सिंहस्थ 2028 से पहले बड़ा चुनौतीपूर्ण सवाल, GRP में भारी स्टाफ की कमी; कैसे संभलेगी भीड़?

उज्जैन 
 वर्ष 2028 में होने वाले उज्जैन सिंहस्थ महापर्व की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर शुरू हो चुकी हैं, लेकिन रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु रेल मार्ग से उज्जैन पहुंचते हैं, ऐसे में रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म और ट्रेनों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

इसी बीच सामने आए आंकड़े बताते हैं कि जीआरपी (गवर्मेंट रेलवे पुलिस) में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, जिससे सुरक्षा तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश में रेलवे पुलिस के कुल स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा अभी भी रिक्त है। दूसरी ओर विभाग का दावा है कि तकनीक और अतिरिक्त बल के जरिए इस कमी को पूरा किया जाएगा।

रेलवे पुलिस में पदों की स्थिति

इकाई- स्वीकृत पद- उपलब्ध कर्मचारी- रिक्त पद

भोपाल जीआरपी- 951- 328- 623

इंदौर जीआरपी- 785- 460- 325

जबलपुर जीआरपी- 724- 467- 257

कुल-2460- 1255- 1205

भोपाल ईकाई में सबसे अधिक कमी
सबसे अधिक कमी भोपाल इकाई में दर्ज की गई है। नेतृत्व स्तर पर भी कमी। रेलवे सुरक्षा केवल जवानों के भरोसे नहीं चलती, बल्कि अधिकारी स्तर की मौजूदगी भी जरूरी होती है। लेकिन उप पुलिस अधीक्षक (रेलवे) स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है।

पद- स्वीकृत- उपलब्ध -रिक्त

उप पुलिस अधीक्षक (रेलवे- 12-6-6)
रिक्त स्थान

भोपाल इकाई – बीना, ग्वालियर

इंदौर इकाई – रतलाम, उज्जैन

जबलपुर इकाई- जबलपुर, रीवा

उज्जैन में डिप्टी एसपी स्तर का पद खाली होना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सिंहस्थ के दौरान रेलवे संचालन और सुरक्षा का दबाव कई गुना बढ़ जाता है।

सिंहस्थ को लेकर क्या तैयारी?

    रेलवे स्टेशन और प्लेटफार्म पर सीसीटीवी आधारित निगरानी
    कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम
    डिजिटल संचार नेटवर्क
    भीड़ विश्लेषण तकनीक
    रनिंग ट्रेनों में विशेष निगरानी
    खोया-पाया और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था लागू की जाएगी

75 हजार अतिरिक्त बल की मांग
विभाग ने सिंहस्थ के लिए करीब 75 हजार अतिरिक्त बल की मांग भी की है। इसमें सिविल पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षा इकाइयों की तैनाती प्रस्तावित है। साथ ही वर्तमान कर्मचारियों को भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों को भरने या वैकल्पिक तैनाती पर काम किया जा रहा है। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि जब तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, तब क्या 2028 से पहले खाली पद भरकर मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सकेगा या फिर सिंहस्थ जैसी विशाल व्यवस्था को सीमित मानव बल और तकनीक के भरोसे संभालना पड़ेगा।

ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा- कोई तैयारी नहीं

ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा कि भोपाल में बहुत जरूरी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुआ था। जिसमें DGP MP, DG RPF, DRM भोपाल, DRM रतलाम, ADRM झांसी के अलावा RPF के चार IG  IG RPF भोपाल, IG RPF मुंबई, IG RPF प्रयागराज, IG RPF कोलकाता उपस्थित थे। कमिश्न उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, ADG-IG उज्जैन और पुलिस अधीक्षक DIG भी मौजूद थें। DGP रेलवे उत्तर प्रदेश ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव बताए।

राजा बाबू सिंह ने कहा हमारी जो GRP इकाई इंदौर है, जिस पर सिंहस्थ 2028 का जिम्मा होगा उसने कोई होमवर्क नहीं किया है। वहां, पुलिस अधीक्षक, 2 DSP उज्जैन और रतलाम के पद रिक्त हैं। सिंहस्थ 2028 को लेकर जो अस्थायी थाने और चौकी या मेला क्षेत्र बनेंगे उसके लिए अभी से अतिरिक्त बल मिल जाना चाहिए, जो अभी तक नहीं मिला है। 

