छत्तीसगढ़ में ‘मराठा’ पर कसा शिकंजा, 17 केस दर्ज होने के बाद NSA के तहत 3 महीने की जेल

दुर्ग.
पुराने और वर्तमान आपराधिक रिकॉर्ड को डिजिटल और अद्यतन करने की दिशा में दुर्ग पुलिस की पहल के बीच एक सक्रिय अपराधी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। थाना छावनी क्षेत्र के मिलन चौक, कैम्प-02 भिलाई निवासी हिस्ट्रीशीटर शुभम तागड़े उर्फ मराठा (उम्र 29 साल) के खिलाफ वर्ष 2015 से 2026 तक कुल 17 आपराधिक प्रकरण दर्ज पाए गए।
आपराधिक गतिविधियों और लोक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए जिला दंडाधिकारी, दुर्ग ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 की धारा 3(2) के तहत उसे तीन महीने के लिए निरुद्ध करने का आदेश जारी किया है। आरोपी को केंद्रीय जेल, दुर्ग में रखा गया है। दुर्ग पुलिस के मुताबिक, पुराने पुलिस रिकॉर्ड को डिजिटल, ऑनलाइन और अद्यतन किए जाने से लंबे समय से सक्रिय अपराधियों की पहचान और उनके आपराधिक इतिहास की समीक्षा अब पहले की तुलना में तेजी से की जा रही है। एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए किसी व्यक्ति से जुड़े पुराने और वर्तमान मामलों की जानकारी एक साथ प्राप्त कर प्रकरणवार और व्यक्ति-वार विश्लेषण करना संभव हुआ है।
2015 से 2026 तक दर्ज हुए 17 मामले
पुलिस रिकॉर्ड की समीक्षा में शुभम तागड़े उर्फ मराठा के खिलाफ वर्ष 2015 से 2026 के बीच कुल 17 आपराधिक प्रकरण दर्ज होना पाया गया। इन मामलों में चोरी, मारपीट, लूट, अवैध हथियार, आबकारी अधिनियम और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। पुलिस के अनुसार वर्ष 2025 और 2026 में भी उसके खिलाफ मामले दर्ज हुए।
रिकॉर्ड में दर्ज प्रकरणों का विवरण –
- अपराध क्रमांक 22/2015 – धारा 294, 506, 323, 34 भादवि।
- अपराध क्रमांक 64/2015 – धारा 457, 380 भादवि।
- अपराध क्रमांक 21/2017 – धारा 379 भादवि।
- अपराध क्रमांक 28/2017 – धारा 379 भादवि।
- अपराध क्रमांक 206/2018 – धारा 25 आर्म्स एक्ट।
- अपराध क्रमांक 421/2018 – धारा 457, 380, 34 भादवि।
- अपराध क्रमांक 420/2018 – धारा 457, 380 भादवि।
- अपराध क्रमांक 323/2019 – धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट।
- अपराध क्रमांक 333/2022 – धारा 392 भादवि।
- अपराध क्रमांक 616/2022 – धारा 294, 506बी, 323 भादवि।
- अपराध क्रमांक 624/2022 – धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट।
- अपराध क्रमांक 375/2023 – धारा 327, 294, 506बी, 323, 34 भादवि।
- अपराध क्रमांक 376/2023 – धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट।
- अपराध क्रमांक 165/2025 – धारा 34(2) आबकारी अधिनियम।
- अपराध क्रमांक 468/2025 – धारा 74 बीएनएस एवं धारा 7, 8 पॉक्सो एक्ट।
- अपराध क्रमांक 469/2025 – धारा 126(2), 309(4) बीएनएस एवं पॉक्सो एक्ट।
- अपराध क्रमांक 414/2026 – धारा 34(2) आबकारी अधिनियम।
पुलिस ने बताया कि उपलब्ध आपराधिक रिकॉर्ड और लोक व्यवस्था के लिए प्रतिकूल गतिविधियों को देखते हुए जिला दंडाधिकारी, दुर्ग द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3(2) के तहत कार्रवाई की गई। आदेश के तहत शुभम तागड़े उर्फ मराठा को तीन माह के लिए केंद्रीय जेल, दुर्ग में निरुद्ध किया गया है। पुलिस का कहना है कि पुराने मामलों को अलग-अलग रजिस्टर और अभिलेखों में तलाशने की प्रक्रिया के बजाय अब डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से किसी व्यक्ति से संबंधित जानकारी को एक साथ देखा जा सकता है। इससे लंबे समय से सक्रिय व्यक्तियों की पहचान और उनके आपराधिक व्यवहार की समग्र समीक्षा में समय की बचत हो रही है।
डिजिटल रिकॉर्ड से अपराधियों की पहचान में तेजी
दुर्ग पुलिस द्वारा पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को व्यवस्थित कर ऑनलाइन और अद्यतन करने का काम किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, इस व्यवस्था के कारण वर्षों पुराने प्रकरणों, आरोपियों और उनकी आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी को कम समय में प्राप्त किया जा सकता है। नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ पुलिस रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, तकनीकी संसाधनों और सीसीटीएनएस से प्राप्त जानकारी के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में दुर्ग पुलिस पुलिसिंग को अधिक तकनीक आधारित और रिकॉर्ड-आधारित बनाने की दिशा में काम कर रही है। पुलिस के अनुसार, वर्षों से लंबित और पुराने रिकॉर्ड को व्यवस्थित कर ऑनलाइन एवं अद्यतन किया गया है, जिससे अपराधियों के पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड को एक साथ देखकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए उन्हें चिह्नित करना आसान हुआ है।
CCTNS और तकनीकी जानकारी का भी इस्तेमाल
दुर्ग पुलिस अपराध की जांच और अपराधियों की गतिविधियों के विश्लेषण के लिए सीसीटीएनएस तथा अन्य उपलब्ध तकनीकी माध्यमों से प्राप्त जानकारी का भी उपयोग कर रही है। पुलिस के अनुसार, नए कानूनों में उपलब्ध प्रावधानों के अनुरूप डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के बेहतर इस्तेमाल के जरिए विवेचना और अपराध नियंत्रण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर काम किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन पुलिसिंग, तकनीकी साक्ष्य और अपराधों की नियमित समीक्षा को एक साथ जोड़कर डेटा आधारित पुलिसिंग को मजबूत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लंबे समय से सक्रिय अपराधियों की पहचान कर उनके रिकॉर्ड के आधार पर समय रहते आवश्यक वैधानिक कदम उठाना भी है।
रिकॉर्ड तैयार करने में CCTNS टीम की भूमिका
दुर्ग पुलिस के अनुसार, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के संकलन, अभिलेखों को ऑनलाइन एवं अद्यतन करने, प्रकरणवार जानकारी की जांच और सक्रिय अपराधियों की पहचान के लिए रिकॉर्ड तैयार करने में CCTNS प्रभारी, CCTNS ऑपरेटरों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का दावा है कि आपराधिक प्रकरणों को ऑनलाइन करने और पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में व्यवस्थित करने की दिशा में दुर्ग पुलिस छत्तीसगढ़ में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
अपराधियों के रिकॉर्ड की समीक्षा जारी रहेगी
दुर्ग पुलिस ने कहा है कि अपराधों और अपराधियों के रिकॉर्ड की समीक्षा लगातार जारी रहेगी। लोक व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को प्रभावित करने वाली आपराधिक गतिविधियों में लगातार सक्रिय पाए जाने वाले व्यक्तियों को उपलब्ध रिकॉर्ड और वैधानिक प्रावधानों पर चिह्नित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी आपराधिक गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करें।



