भोपालवासियों को बड़ी सौगात: निशातपुरा स्टेशन से 3 लाख यात्रियों का सफर होगा आसान, मुख्य स्टेशन पर घटेगा दबाव

भोपाल
 करोड़ों रुपये की लागत से बनकर तैयार होने के बावजूद लंबे समय से बंद पड़े निशातपुरा रेलवे स्टेशन का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अब 28 जुलाई को स्टेशन का लोकार्पण करेंगे। पहले यह कार्यक्रम 26 जुलाई को प्रस्तावित था, लेकिन मुख्यमंत्री की व्यस्तता के कारण इसे आगे बढ़ा दिया गया।

निशातपुरा रेलवे स्टेशन को शुरू कराने की मांग को नईदुनिया ने लगातार प्रमुखता से उठाया। अखबार ने सवाल किया कि जब स्टेशन पूरी तरह तैयार है और सभी बुनियादी यात्री सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो इसका संचालन क्यों नहीं शुरू किया जा रहा। इस मुद्दे को लगातार उठाए जाने के बाद मामला गति पकड़ सका।

केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर हुआ निर्णय
सांसद आलोक शर्मा ने संसद भवन में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर स्टेशन का संचालन जल्द शुरू कराने का आग्रह किया। इसके बाद रेल मंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए।

अब 28 जुलाई को आयोजित होने वाले लोकार्पण कार्यक्रम में रेल मंत्री नई दिल्ली से वर्चुअल रूप से शामिल होंगे, जबकि मुख्यमंत्री, सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधि स्टेशन परिसर में मौजूद रहेंगे।

दो ट्रेनों का होगा संचालन
स्टेशन के शुरू होते ही इंदौर-जम्मूतवी मालवा एक्सप्रेस और जबलपु-वेरावल सोमनाथ एक्सप्रेस का संचालन निशातपुरा रेलवे स्टेशन से किया जाएगा। भविष्य में अन्य ट्रेनों के ठहराव और संचालन के लिए भी रेलवे से मांग की जाएगी।

तीन लाख से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, निशातपुरा स्टेशन शुरू होने से करीब तीन लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। भोपाल जंक्शन और रानी कमलापति स्टेशन पर यात्रियों का दबाव कम होगा तथा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को नजदीक से रेल सुविधा मिल सकेगी।

अभी बनी रहेंगी कुछ चुनौतियां
हालांकि स्टेशन शुरू होने के बावजूद यात्रियों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। स्टेशन तक पहुंचने के लिए अप्रोच रोड और शहर से सीधी कनेक्टिविटी अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है।

रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण कार्य जारी है, जिससे आवागमन प्रभावित है। साथ ही स्टेशन पर जलापूर्ति और कुछ अन्य परिचालन सुविधाएं भी अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी हैं।

 

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