उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार, योगी ने UPEIDA की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली

लखनऊ 
ये बात तो पक्‍की है कि उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान अगर किसी सरकारी एजेंसी ने राज्य की तस्वीर बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है तो वह है UPEIDA (Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority). आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट इसी ने जमीन पर उतारे हैं. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने UPEIDA की कमान सीधे अपने हाथ में ले ली है. सीएम ने साफ संकेत दिया है कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की गति और तेज की जाएगी. राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के फोकस के रूप में देखा जा रहा है। 

क्या है UPEIDA?
दरअसल, UPEIDA यानी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना राज्य में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और उनसे जुड़े विकास काममों के लिए की गई थी. इसका मुख्य मकसद केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि सड़क के किनारे उद्योग, निवेश, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और रोजगार के मौके भी विकसित करना भी है. यही वजह है कि यूपी में एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में देखा जाता है. ऐसे में यह भी जान लेना जरूरी है कि UPEIDA ने प्रदेश में कौन से सबसे बड़े प्रोजेक्ट डिलीवर किए हैं..

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे
लंबाई: लगभग 302 किमी
उद्घाटन: 2016
इससे यात्रा समय में भारी कमी आई.
पश्चिमी यूपी और राजधानी लखनऊ के बीच सीधी कनेक्टिविटी

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
लंबाई: लगभग 341 किमी
लखनऊ से गाजीपुर तक बनाया गया है.
लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये आई.
पूर्वी यूपी को राजधानी क्षेत्र से जोड़ा.

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
लंबाई: लगभग 296 किमी
चित्रकूट से इटावा क्षेत्र तक कनेक्टिविटी
अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये
बुंदेलखंड क्षेत्र को NCR नेटवर्क से जोड़ने वाला अहम मार्ग है.

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे
लंबाई: लगभग 91 किमी
गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है.
इससे पूर्वी यूपी की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया.

गंगा एक्सप्रेसवे
लंबाई: 594 किमी
मेरठ से प्रयागराज तक
लागत लगभग 36,000 करोड़ से अधिक.
यह राज्य का सबसे महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट है.

यूपीडा अभी किन परियोजनाओं पर काम कर रहा है?

    गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार और उससे जुड़े लिंक
    आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे
    अलीगढ़-आगरा एक्सप्रेसवे
    अलीगढ़-पलवल एक्सप्रेसवे
    अवध एक्सप्रेसवे
    चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे

    कई औद्योगिक कॉरिडोर और ई-वे हब परियोजनाएं
    इसके अलावा पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे ई-वे हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। 

    पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में एक्सप्रेसवे के बाद औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। 

सीएम योगी के कमान संभालने से क्या बदलेगा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की रेगुलर समीक्षा करते रहे हैं. हाल के महीनों में उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे समेत कई परियोजनाओं की वीकली मॉनिटरिंग और तय समयसीमा में काम पूरा करने पर जोर दिया है. वह कई बार मौकों पर निरीक्षण भी करने पहुंचे थे और मकसद साफ था कि ये इन अहम प्रोजेक्‍ट्स में भी किसी भी तरह का डिले नहीं चाहते. सीएम के UPEIDA की सीधी निगरानी में आने से भूमि अधिग्रहण में आने वाली दिक्‍कतें पहली बात तो तेजी से दूर हो सकती हैं. साथ ही विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा. खास बात ये भी है कि इसकी वित्तीय मंजूरियों में भी तेजी आएगी. परियोजनाओं की समयसीमा पर सख्ती बढ़ेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़े प्रोजेक्ट धरातल पर दिखाई दे सकते हैं। 

2027 चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर होगा सबसे बड़ा मुद्दा?
देखा जाए तो यूपी की राजनीति में एक्सप्रेसवे अब सिर्फ सड़क नहीं बल्कि विकास का भी हैं. भाजपा सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गंगा एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और नए लिंक एक्सप्रेसवे को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहेगी. यही वजह है कि UPEIDA की कमान पर मुख्यमंत्री की सीधी नजर को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि विकास और राजनीति दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

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