गरुड़ पुराण के अनुसार अंतिम संस्कार में 5 प्रकार के लोग नहीं कर सकते भागीदारी

हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का जिक्र किया गया है, जिनमें से एक है अंतिम संस्कार. अंतिम संस्कार को बहुत पवित्र और गंभीर कर्म माना जाता है. दरअसल, इस संस्कार के दौरान मृतक व्यक्ति के शव को मुखाग्नि दे दी जाती है, जिसके बाद उसका शरीर पंचतत्व लीन हो जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, यह संस्कार आत्मा की शांति और उसकी आगे की यात्रा से संबंधित होता है. इसलिए, अंतिम संस्कार के समय माहौल शांत और संयमित रहना जरूरी होता है. इसी वजह से गरुड़ पुराण में कुछ लोगों को इस दौरान वहां न जाने की सलाह दी गई है. तो आइए गरुड़ पुराण के द्वारा जानते हैं कि अंतिम संस्कार में किन किन लोगों को शामिल नहीं होना चाहिए.
गर्भवती महिलाएं
गरुड़ पुराण के अनुसार, श्मशान घाट या अंतिम संस्कार में गर्भवती महिलाओं को शामिल होने की अनुमति नहीं है. दरअसल, अंतिम संस्कार का माहौल दुख और तनाव से भरा होता है, जो कि गर्भवती महिला मन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. श्मशान घाट में नकारात्मक ऊर्जाएं भी सक्रिय होती हैं, जिसका प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ सकता है.
छोटे बच्चे
छोटे बच्चों को भी श्मशान घाट या अंतिम संस्कार में जाने की मनाही होती है. गरुड़ पुराण के अनुसार, छोटे बच्चों के लिए श्मशान का दृश्य, जलती चिता और लोगों का रोना मन में डर या बेचैनी पैदा कर सकता है. इसी कारण बच्चों को अंतिम संस्कार में ले जाना सही नहीं माना जाता है.
बीमार लोग
बीमार और कमजोर हृदय वाले व्यक्तियों को भी श्मशान घाट या अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होना चाहिए. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो लोग पहले से बीमारी से जूझ रहे हों, उनके लिए यह माहौल भारी पड़ सकता है. शोक और तनाव उनकी ज्यादा तबीयत और खराब कर सकता है.
जिनके घर सूतक चल रहा हो
गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी के घर हाल ही में मौत हुई हो और सूतक लगा हो, तो उस दौरान दूसरे अंतिम संस्कार में जाना वर्जित माना जाता है. मान्यता है कि सूतक के समय व्यक्ति को धार्मिक कार्यों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए.
जो बहुत ज्यादा दुखी या भावुक हों
गरुड़ पुराण के अनुसार, अंतिम संस्कार आत्मा की शांति से जुड़ा होता है. इस दौरान शांत मन और संयम जरूरी होता है. इसलिए, अत्यधिक रोना आत्मा की शांति में बाधा बन सकता है, इसलिए ऐसे लोगों को इस कर्म से दूर रहने की सलाह दी जाती है.



