RTE दाखिला विवाद, निजी स्कूलों पर बीएसए की सख्ती बढ़ी

लखनऊ

राजधानी के नामी विद्यालय शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2020 (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने राजधानी के करीब 55 निजी विद्यालयों को नोटिस जारी किया है। विभाग का स्पष्ट निर्देश है, एक सप्ताह के अंदर प्रवेश न लेने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बीएसए विपिन कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एल्डिको लखनऊ पब्लिक स्कूल की अपील को खारिज करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। राजधानी में 55 ऐसे विद्यालय हैं जो आरटीई के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। विद्यालय में चयन होने के बाद भी बच्चों को प्रवेश नहीं देना चाहते हैं। इन विद्यालयों को नोटिस जारी करते हुए प्रवेश देने के निर्देश दिए गए हैं।

जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय के अनुसार, राजधानी के सिटी मॉन्टेंसरी, जयपुरिया, टीपीएस, एलपीएस, स्टडी हॉल सहित 35 से अधिक विद्यालयों को पहले से नोटिस जारी किया गया है। जबकि अन्य विद्यालयों को भी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बच्चों को प्रवेश न देने पर विद्यालय की मान्यता रद्द करने की भी प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का ये है आदेश
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की ओर से भेजे गए सभी बच्चों को प्रवेश देना निजी विद्यालयों का कर्तव्य है। आरटीई अधिनियम के तहत प्रत्येक विद्यालय में 25 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है। नियम का पालन न करने पर सरकार को कार्रवाई का अधिकार है।

4500 बच्चे प्रवेश के इंतजार में
बीएसए कार्यालय के अनुसार, राजधानी के 1600 निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत प्रवेश होने हैं। अभी तक 12,000 विद्यार्थियों को प्रवेश देने की प्रक्रिया जारी है। करीब 4500 ऐसे बच्चे हैं जिनका आरटीई में चयन हुआ है लेकिन निजी विद्यालय प्रवेश देने में हीलाहवाली कर रहे हैं।

 

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