गाजा प्लान पर ट्रंप को झटका, शक्तिशाली देश ने दिखाई ठेंगा, भारत किस राह पर?

वाशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा बोर्ड ऑफ पीस प्लान की शुरुआत अच्छी नहीं रही। खबर है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों ने इसमें शामिल होने से इनकार करने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल, ट्रंप के इस बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि फ्रांस के इस फैसले की वजह यह हो सकती है। इधर, स्थायी सदस्यता के लिए 1 बिलियन डॉलर फीस भी सवालों के घेरे में है।
 
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में मामले के जानकारों के हवाले से बताया गया कि ट्रंप गुरुवार को दावोस में इसपर दस्तखत चाहते हैं। साथ ही उन्होंने फ्रांस की वाइन और शैंपेन पर 200 फीसदी टैरिफ लगाने की भी धमकी दे दी है। हालांकि, माना जा रहा है कि फ्रांस ने यह फैसला बोर्ड के UNSC के विकल्प या प्रतिद्वंद्वी के तौर पर उभरने के चलते उठाया है। इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

अब अगर मैक्रों की तरफ से न्योता अस्वीकार कर दिया जाता है, तो यह यूरोप के कई देशों के नेताओं के फैसले पर असर डाल सकता है। हालांकि, किसी भी नेता बोर्ड का खुलकर विरोध नहीं किया है। हालांकि, हंगरी एकमात्र ऐसा यूरोपीय देश है, जिसने ट्रंप का न्योता स्वीकार कर लिया है। अमेरिका ने पाकिस्तान, वियतनाम, जॉर्डन, ग्रीस, तुर्की, मिस्र समेत करीब 60 देशों बोर्ड में आने के लिए आमंत्रित किया है।

फ्रांस को दे दी टैरिफ की धमकी
ट्रंप ने कहा, 'खैर, कोई भी उन्हें नहीं चाहता, क्योंकि वह जल्द ही दफ्तर से बाहर होने वाले हैं।' उन्होंने कहा, 'मैं उनकी वाइन्स और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाऊंगा और वह शामिल हो जाएंगे।' खास बात है कि 2027 में मैक्रों का दूसरा कार्यकाल खत्म हो रहा है।

भारत का क्या प्लान
भारत ने गाजा पर अंतरराष्ट्रीय शांति बोर्ड के गठन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर अभी कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की है। हालांकि हिन्दुस्तान से बातचीत में सत्रों ने कहा कि इस पर विचार-विमर्श किया जा रहा है तथा अगले कुछ दिनों में फैसला ले लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि निमंत्रण का अध्ययन किया जा रहा। अगले कुछ दिनों के भीतर इसमें शामिल होने या नहीं होने पर फैसला लिया जाएगा।

ट्रंप ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया। यह निकाय, गाजा में स्थायी शांति लाने और ‘वैश्विक संघर्ष’ के समाधान के लिए ‘‘एक साहसिक नए दृष्टिकोण’’ पर काम करेगा। ट्रंप ने मोदी को एक पत्र लिखा, जिसे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर साझा किया।

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