एराज मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में आयोजित हुआ पेशेंट सेफ्टी कार्यक्रम

एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में हुआ पेशेंट सेफ्टी 

कॉन्क्लेव-2026 । विशेषज्ञों ने कहा कि "एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता" 

लखनऊ 
 एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में संपन्न हो रहे पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में विशेषज्ञों ने एक मत से माना कि "एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता" दो दिनों तक चलने वाले पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति प्रो. अजय सिंह ने बताया कि मरीज की सुरक्षा (पेशेंट सेफ्टी) किसी एक चिकित्सक या स्टाफ की जिम्मेदारी नहीं यह एक टीम वर्क है। चिकित्सीय पेशे में त्रुटि (कॉम्लीकेशन) और गलती (एरर) में अंतर होता है। उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा में होने वाली 50 फीसद से ज्यादा गलतियों को रोका जा सकता है साथ ही एआई (आर्टिफिशियन इंटेलिजेंस) हर मर्ज की दवा नहीं हो सकती हालांकि पेशेंट सेफ्टी में एआई मददगार बन सकता है इलाज के दौरान होने वाली गलतियों को AI पूरी तरह से रोक नहीं सकता इसके लिए लगातार सीखने की जरूरत है।
मुख्य अतिथि प्रो. अजय एराज लखनऊ मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में आयोजित पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में  उन्होंने बताया कि जब भी बात होती है तो बड़े अस्पतालों या चिकित्सा संस्थानों को लेकर ही योजनाएं बनाई जाती हैं। पीएचसी और सीएचसी पर भी ध्यान देने की जरूरत है। वहां गलतियों की संभावना अधिक है जो मरीज के लिए साबित होती हैं। प्रो. अजय ने बताया कि अगर किसी प्रोसीजर में डाक्टर से गलती हो जाए तो उसे सुधारे न कि गलती करने वाले का नाम सार्वजनिक करें। ऐसा करना डाक्टर के प्रति मरीज के मन में विश्वास को कम करता है। उन्होंने सलाह दी कि मरीज की सुरक्षा के प्रति बने मानकों के बारे में युवा डाक्टरों को लगातार प्रशिक्षित करें। उन्हें उन बिन्दुओं पर सीखाएं जहां चूक की संभावना अधिक होती है। कार्यक्रम में आए इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट के निदेशक डॉक्टर गिरधन ज्ञानी ने बताया कि आज कई चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों में पेशेंट सेफ्टी पर कोई बात ही नहीं करता। इसी का कारण है कि गड़बडिय़ों की संभावना लगातार बनी रहती है। करीब 60 प्रतिशत गलतियों मानवीय चूक के कारण होती हैं। इनको रोकने के लिए सबसे बेहतर तरीका मॉनीटरिंग बढ़ाना है। चाहे आईसीयू हो, ओटी हो, ओपीडी या वार्ड निगरनी तंत्र मजबूत होने से गलतियां कम होंगी। इस अवसर पर एराज मेडिकल कालेज के लिए तैयार पेशेंट सेफ्टी सिवोनियर और पेशेंट सेफ्टी फ्लायर का लोकार्पण भी किया गया। 

काम में गलती हो तो सुधारें जरूर: वीसी

एरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अब्बास अली महदी ने बताया कि काम करने पर गलतियां होने की संभावना हमेशा बनी रहती है। अगर गलती हो तो उसे समझें। गलती से सीखें और उसे सुधारें जरूर तभी मरीज की जान बचाना आसान होगी। उन्होंने युवा चिकित्सकों और स्टाफ को सलाह दी कि गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करें और सुधारने की कोशिश करें। गलती को अनदेखा न करें क्योंकि चिकित्सीय पेशे में एक ही गलती को बार बार दोहराना उचित नहीं है। कार्यक्रम में एरा यूनिवर्सिटी की प्रो-वीसी प्रोफेसर फरजाना महदी ने कहा कि गलतियों को कम करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें। तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है और इसका लाभ मरीजों को मिले इसके लिए जरूरी है कि डाक्टर नई तकनीक को हमेशा सीखते रहें। 

पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने दी सलाह 

  • – डॉ. नीलिमा क्षीरसागर ने कहा कि ‘उचित दवा लेखन कौशल ही रोगी सुरक्षा की नींव है।’ दवा देने के साथ ही मरीज की शंकाओं का समाधान जरूरी करें। 
  • – डॉ. बिकाश मेधी ने कहा कि कम्युनिकेशन स्किल पर ध्यान दें। भाषा सबंधी गलतियों से भी मेडिकेशन एरर हो सकती है जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है। 
  • – डॉ. बनानी पोद्दार ने कहा कि मरीज के अनुसार मानक बदल जाते हैं। गर्भवती महिला और साठ साल के बुजुर्ग को एक ही बीमारी में समान दवा नहीं दी जा सकती। उनकी दवाएं अलग-अलग होंगी।

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