सुप्रीम कोर्ट में SIR केस की चर्चा, ममता बनर्जी ने रखीं दलीलें, CJI ने उठाए अहम मुद्दे

नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. सीएम ममता बनर्जी ने खुद अदालत में अपनी बात रखने की कोशिश की. हालांकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने बीच में ही उन्हें टोकते हुए कहा कि उनकी ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और श्याम दीवान पहले ही सभी दलीलें रख चुके हैं. बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी सोमवार को होगी.
चुनाव आयोग पर ममता के आरोप
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को तमाम फैक्ट्स बताए थे, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया. इस पर CJI ने साफ किया कि आपकी नई याचिका में कुछ नए मुद्दे जरूर हैं, लेकिन जो बातें आप कह रही हैं, वे आपके वकील पहले ही अदालत के सामने रख चुके हैं.
वोटर्स के नाम हटाए जा रहे हैंः ममता बनर्जी
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने रवींद्रनाथ टैगोर की स्पेलिंग में बदलावों का जिक्र करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बात कही. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं.
वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट के लिए अब सिर्फ 11 दिन बचे हैं और यह प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी होनी है, जबकि इस मामले की सुनवाई के लिए केवल चार दिन का समय बचा है. उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 32 लाख ‘अनमैप्ड वोटर्स’ हैं और लगभग 3.26 करोड़ नामों में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ पाई गई है, जो कुल मतदाताओं का करीब 20 प्रतिशत है.
श्याम दीवान ने मांग की कि चुनाव आयोग को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ में शामिल हर मतदाता का नाम सार्वजनिक करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद कई मामलों में केवल नाम, उम्र और लिंग दर्ज हैं, लेकिन यह नहीं बताया गया कि मतदाता का नाम सूची से क्यों हटाया गया. लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वे वोटर लिस्ट में क्यों नहीं हैं.
इस पर CJI ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि यह प्रक्रिया सिर्फ एक सामान्य सूचना नहीं है, बल्कि संबंधित लोगों को व्यक्तिगत नोटिस भी दिए जा रहे हैं. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यह समय कृषि और त्योहारों का है, ऐसे में कई लोग अपने गृह जनपद से बाहर हैं. CJI ने सवाल किया कि जब बंगाल में बीएलओ पर दबाव और मौतों की बातें सामने आ रही हैं, तो असम जैसे राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो रहा.
'बंगाल को टारगेट किया जा रहा है'
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में चुनाव आयोग सभी दस्तावेज स्वीकार कर रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में उन्हें खारिज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब त्योहार और फसल कटाई का मौसम है और बड़ी संख्या में लोग राज्य से बाहर हैं.
इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ तक कह दिया. उन्होंने कहा, “इलेक्शन कमीशन… सॉरी, व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.”
सुनवाई के अंत में CJI ने कहा कि अदालत समय बढ़ाने का निर्देश दे सकती है. उन्होंने ममता बनर्जी से कहा कि अदालत को उनके वकील श्याम दीवान की काबिलियत पर पूरा भरोसा है और उन्होंने अपने लिए श्रेष्ठ वकील चुने हैं.
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है. CJI ने कहा कि चुनाव आयोग आज उठाए गए मुद्दों पर निर्देश लेकर अदालत के समक्ष आए. वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार को उपलब्ध ग्रुप-बी अधिकारियों की सूची पेश करने को कहा गया है. सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग की ओर से अधिकारियों के प्रति ‘होस्टिलिटी’ को लेकर लिखित आशंका जताई गई है.
अदालत में क्या-क्या हुआ, यहां देखें
ECI के वकील: 'मेरी इंस्ट्रक्शन यह थी कि सिर्फ स्पेलिंग की मामूली गलती पर नोटिस जारी नहीं किया जाएगा.'