प्रयागराज महाकुंभ से सीख, इस बार ज्यादा फोकस क्राउड मैनेजमेंट पर

बैठक में  पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ और जिला प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है, क्योंकि श्रद्धालुओं की संख्या पिछले आयोजनों की तुलना में अधिक हो सकती है।

उन्होंने निर्देश दिए कि प्रमुख स्टेशनों और मेला क्षेत्र में अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मार्ग बनाए जाएं ताकि भीड़ का दबाव कम किया जा सके। साथ ही रेलवे स्टेशनों पर अंतिम समय में प्लेटफॉर्म बदलने से बचने के निर्देश भी दिए गए, क्योंकि इससे अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

AI और CCTV से होगी निगरानी

सिंहस्थ 2028 में पहली बार बड़े स्तर पर AI आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों, होल्डिंग एरिया, पार्किंग और मेला क्षेत्र में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी ICCC से जोड़ा जाएगा।

यह कंट्रोल सेंटर रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगा और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा पब्लिक एड्रेस सिस्टम, डिजिटल साइन बोर्ड और कलर कोडिंग जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी ताकि श्रद्धालुओं को आसानी से दिशा-निर्देश मिल सकें।

रेलवे ने बनाई विशेष रणनीति

बैठक में रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। 2016 के सिंहस्थ की तुलना में इस बार तीन गुना ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही छोटी दूरी की मेला ट्रेनें, डायनेमिक टाइम टेबल, डबल इंजन वाली ट्रेनें और दिशा आधारित प्लेटफॉर्म व्यवस्था लागू की जाएगी। लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों का पहले से डायवर्जन भी तय किया जाएगा ताकि मुख्य रूट पर दबाव कम किया जा सके।

रेलवे द्वारा उज्जैन, इंदौर, रतलाम, भोपाल, ओंकारेश्वर रोड और सीहोर के स्टेशनों पर विशेष तैयारी की जा रही है। यहां नए फुटओवर ब्रिज, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, सैटेलाइट स्टेशन और साइडिंग लाइन विकसित की जाएंगी।

घाटों का विस्तार और बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार

उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि सिंहस्थ का आयोजन 9 अप्रैल से 8 मई 2028 तक प्रस्तावित है। मेले के लिए लगभग 3100 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घाटों का विस्तार करीब 37 किलोमीटर तक किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में सुविधा मिल सके।

वैज्ञानिक तरीके से यह आकलन किया जा रहा है कि एक निश्चित समय में एक किलोमीटर घाट पर कितने श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से स्नान कर सकते हैं। प्रशासन ने यह भी माना है कि इंदौर-देवास मार्ग से सबसे ज्यादा यातायात रहेगा। इसी को देखते हुए सड़क और पार्किंग व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई गई है।

सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

बैठक में जीआरपी और आरपीएफ अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। सभी स्टेशनों और भीड़ वाले इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी। इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग-अलग एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जाएगा।

सोनाली मिश्रा ने कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों में आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए रेलवे जोनों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच लगातार संवाद और संयुक्त प्रशिक्षण जरूरी है।

आपात स्थिति से निपटने की भी तैयारी

सिंहस्थ के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीम, एनडीआरएफ और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती की जाएगी। सभी प्रमुख स्थानों पर बैकअप पावर सिस्टम और आपातकालीन सहायता केंद्र बनाए जाएंगे।

अधिकारियों ने कहा कि इस बार तकनीक, बेहतर योजना और विभिन्न विभागों के समन्वय के जरिए सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारियां तेज
सिंहस्थ 2028 को लेकर जीआरपी ने अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। सीमित स्टाफ के बावजूद सीसीटीवी निगरानी, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल संचार नेटवर्क, भीड़ विश्लेषण तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही 75 हजार अतिरिक्त बल की मांग और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। एडीजी जीआरपी राजाबाबू।

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