नौकरी के नाम पर जाल: झालावाड़ से मुंबई तक फैला सेक्स रैकेट नेटवर्क

झालावाड़

झालावाड़ पुलिस ने नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त के सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है. इन लड़कियों से वैश्यावृत्ति करवाने के लिए बाकायदा एंग्रीमेंट करवाया जाता था. परिजनों से स्टांप पर साइन लेने के बाद इन लड़कियों को धकेल दिया जाता था. लड़कियों के परिजन जब लड़की को बेचते थे तो उन्हें मामूली रकम मिलती थी. फिर दलाल के जरिए बिकने के बाद 35 लाख रुपये तक की कीमत वसूली जाती थी. यह पूरा रैकेट मुंबई तक चल रहा था. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 10 लड़कियों को रैकेट से मुक्त करवाया है. वहीं, महिला समेत 5 दलालों को गिरफ्तार भी किया है.

परिजनों ने भी साध रखी थी चुप्पी
मामले की हकीकत तब पता चली जब मुंबई पुलिस ने ऐसे ही मामले में कार्रवाई की. प्रकरण के तार झालावाड़ से जुड़े और फिर पूरा मामला खुल गया. एक ही समुदाय की कई लड़कियों को शिकार बनाया गया. लेकिन सामाजिक कुरीतियों, झगड़ा प्रथा और प्रभावशाली दलालों के डर के कारण पूरा समुदाय चुप्पी साधे हुए था. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर ने स्पेशल जांच टीम गठित कर गोपनीय जांच शुरू की.

बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर झांसा
दलालों का गिरोह गरीब परिवारों की बच्चियों को नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर खरीदता था. इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी उम्र बढ़ाई जाती और उन्हें मुंबई समेत अन्य शहरों में वैश्यावृत्ति के लिए भेज दिया जाता था.

पुलिस ने जानकारी जुटाना शुरू किया. फिर बूंदी से आए 5 आरोपियों को डिटेन कर लिया. ‎अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय के तहत मुंबई से 4, बूंदी से 1 और टोंक से 1 अन्य लड़की को भी दस्तयाब किया गया. कुल 10 लड़कियों में 7 नाबालिग और एक बालिग बताई जा रही है. जबकि दो लड़कियों की उम्र के बारे में सही जानकारी सामने नहीं आई है.

स्टांप में लिखी शर्त ऐसी की पढ़कर कांप उठेंगे
स्टांप से खुलासा हुआ है कि लड़कियों की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा दलाल खुद हड़प लेते थे. इतना ही नहीं, अनुबंध में यह अमानवीय शर्त भी दर्ज थी कि केवल आत्महत्या की स्थिति में ही कर्ज माफ माना जाएगा. ‎झालावाड़ पुलिस की इस कार्रवाई को मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है. फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी हुई है.

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