CJI: 'राज्य का एग्जीक्यूटिव हेड भी आज यहां मौजूद है. क्या यह संभव नहीं कि राज्य बंगला भाषा के विशेषज्ञ उपलब्ध कराए, जो समिति के साथ बैठकर स्थानीय उच्चारण और स्पेलिंग पर सलाह दें?'
ममता बनर्जी: 'मैं इस पर सफाई दे सकती हूं, क्योंकि मैं उसी राज्य से हूं.'
CJI: 'इसमें कोई संदेह नहीं कि आप वहीं से हैं.'
ममता बनर्जी: 'बेंच का धन्यवाद कि मुझे बोलने की अनुमति दी गई. 'समस्या यह है कि वकील तब लड़ते हैं, जब सब कुछ खत्म हो चुका होता है. जब हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय दरवाजों के पीछे रोता रहता है. मैंने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया.'
'मैं कोई खास व्यक्ति नहीं हूं. मैं एक बंधुआ मजदूर जैसी हूं. मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं, मैं एक साधारण नागरिक हूं.'
CJI: 'पश्चिम बंगाल सरकार ने भी याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट के सर्वश्रेष्ठ वकील राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं—कपिल सिब्बल, गोपाल और श्याम दीवान. हमारी मदद के लिए सर्वश्रेष्ठ लीगल टीम मौजूद है. 19 जनवरी को जब मामला आया था, तब श्री सिब्बल ने पश्चिम बंगाल सरकार और नागरिकों की समस्याएं बहुत स्पष्टता से रखी थीं. सभी मुद्दे चिन्हित हो चुके हैं. हर समस्या का समाधान होता है. हमें यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी निर्दोष नागरिक बाहर न रह जाए.
'सिर्फ तीन आधार ऐसे हैं, जिन पर किसी को आपत्ति नहीं होगी—
पहला, दोषसिद्ध व्यक्ति.
दूसरा, जो राज्य या देश से बाहर जा चुके हैं.
तीसरा, गैर-नागरिक.'
लेकिन बंगाल में नामों का उच्चारण अलग तरीके से होता है. आजकल AI-आधारित रिकॉर्डिंग हो रही है. ऐसी तकनीकी या भाषाई गलती के कारण किसी असली नागरिक को बाहर नहीं किया जाना चाहिए.
ECI: 'हमें अभी तक याचिका की कॉपी नहीं मिली है. हमें यह भी नहीं पता कि असली समस्या क्या है. हमें जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाए.'
CJI: 'आपको कॉपी इसलिए नहीं दी गई क्योंकि यह मामला पहली बार आज आया है. लेकिन सच्चाई यह है कि यह पूरी प्रक्रिया टाइमलाइन पर है. हमने 10 दिन का अतिरिक्त समय दिया था, अब उसमें सिर्फ 4 दिन बचे हैं. सैद्धांतिक रूप से अगर ‘रॉय’, ‘दत्ता’, ‘गांगुली’ जैसे नामों की स्पेलिंग अलग-अलग लिखी जा रही है तो यह गंभीर विषय है. हम खुद नहीं जानते कि टैगोर की स्पेलिंग आजकल कैसे लिखी जा रही है—कोई ‘E’ लगाता है, कोई नहीं.'
ममता बनर्जी: 'अगर अनुमति हो तो मैं प्रमुख बंगाली अखबारों में छपी कुछ तस्वीरें दिखा सकती हूं. उनकी पूरी प्रक्रिया सिर्फ डिलीशन की है. बेटी शादी के बाद ससुराल जाती है और पति का सरनेम अपनाती है उसे ‘मिसमैच’ दिखाकर नाम हटा दिया जाता है. काम के लिए पता बदलने वालों को भी ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ बताकर हटाया जा रहा है.'
'यह डिस्क्रिपेंसी नहीं, डिस्क्रिपेंसी मैपिंग है. इस कोर्ट के आदेश से जब आधार कार्ड, डोमिसाइल सर्टिफिकेट, सरकारी हाउसिंग कार्ड स्वीकार किए गए, तो बंगाल के लोग खुश थे. लेकिन चुनाव की पूर्व संध्या पर सिर्फ बंगाल को ही टारगेट किया जा रहा है.'
