मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिल्पियों को किया राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार से सम्मानित

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार के तहत उत्कृष्ट शिल्प के लिए चयनित शिल्पियों को सम्मानित किया है। विगत दिनों शिल्पियों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये सम्मान उन शिल्पकारों के हुनर को प्रोत्साहित करने का माध्यम हैं, जो अपनी कला के जरिए मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक शिल्प केवल उत्पाद नहीं हैं, बल्कि पीढ़ियों से हस्तांतरित ज्ञान, कौशल और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। ऐसे में शिल्पियों को सम्मान और प्रोत्साहन देना उनकी कला को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का भी माध्यम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि बुनकरों और शिल्पकारों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ा जा रहा है।

मध्यप्रदेश की समृद्ध हस्तशिल्प एवं हथकरघा परंपरा को सहेजने और इससे जुड़े शिल्पियों के हुनर को नई पहचान देने के लिए राज्य सरकार सम्मान, प्रोत्साहन और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। शिल्पियों के लिए पुरस्कार और प्रोत्साहन के साथ उनके पारंपरिक उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

इन शिल्पियों का हुआ सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2022-23 के पुरस्कारों में गोदना (ब्लॉक) सौंसर साड़ी के लिए श्री रोहित रूसिया को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये, भगवान महाकाल की बाटिक कलाकृति के लिए श्री मो. रफीक छीपा को द्वितीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपये तथा पत्थर शिल्प में ‘गौतम बुद्ध’ कृति के लिए श्री सतीश विश्वकर्मा को तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपये प्रदान किए। श्रीमती दीपा अहिरवार, श्री तानसिंह और श्री हरीश धवन को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में 15-15 हजार रुपये प्रदान किए गये। इस अवसर पर कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री दिलीप जायसवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे

डिजिटल कॉमर्स से वैश्विक बाजार तक पहुंच

शिल्पियों को आधुनिक बाजार और डिजिटल कॉमर्स से जोड़ने के लिए ‘ODOP मार्ट’ और ‘द मृगनयनी’ वेब पोर्टल जैसी पहल की गई है। इन डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य प्रदेश के शिल्पियों और उनके उत्पादों को ऑनलाइन बाजार उपलब्ध कराना तथा उन्हें व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाना है।

डिजिटल माध्यम उस शिल्पकार के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है, जिसकी कला उत्कृष्ट होने के बावजूद बाजार तक पहुंच सीमित रहती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पारंपरिक हस्तशिल्प और हाथकरघा उत्पादों को प्रदेश और देश के साथ वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के अवसर बढ़ेंगे।

हुनर के संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर

शिल्पियों के हुनर को सम्मान और बाजार उपलब्ध कराने की पहल का उद्देश्य केवल पारंपरिक कलाओं का संरक्षण करना नहीं, बल्कि शिल्पकारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना भी है। बेहतर बाजार, डिजिटल पहुंच और प्रोत्साहन से शिल्पकार अपने कौशल को आजीविका के अधिक सशक्त माध्यम में बदल सकेंगे।

हर जिले के हुनर को मिल रहा मंच

एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) के माध्यम से मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों और स्थानीय हुनर को पहचान और बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों के उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित कर स्थानीय शिल्पकारों और उत्पादकों को नए बाजारों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

स्थानीय शिल्प को ई-कॉमर्स से जोड़ने से शिल्पकारों की आजीविका को मजबूत करने और उनके उत्पादों की मांग बढ़ाने के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे पारंपरिक कला को संरक्षण मिलने के साथ ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

मध्यप्रदेश की हस्तशिल्प और हाथकरघा परंपरा में छिपी विविधता और रचनात्मकता को नई पहचान देने के साथ इन कलाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में यह प्रयास महत्वपूर्ण हैं। शिल्पियों के हुनर को सम्मान, हौसला और बाजार देकर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई देने का प्रयास किया जा रहा है।

कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री दिलीप जायसवाल के निर्देशन में आयोजित राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार समारोह में मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री पंकज जोशी एवं उपाध्यक्ष श्री राकेश जादौन, अपर मुख्य सचिव श्री के.सी. गुप्ता, प्रबंध संचालक/आयुक्त हस्तशिल्प एवं हाथकरघा श्री मदन विभीषण नागर गोजे तथा आयुक्त रेशम श्री मोहित बुन्दस भी उपस्थिति रहे। आयोजन में नोडल अधिकारी श्री उमेश श्रीवास्तव, सहायक संचालक सुश्री रूपाली सक्सेना तथा प्रबंधक हस्तशिल्प श्री यश श्रवण, श्री ईशम मौर्य, सुश्री रंजना निनावे, श्री योगेंद्र जोनवार और श्री कुंदनलाल नागर सहित विभागीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संत रविदास हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम द्वारा आयोजित इस आयोजन को सफल बनाने में श्री गोविंददास आगरे, श्री मदन जोशी, श्री शिवेंद्र सिंह और डिजाइनर सुश्री अंकिता चंद्रवंशी गुप्ता का विशेष योगदान रहा।

 

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