मध्य प्रदेश सरकार फिर लेगी ₹5200 करोड़ का कर्ज, चालू वित्तीय वर्ष में कुल ऋण इतना पहुंचा

 

भोपाल

मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज लेगी। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 57,100 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका हैं। अब यह लोन 62,300 करोड़ रुपए का हो गया है।

एमपी सरकार साल 2026 में दूसरी बार कर्ज ले रही हैं। 7 फरवरी को 5200 करोड़ की राशि मिलेगी। जिसकी पहली किस्त 1200 करोड़ रुपए 7 साल के लिए ब्याज समेत भुगतान की तारीख 4 फरवरी 2033 तारीख की है। 2000 करोड़ का कर्ज 17 साल के लिए लिया जा रहा है, जो 4 फरवरी 2043 तक के लिए है।

मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार लगातार कर्ज के बढ़ते बोझ तले दबती जा रही है। राज्य सरकार ने एक बार फिर 5200 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने का निर्णय लिया है। यह कर्ज इस वित्तीय वर्ष में दूसरी बार लिया जा रहा है।सरकारी जानकारी के अनुसार, इस कर्ज का भुगतान ब्याज सहित 4 फरवरी 2033 तक किया जाएगा।

इसमें से 2000 करोड़ रुपये का कर्ज 17 साल की अवधि के लिए लिया गया है, जिसका भुगतान 4 फरवरी 2043 तक होगा।
वहीं, 2000 करोड़ रुपये की तीसरी किस्त 22 साल की अवधि के लिए ली गई है, जिसे ब्याज सहित चुकाया जाएगा।

इस वित्तीय वर्ष में कुल कर्ज 62,300 करोड़ तक पहुँचा
चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक मध्य प्रदेश सरकार कुल 57,100 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी थी। ताजा 5200 करोड़ रुपये के कर्ज के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 62,300 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।

जानिए मोहन सरकार ने कब-कब लिया कर्ज?

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक लिए गए कर्ज का विवरण इस प्रकार है:
7 जनवरी 2026 – 400 करोड़
30 दिसंबर 2025 – 3500 करोड़
2 दिसंबर 2025 – 3000 करोड़
11 नवंबर 2025 – 4000 करोड़
28 अक्टूबर 2025 – 5200 करोड़
30 सितंबर 2025 – 3000 करोड़
23 सितंबर 2025 – 3000 करोड़
9 सितंबर 2025 – 4000 करोड़
26 अगस्त 2025 – 4800 करोड़
5 अगस्त 2025 – 4000 करोड़
30 जुलाई 2025 – 4300 करोड़
8 जुलाई 2025 – 4800 करोड़
4 जून 2025 – 4500 करोड़
7 मई 2025 – 5000 करोड़

इस तरह लगातार कर्ज लेने के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

विपक्ष के निशाने पर मोहन सरकार

मध्य प्रदेश पर लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर कांग्रेस भाजपा सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों की सही योजना न होने के कारण सरकार बार-बार कर्ज लेने को मजबूर हो रही है।

 

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