ममता बनर्जी: '24 साल बाद अचानक चार महीने में यह सब करने की क्या जल्दी थी? फसल का मौसम था, पूजा का मौसम था—जब लोग शहर में नहीं थे, तब नोटिस जारी कर दिए गए.'
ममता बनर्जी (अनुमति मांगते हुए): 'अगर आप अनुमति दें तो मैं कुछ कहना चाहती हूं.'
ममता बनर्जी: 'हम न्याय के लिए आए हैं. चुनाव आयोग को सब बताया, लेकिन कोई सुन नहीं रहा.'
CJI (टोकते हुए): 'मैडम ममता, आपकी ओर से कपिल सिब्बल और अन्य वरिष्ठ वकील आपकी दलीलें रख चुके हैं.'
CJI: 'आपकी नई याचिका में कुछ अतिरिक्त बिंदु हैं. योग्य मतदाताओं के नाम सूची में आने ही चाहिए. आयोग को इसके लिए उपाय करने होंगे.'
श्याम दीवान: 'वोटर लिस्ट के फाइनल पब्लिकेशन में 11 दिन बचे हैं—14 फरवरी तक. सुनवाई पूरी करने के लिए सिर्फ 4 दिन हैं.
32 लाख अनमैप्ड वोटर्स हैं. 3.26 करोड़ नामों में लॉजिकल गड़बड़ी है—जो कुल मतदाताओं का 20% है.'
श्याम दीवान: 'चुनाव आयोग को लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट में हर नाम अपलोड करना चाहिए और यह बताना चाहिए कि नाम क्यों हटाया गया.'
CJI: 'हमें बताया गया था कि यह सिर्फ सामान्य सूचना नहीं, बल्कि व्यक्तिगत नोटिस भी है.'
ममता बनर्जी: 'उन्होंने ERO और AERO की शक्तियां खत्म कर दी हैं. 3800 माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं—अधिकतर बीजेपी शासित राज्यों से. ये लोग EC ऑफिस में बैठकर नाम काट रहे हैं.
पहले चरण में 58 लाख नाम ‘मृत घोषित’ कर हटाए गए. इतनी महिलाओं के नाम कटे—यह एंटी-वूमन है.'
CJI: 'जरूरत पड़ी तो हम निर्देश देंगे कि हर नोटिस BLO की अनुमति से ही जारी हो.'
ECI: 'राज्य सरकार ने पर्याप्त क्लास-2 अधिकारी नहीं दिए. हमें मजबूरी में माइक्रो-ऑब्जर्वर लगाने पड़े.'
सॉलिसिटर जनरल: 'जिस तरह से आरोप लगाए जा रहे हैं, उसमें स्पष्ट शत्रुता दिखती है.'
ममता बनर्जी: '150 से ज्यादा लोग मरे. बंगाल को ही क्यों टारगेट किया गया? असम या नॉर्थ-ईस्ट क्यों नहीं?'
CJI: 'हम इस मामले को सोमवार को फिर सुनेंगे. ECI आज उठाए गए मुद्दों पर निर्देश लेकर आए.'
CJI: 'पश्चिम बंगाल सरकार क्लास-2 अधिकारियों और SDMs की सूची दे.'
ममता बनर्जी: 'मैं विनम्रता से अनुरोध करती हूं—कृपया लोकतंत्र को बचाइए.'
CJI: 'एक ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता लेखक को भी नोटिस जारी हुआ है. हर राज्य में कुछ नए मुद्दे आते हैं.'
ममता बनर्जी: 'इलेक्शन कमीशन… सॉरी—व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है.'
अदालत: ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी. चुनाव आयोग सोमवार को जवाब दाखिल करेगा.



