विलंबित परियोजनाओं पर सख्ती, गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा

भोपाल

लोक निर्माण से लोक कल्याण

लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा है कि लोक निर्माण विभाग का प्रत्येक निर्माण कार्य केवल सड़क, पुल अथवा फ्लायओवर का निर्माण नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास, जनता की सुविधा और विश्वास की मजबूत नींव है। विभाग का मूल उद्देश्य “लोक निर्माण से लोक कल्याण” की भावना को साकार करना है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता, समयबद्धता, पारदर्शिता और जवाबदेही ही विभाग की कार्यसंस्कृति का आधार हैं तथा इन्हीं मानकों के अनुरूप प्रत्येक परियोजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

मंत्री  सिंह शुक्रवार को वल्लभ भवन में सेतु निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग  सुखवीर सिंह, विभाग के वरिष्ठ अभियंता, मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री, अन्य विभागीय अधिकारी तथा विभिन्न निर्माण एजेंसियों एवं ठेकेदारों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मंत्री  सिंह ने कहा कि प्रत्येक परियोजना निर्धारित समय-सीमा में उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ पूर्ण होना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए नियमित समीक्षा, प्रभावी फील्ड मॉनिटरिंग, तकनीकी परीक्षण तथा समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का त्वरित समाधान कर कार्यों में गति लाई जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और तकनीकी मानकों का पूर्ण अनुपालन प्रत्येक परियोजना की अनिवार्य शर्त है। परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता, अनावश्यक विलंब अथवा निर्धारित गुणवत्ता मानकों से विचलन स्वीकार्य नहीं होगा।

लोक निर्माण मंत्री  सिंह ने कहा कि प्रत्येक अधिकारी, अभियंता एवं निर्माण एजेंसी अपनी जिम्मेदारी का पूर्ण निर्वहन करते हुए उत्कृष्ट कार्य संस्कृति का परिचय दें। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य विभाग की पहचान हैं और इन्हीं के आधार पर जनता का विश्वास मजबूत होता है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को विभाग निरंतर प्रोत्साहित करेगा, वहीं जिन परियोजनाओं में अपेक्षित गुणवत्ता अथवा प्रगति में सुधार की आवश्यकता होगी, उनमें तत्काल सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी, ताकि प्रदेश में सुरक्षित, टिकाऊ एवं विश्वसनीय अधोसंरचना का निर्माण हो सके।

मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि विभाग और निर्माण एजेंसियां विकास यात्रा के सहभागी हैं। ठेकेदार उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ कार्य करें, समय पर परियोजनाएं पूर्ण करें, अपनी व्यावसायिक प्रतिष्ठा को मजबूत बनाएं तथा प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि विभाग सकारात्मक संवाद और समन्वय की भावना से कार्य करता है तथा कार्य निष्पादन के दौरान आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों एवं रचनात्मक सुझावों का स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज गुणवत्ता ही किसी भी निर्माण एजेंसी की सबसे बड़ी पहचान है। उत्कृष्ट कार्य केवल तकनीकी दृष्टि से ही बेहतर नहीं होता, बल्कि जनता का विश्वास भी अर्जित करता है।

मंत्री  सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में निर्माण कार्यों को राष्ट्रीय स्तर के श्रेष्ठ मानकों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। देश के अग्रणी राज्यों की उत्कृष्ट कार्य प्रणालियों, आधुनिक तकनीकों और सफल अनुभवों का अध्ययन कर उन्हें प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्वयं भी अनेक तकनीकी नवाचारों का अग्रणी राज्य रहा है और भविष्य में भी नवाचार आधारित निर्माण कार्यों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

लोक निर्माण मंत्री  सिंह ने कहा कि विभाग और निर्माण एजेंसियां विकास के साझेदार हैं तथा दोनों का साझा उद्देश्य प्रदेश को सुरक्षित, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली अधोसंरचना उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि विभाग शीघ्र ही अभियंताओं एवं ठेकेदारों की संयुक्त कार्यशाला आयोजित करेगा। इसमें आधुनिक निर्माण तकनीकों, गुणवत्ता मानकों, परियोजना प्रबंधन, श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों तथा नवाचारों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही विभिन्न राज्यों के सफल अनुभवों को साझा कर प्रदेश में और अधिक प्रभावी एवं आधुनिक निर्माण कार्य संस्कृति विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

लोक निर्माण मंत्री  सिंह ने कहा कि विभाग की कार्यप्रणाली लगातार डिजिटल एवं तकनीक आधारित बन रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग, नियमित फील्ड निरीक्षण, प्रभावी गुणवत्ता परीक्षण तथा समयबद्ध भुगतान जैसी व्यवस्थाओं से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ेंगी। उन्होंने अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों से तकनीक आधारित कार्य प्रणाली को अपनाने और बदलते समय के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विभाग, अभियंताओं, निर्माण एजेंसियों एवं ठेकेदारों के सामूहिक प्रयासों से मध्यप्रदेश में सुरक्षित, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली सेतु अधोसंरचना का निर्माण सुनिश्चित होगा तथा प्रदेश उत्कृष्ट निर्माण कार्य संस्कृति के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित होगा।

बैठक में सेतु अंतर्गत 30 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली निर्माणाधीन फ्लायओवर, रेल ओवर ब्रिज (आर.ओ.बी.) एवं पुल परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रस्तुत जानकारी के अनुसार कुल 48 परियोजनाएं चिन्हित हैं, जिनमें 5 फ्लायओवर, 33 आर.ओ.बी. तथा 10 पुल निर्माण कार्य शामिल हैं। परियोजनावार एवं जिलेवार समीक्षा के दौरान निर्माण प्रगति, तकनीकी पहलुओं, विभिन्न विभागों के समन्वय, बाधाओं तथा समय-सीमा के अनुरूप कार्यों की स्थिति का विस्तार से परीक्षण किया गया। विलंबित एवं चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर गति देने तथा नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए। 

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