नई कार्य संस्कृति से आत्मनिर्भर बन रहे छात्र, चुनौतियों से लड़ने की मिल रही ताकत

रायपुर

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट संकल्प के तहत वर्ष 2026 के लिए दो चरणो में विभागीय अधिकारियों और अधीक्षकों  को  प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि इस कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के सभी आश्रम-छात्रावासों में ‘प्रोजेक्ट संकल्प’ का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य ‘सीखो-सिखाओ, अंजोर फैलाओ’ की कार्य संस्कृति को संस्थागत स्वरूप देना तथा विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों से सफलतापूर्वक मुकाबला करने के लिए तैयार करना है।

प्रमुख सचिव बोरा ने कहा है कि छात्रावास केवल आवासीय सुविधा का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और नेतृत्व विकास के सशक्त मंच हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को गंभीरता से लिया जाए, ताकि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित हो सके। प्रशिक्षण का कार्यक्रम दो चरणों में संपन्न होगा 

प्रथम चरण में जनजाति बाहुल्य 21 जिलों के सहायक आयुक्तों का 2.5 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में “जीवन के रंग, खुशियों के संग” कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा करते हुए जिलों में कार्यान्वयन की रणनीति तैयार की जाएगी। प्रशिक्षण उपरांत सभी जिलों द्वारा अपने-अपने छात्रावासों के लिए कार्ययोजना विभाग को प्रस्तुत की जाएगी।

द्वितीय चरण में छात्रावास एवं आश्रम अधीक्षकों के लिए 8 दिवसीय वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें 6 दिनों तक प्रतिदिन 3 घंटे के सत्रों में ‘सफलता मंत्र 1 से 9’ तक की अवधारणाएँ साझा की जाएंगी। बीच के दो दिनों में अधीक्षक सीखी हुई बातों को अपने जीवन एवं विद्यार्थियों के साथ व्यवहार में लाने का प्रयास करेंगे। इस प्रकार तैयार अधीक्षक छात्रावासों में विद्यार्थियों, सहयोगियों तथा जहाँ संभव हो अभिभावकों के साथ भी प्रशिक्षण की सीख साझा करेंगे, जिससे सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण का निर्माण हो सके।

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट संकल्प-2026’ के माध्यम से राज्य के छात्रावासों एवं आश्रमों में नई कार्य संस्कृति की स्थापना कर विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, अनुशासित एवं सफल नागरिक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा रहा है। इस पहल से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ नैतिक सामाजिक एवं जीवन कौशल से भी सशक्त बनाया जा रहा है। आश्रम-छात्रावास में रह रहे छात्र-छात्राओं को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण भोजन, नियमित शैक्षणिक सहयोग तथा खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर उपलब्ध कराये जा रहे है। 
 उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश एवं विभागीय मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छात्रावासी बच्चों के भविष्य को नई उड़ान देने के उद्देश्य से यह अभिनव पहल की गई हैं।

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