझें तिथियों का धार्मिक रहस्य

Sharadiya Navratri : शारदीय नवरात्र यानी मां दुर्गा की आराधना के नौ दिन। आमतौर पर श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर मां के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन हिंदू पंचांग में तिथियों के फेर के कारण हर साल नवरात्र का क्रम एक जैसा नहीं रहता।

कभी तिथि के क्षय से आठ दिनों में ही पूजा संपन्न हो जाती है, तो कभी तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र दस दिनों तक चलता है। कई बार अष्टमी और नवमी का पूजन एक ही दिन करना पड़ता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि नौ दिनों का पर्व कभी आठ या दस दिनों का कैसे हो जाता है? इसका जवाब चंद्रमा की गति और पंचांग में तिथियों की अवधि में छिपा है।

तिथि के क्षय-वृद्धि से बदलता है पूजा का क्रम
ज्योतिषाचार्य डा. राघव नाथ झा के अनुसार, हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है। इसलिए हर तिथि की अवधि समान नहीं होती।

जब कोई तिथि सूर्योदय के समय नहीं आती और दूसरी तिथि के साथ एक ही दिन में समाहित हो जाती है, तो उसे तिथि का क्षय कहा जाता है।

वहीं, जब कोई तिथि दो सूर्योदय तक बनी रहती है, तो उसकी वृद्धि मानी जाती है। नवरात्र में इसका सीधा असर कलश स्थापना से लेकर अष्टमी, नवमी और विजयादशमी के पूजन क्रम पर पड़ता है। यही वजह है कि अलग-अलग वर्षों में पर्व की अवधि और प्रमुख पूजन तिथियों में अंतर देखने को मिलता है।

2014 और 2021 में एक दिन हुआ संयुक्त पूजन
बीते वर्षों पर नजर डालें तो तिथियों के इस बदलाव के कई उदाहरण मिलते हैं। वर्ष 2014 में नवमी तिथि के क्षय के कारण अष्टमी और नवमी का पूजन एक ही दिन हुआ था।

उस वर्ष 25 सितंबर को कलश स्थापना हुई और तीन अक्टूबर को विजयादशमी मनाई गई। इसी तरह 2021 में चतुर्थी तिथि के क्षय के कारण तृतीया और चतुर्थी का पूजन एक ही दिन करना पड़ा।

इस वजह से नवरात्र का पूजा क्रम आठ दिनों में पूरा हुआ। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि धार्मिक अनुष्ठानों की तारीख तय करने में केवल दिनों की सामान्य गिनती नहीं, बल्कि पंचांग में तिथियों की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण होती है।

2016 और 2025 में दस दिनों तक चला नवरात्र
तिथि की वृद्धि भी पर्व की अवधि को प्रभावित करती है। वर्ष 2016 में द्वितीया तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र का क्रम दस दिनों तक चला।

वहीं, 2025 में चतुर्थी तिथि दो दिन पड़ने के कारण नवरात्र दस दिनों का रहा। इसके उलट, जब दो तिथियों का पूजन एक ही दिन करना पड़ता है, तो पूजा के दिन कम हो सकते हैं।

हालांकि, तिथि के क्षय या वृद्धि का अर्थ देवी की आराधना में कमी या बढ़ोतरी नहीं है। इसका संबंध पंचांग के अनुसार व्रत और पूजन की तारीखों के निर्धारण से है।
कभी नौका, कभी हाथी पर देवी के आगमन की मान्यता

नवरात्र में तिथियों के साथ देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। पंचांग और परंपराओं में वार के आधार पर देवी के आगमन और गमन के वाहन का उल्लेख मिलता है।

अलग-अलग वर्षों में हाथी, घोड़ा, नौका और डोली जैसे वाहनों का जिक्र किया जाता है। वर्ष 2018 में देवी के आगमन को नौका से, 2019 में हाथी से और 2020 में घोड़े से जोड़ा गया था।

2021 में डोली पर आगमन की मान्यता रही, जबकि 2022 और 2023 में हाथी तथा 2024 में डोली पर आगमन बताया गया। इन मान्यताओं का संबंध धार्मिक परंपराओं से है, जबकि नवरात्र की अवधि में बदलाव का आधार पंचांग की तिथियां हैं।

अलग-अलग वर्षों में ऐसे बदला नवरात्र का क्रम
वर्ष 2014 से 2025 तक नवरात्र की अवधि और तिथियों में अलग-अलग तरह के बदलाव देखने को मिले। कुछ वर्षों में नौ दिनों का सामान्य क्रम रहा, कुछ में तिथि के क्षय से संयुक्त पूजन हुआ, तो कुछ वर्षों में तिथि की वृद्धि से पूजा दस दिनों तक चली।

इसलिए नवरात्र की सही तिथियों और व्रत के दिन का निर्धारण करने के लिए संबंधित वर्ष का पंचांग देखना जरूरी है। श्रद्धालुओं के लिए यह जानकारी उपयोगी है, क्योंकि इससे अष्टमी, नवमी, कलश स्थापना और विजयादशमी की तारीखों को लेकर होने वाली उलझन दूर हो सकती है।

प्रमुख वर्षों में नवरात्र की अवधि
वर्ष     कलश स्थापना तिथि     पूजन क्रम
2014      25 सितंबर          नवमी तिथि के क्षय से अष्टमी-नवमी का पूजन एक दिन
2015     13 अक्टूबर         नवमी-दशमी के संयोग से पूजन क्रम प्रभावित
2016     1 अक्टूबर           द्वितीया तिथि की वृद्धि से दस दिनों का नवरात्र
2017     21 सितंबर          नौ दिनों का नवरात्र
2018     10 अक्टूबर         द्वितीया के क्षय और पंचमी की वृद्धि का प्रभाव
2019     29 सितंबर          नौ दिनों का नवरात्र
2020     17 अक्टूबर          नौ दिनों का नवरात्र
2021     7 अक्टूबर           चतुर्थी के क्षय से तृतीया-चतुर्थी का संयुक्त पूजन; आठ दिनों का क्रम
2022     26 सितंबर           नौ दिनों का नवरात्र
2023     15 अक्टूबर         नौ दिनों का नवरात्र
2024     3 अक्टूबर             चतुर्थी की वृद्धि और नवमी के क्षय से अष्टमी-नवमी का संयोग
2025     22 सितंबर            चतुर्थी तिथि दो दिन पड़ने से दस दिनों का नवरात्र

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